प्र1.
दो घंटे पश्चात सप्तर्षि का पुन: अवलोकन कीजिए। क्या यह अपनी स्थिति से हट गया है? पुन: इसकी स्थिति का आरेख बनाइए और समय अंकित कीजिए।
उत्तर
हाँ, यह स्पष्ट रूप से अपनी स्थिति से हट गया है — और इसका झुकाव भी बदल गया है, अर्थात सातों तारों का पूरा पैटर्न उन्हीं वृक्षों या भवनों के सापेक्ष अलग ढंग से तिरछा दिखाई देता है।
आरेख ईमानदारी से बनाइए — पहले भूमि-रेखा और कोई स्थिर वृक्ष अथवा भवन बनाइए, फिर उसके ऊपर सातों तारे, और आरेख के साथ समय अवश्य लिखिए। चित्र 12.7 पुणे के एक विद्यार्थी द्वारा 1–2 अप्रैल की रात्रि को बनाया गया ऐसा ही अभिलेख है:
| समय | सप्तर्षि कहाँ दिखाई देता है |
|---|---|
| 7 PM | उत्तर-पूर्व में नीचे की ओर |
| 9 PM | कुछ ऊँचा, फिर भी उत्तर-पूर्व की ओर |
| 11 PM | सबसे ऊँचा, लगभग ठीक उत्तर में |
| 1 AM | उत्तर से आगे बढ़कर नीचे उतरता हुआ |
| 3 AM | और नीचे, उत्तर-पश्चिम की ओर |
| 5 AM | उत्तर-पश्चिम में नीचे की ओर |
ऐसा क्यों होता है: पृथ्वी प्रत्येक घंटे में 15° घूमती है (360° ÷ 24 घंटे)। दो घंटे में यह 30° घूम जाती है, अतः पूरा आकाश 30° खिसका हुआ दिखता है। यह बहुत बड़ा और आसानी से दिखने वाला परिवर्तन है — भुजा फैलाकर रखी लगभग तीन मुट्ठियों जितना।
सुझाव: सभी अवलोकन एक ही स्थान से और एक ही रात्रि में कीजिए, और प्रत्येक बार वही वृक्ष अथवा भवन बनाइए। खड़े होने का स्थान बदलने पर तुलना बिगड़ जाएगी।