क्योंकि ढकने के लिए वास्तविक आमाप नहीं, बल्कि आभासी आमाप महत्वपूर्ण होता है — अर्थात वह आमाप जो आँख को दिखाई देता है। आभासी आमाप वास्तविक आमाप और दूरी दोनों पर निर्भर करता है।
चंद्रमा सूर्य से बहुत छोटा है, परंतु हमसे बहुत अधिक निकट भी है। दोनों प्रभाव लगभग पूरी तरह एक-दूसरे को संतुलित कर देते हैं, इसलिए आकाश में चंद्रमा और सूर्य लगभग एक जैसे आमाप के दिखते हैं। यही कारण है कि चंद्रमा का पटल सूर्य के पटल को पूरी तरह ढक सकता है।
सूर्य चंद्रमा से लगभग 400 गुना चौड़ा
सूर्य हमसे चंद्रमा की अपेक्षा लगभग 400 गुना दूर
आभासी आमाप ∝ आमाप ÷ दूरी → दोनों अनुपात लगभग बराबर निकलते हैं
क्रियाकलाप 12.4 ही इसका प्रमाण है: आपका अँगूठा मात्र लगभग 2 cm चौड़ा है और मित्र का सिर लगभग 16 cm, फिर भी अँगूठा 5 मीटर दूर के सिर को पूरी तरह ढक लेता है — क्योंकि अँगूठा आँख से केवल लगभग 60 cm दूर है। चंद्रमा वही कर रहा है जो आपका अँगूठा करता है।
क्या आप जानते हैं? बुध और शुक्र चंद्रमा से बहुत बड़े हैं पर बहुत अधिक दूर हैं, अतः उनका आभासी आमाप अत्यंत छोटा होता है। शुक्र सूर्य के सामने से गुजरे तो वह केवल एक काला बिंदु दिखता है — ग्रहण कभी नहीं।