कुतूहल अध्याय 2 क्रियाकलाप 2.6

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
एक पात्र में कुछ बारीक कटे हुए प्याज लीजिए। साथ ही इसमें साफ सूती वस्त्र की अथवा निस्यंदक पत्र की कुछ पट्टियाँ भी डालिए। पात्र को कसकर बंद कीजिए और रात भर के लिए छोड़ दीजिए। पात्र से सूती वस्त्र या निस्यंदक पत्र की दो पट्टियाँ निकालिए और उनकी गंध की जाँच कीजिए।
उत्तर

रात भर बंद पात्र में रहने के बाद पट्टियों से तेज़ प्याज की गंध आती है, यद्यपि अब उनसे कोई प्याज छू भी नहीं रहा।

ऐसा क्यों होता है: प्याज की गंध के लिए उत्तरदायी पदार्थ बंद पात्र की वायु में फैल जाता है और वस्त्र या कागज में बैठ जाता है। पात्र को कसकर बंद रखना ही इसका रहस्य है — खुले पात्र में गंध कमरे में उड़ जाती और पट्टियों में लगभग कुछ न आता।
संकेत: गंध सूँघने के लिए पट्टी को नाक से चिपकाने के बजाय हाथ से हवा को नाक की ओर झलिए — प्रयोगशाला में सूँघने की यही मानक विधि है।
प्र2.
क्या आपने प्याज के टुकड़ों में तैयार की गई पट्टियों पर इमली का पानी और बेकिंग सोडा का विलयन डालने से पूर्व एवं पश्चात आने वाली गंध में किसी परिवर्तन का अनुभव किया? अपने अवलोकनों को अभिलेखित कीजिए।
उत्तर

हाँ, दोनों पट्टियों में स्पष्ट अंतर है।

पट्टीडाला गया पदार्थप्रकृतिडालने के पश्चात गंध
पट्टी 1इमली का पानीअम्लीयप्याज की गंध अब भी स्पष्ट
पट्टी 2बेकिंग सोडा का विलयनक्षारीयप्याज की गंध लगभग समाप्त
ऐसा क्यों होता है: प्याज का गंधयुक्त पदार्थ क्षार से अभिक्रिया कर ऐसे पदार्थ में बदल जाता है जिसमें गंध नहीं होती। अम्ल ऐसा नहीं करता, अत: अम्लीय पट्टी अपनी प्याज-गंध बनाए रखती है। इस प्रकार नाक वही अम्ल/क्षार सूचना दे रही है जो लिटमस आँखों को देता है — इसीलिए प्याज एक घ्राण सूचक है।
प्र3.
इसी प्रकार अन्य अम्लीय और क्षारीय पदार्थों के साथ गंध में परिवर्तन का परीक्षण कीजिए और अपने अवलोकनों को अभिलेखित कीजिए।
उत्तर

क्रियाकलाप 2.1 के और प्रतिदर्शों के साथ दोहराने पर वही प्रतिरूप मिलता है। नीचे दिए अभिलेख से अपने अवलोकन मिलाइए।

प्याज की पट्टी पर डाला गया पदार्थप्रकृतिगंध में परिवर्तन
नींबू का रसअम्लीयप्याज की गंध बनी रहती है
सिरकाअम्लीयप्याज की गंध बनी रहती है
साबुन का विलयनक्षारीयप्याज की गंध बहुत कम हो जाती है
चूने का पानीक्षारीयप्याज की गंध बहुत कम हो जाती है
नल का पानीउदासीनकोई विशेष परिवर्तन नहीं
निष्कर्ष: प्याज की पट्टी केवल गंध से क्षारीय पदार्थों को शेष से अलग कर देती है। हल्दी-पत्र की भाँति यह भी अम्लीय और उदासीन में भेद नहीं कर पाती — परंतु हल्दी-पत्र के विपरीत इसे न प्रकाश चाहिए, न दृष्टि।
यह कीजिए: पूरा क्रियाकलाप प्याज के स्थान पर वैनिला एसेंस की कुछ बूँदों के साथ दोहराइए। परिणाम वही रहेगा और प्रयोगशाला की महक कहीं बेहतर।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ