कुतूहल अध्याय 2 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
हल्दी को ‘स्वर्णिम’ मसाला क्यों कहा जाता है?
उत्तर

अपने चटख स्वर्णिम-पीले रंग के कारण और भारतीय घरों तथा आयुर्वेद में इसे मिले महत्व के कारण।

  • हल्दी अदरक कुल की सदस्य है, जिसे भारत और अन्य देशों में उगाया जाता है।
  • भोजन को स्वाद और रंग देने के अतिरिक्त इसके अन्य लाभों पर शोध किया जा रहा है।
  • आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में इसे अनेक स्वास्थ्य लाभ देने वाला माना जाता है और यह अनेक पारंपरिक घरेलू उपचारों में प्रयुक्त होती है।
और इस अध्याय के लिए: जो रंजक हल्दी को स्वर्णिम बनाता है वही उसे सूचक भी बनाता है। अम्लीय और उदासीन द्रवों में स्वर्णिम-पीली, क्षार में लाल — यह रंग उसकी पहचान भी है और वैज्ञानिक उपयोग भी।
प्र2.
अश्विन ने गुरु पूर्णिमा के दिन अपने शिक्षक के प्रति आभार प्रकट करने के लिए एक शुभकामना पत्र बनाया। उसने श्वेत कागज पर हल्दी का लेप लगाकर उसे सुखाया। उसने एक विलयन का उपयोग करके अपनी शुभकामनाएँ शिक्षक की मातृभाषा (ओडिया भाषा) में उस शुष्क कागज पर लिखीं। संदेश लिखने के लिए किस विलयन का उपयोग किया जा सकता है?
उत्तर

तालिका 2.4 का कोई भी क्षारीय विलयन — साबुन का विलयन सबसे सरल है, और बेकिंग सोडा का विलयन, चूने का पानी या कपड़े धोने के पाउडर का विलयन भी उतना ही अच्छा रहेगा।

पीला हल्दी-लेप वाला कागज + क्षारीय विलयन
→ गीले अक्षर लाल हो जाते हैं
→ स्वर्णिम पृष्ठभूमि पर लाल संदेश
केवल क्षार ही क्यों: हल्दी का रंग केवल क्षारीय माध्यम में बदलता है। नींबू के रस या सिरके से लिखने पर कोई निशान ही नहीं बनेगा, क्योंकि अम्ल हल्दी को प्रभावित नहीं करते — और सादे पानी या चीनी के विलयन से भी कुछ नहीं दिखेगा।
यह कीजिए: किसी के जन्मदिन के लिए स्वयं ऐसा कार्ड बनाइए। कागज पर हल्दी का लेप लगाकर सुखाइए, फिर साबुन के विलयन में डुबोई रुई की तीली से लिखिए। लिखते-लिखते ही संदेश लाल रंग में उभरता जाएगा।
प्र3.
क्या ऐसे कुछ पदार्थ हैं जिनकी गंध अम्लीय अथवा क्षारीय पदार्थ मिलाने पर परिवर्तित हो जाती है?
उत्तर

हाँ। जिन पदार्थों की गंध अम्लीय या क्षारीय माध्यम में बदल जाती है उन्हें घ्राण सूचक कहते हैं।

  • प्याज — कपड़े की पट्टी पर लगी तीखी प्याज-गंध बेकिंग सोडा के विलयन जैसे क्षार से बहुत कम हो जाती है, जबकि इमली के पानी जैसे अम्ल से लगभग वैसी ही बनी रहती है।
  • वैनिला एसेंस और लौंग का तेल भी ऐसे ही व्यवहार करते हैं — क्षार में इनकी विशिष्ट गंध लुप्त हो जाती है।
ये उपयोगी क्यों हैं: रंग वाला सूचक उस व्यक्ति के काम नहीं आता जो रंग नहीं देख सकता, और न ही अंधेरे कमरे में। घ्राण सूचक उत्तर आँख के बजाय नाक से देता है — यही विचार अभ्यास के प्रश्न 5 में है, जहाँ मान्या की आँखों पर पट्टी बँधी है।
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