प्र1.
मैंने ध्यान दिया है कि प्रत्येक वर्ष में ऋतुएँ एक निश्चित चक्रीय क्रम में ही आती हैं। क्या यह किसी तरह सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की परिक्रमा करने से संबंधित है?
उत्तर
हाँ — परंतु अकेला परिक्रमण पर्याप्त नहीं है। ऋतुएँ परिक्रमण के साथ-साथ दो और तथ्यों से बनती हैं: पृथ्वी का घूर्णन अक्ष झुका हुआ है और पृथ्वी गोल है।
पृथ्वी वर्ष भर अपने झुकाव को एक ही दिशा में बनाए रखती है। अतः सूर्य के चारों ओर घूमते समय पहले एक गोलार्ध और फिर दूसरा गोलार्ध सूर्य की ओर झुका होता है।
| माह | उत्तरी गोलार्ध | प्राप्त सूर्य-प्रकाश | वहाँ की ऋतु |
|---|---|---|---|
| जून | सूर्य की ओर झुका हुआ | अधिक तीव्र, प्रतिदिन 12 घंटे से अधिक | ग्रीष्म ऋतु |
| दिसंबर | सूर्य से परे की ओर | कम तीव्र, प्रतिदिन 12 घंटे से कम | शीत ऋतु |
झुकाव क्यों निर्णायक है: पृथ्वी गोल है, इसलिए सूर्य की किरणों की समान मात्रा उस गोलार्ध में छोटे क्षेत्र पर फैलती है जो सूर्य की ओर झुका है और वहाँ अधिक गरमी होती है; दूसरे गोलार्ध में वही किरणें बड़े क्षेत्र पर फैलती हैं और कम गरमी देती हैं। झुकाव के कारण झुके हुए गोलार्ध का आधे से अधिक भाग प्रकाशित भाग में रहता है — इसीलिए ग्रीष्मकाल में दिन शीतकाल की तुलना में लंबे होते हैं, जैसा चित्र में बालिका ने देखा। अधिक तीव्र प्रकाश और अधिक समय — दोनों मिलकर ग्रीष्म ऋतु बनाते हैं।
मुख्य बात: दक्षिणी गोलार्ध में ऋतुएँ इसके ठीक विपरीत होती हैं — ऑस्ट्रेलिया में जून में शीतकाल और दिसंबर में ग्रीष्मकाल होता है।