कुतूहल अध्याय 12 वैज्ञानिक से परिचय

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
एम. के. वेणु बप्पू आधुनिक भारतीय खगोलिकी के जनक के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने भारत में अनेक यंत्रों और दूरदर्शकों, जैसे — नैनीताल (उत्तराखंड) के निकट मनोरा शिखर पर तथा केवलुर (तमिल नाडु) में दूरदर्शकों की स्थापना के प्रयासों का नेतृत्व किया। केवलुर की वेधशाला का नाम उनके नाम पर रखा गया है। इन्होंने मुख्यतः तारों पर कार्य किया और एक धूमकेतु की भी खोज की। इन्होंने सूर्य-ग्रहण का अध्ययन करने के लिए विश्व के विभिन्न भागों की यात्रा भी की।
उत्तर

एम. के. वेणु बप्पू (1927–1982) को आधुनिक भारतीय खगोलिकी का जनक इसलिए कहा जाता है कि उन्होंने वे सुविधाएँ खड़ी कीं जिन पर भारतीय खगोलिकी आज भी टिकी है।

उन्होंने क्या कियायह क्यों महत्वपूर्ण था
नैनीताल (उत्तराखंड) के निकट मनोरा शिखर पर दूरदर्शकों की स्थापना का नेतृत्वहिमालय की तलहटी में भारत को एक आधुनिक वेधशाला मिली
केवलुर (तमिल नाडु) में वेधशाला की स्थापना का नेतृत्वयहाँ एक बड़ा प्रकाशिक दूरदर्शक है; वेधशाला अब उन्हीं के नाम से जानी जाती है
तारों पर अनुसंधानतारों की चमक संबंधी उनका कार्य आज भी उनकी दूरी आँकने में उपयोग होता है
एक धूमकेतु की खोजयह दुर्लभ उपलब्धि है और धैर्यपूर्वक किए गए अवलोकन का प्रमाण है
सूर्य-ग्रहण के अध्ययन हेतु विश्व-भ्रमणपूर्ण सूर्य-ग्रहण कुछ ही मिनटों का होता है और पृथ्वी की एक पतली पट्टी से ही दिखता है, अतः वैज्ञानिकों को उस तक जाना पड़ता है
वैज्ञानिक ग्रहणों के पीछे क्यों जाते हैं: उन कुछ मिनटों में सूर्य का चकाचौंध करने वाला पटल ढक जाता है और सूर्य का मंद बाह्य वायुमंडल दिखाई देने लगता है। जैसा अध्याय में कहा गया है, ग्रहण ऐसी परिघटनाओं के अध्ययन का अवसर देते हैं जिनका अवलोकन अन्यथा नहीं किया जा सकता।
क्या आप जानते हैं? केवलुर की वेणु बप्पू वेधशाला का संचालन भारतीय खगोलिकी संस्थान (आई.आई.ए.), बेंगलुरु करता है — वही संस्थान जो सामान्य संवत् 1899 में स्थापित कोडाईकनाल सौर वेधशाला का संचालन भी करता है।
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