(iii) सिरका
परिवर्तन उत्क्रमित करने के लिए क्षार समाप्त करना होगा → अम्ल मिलाइए
चारों विकल्पों में केवल सिरका (ऐसीटिक अम्ल) अम्लीय है
उत्तर: (iii) सिरका
अद्यतन2026-09-05
(iii) सिरका
(iv) क्षारीय, क्षारीय और क्षारीय
| विलयन | प्रयुक्त सूचक | प्रेक्षण | निष्कर्ष |
|---|---|---|---|
| क | लाल लिटमस विलयन | नीला हो जाता है | क्षारीय |
| ख | हल्दी का विलयन | लाल हो जाता है | क्षारीय |
| ग | लाल गुलाब का अर्क | हरा हो जाता है | क्षारीय |
प्रत्येक पट्टी को लाल गुलाब के अर्क के नियम पर परखिए — अम्ल में लाल, क्षार में हरा, उदासीन में अपरिवर्तित।
| चित्र | डूबे सिरे का रंग | पात्र में उपस्थित विलयन की प्रकृति |
|---|---|---|
| चित्र 2.13 | हरा | क्षारीय |
| चित्र 2.14 | कोई परिवर्तन नहीं — वही गुलाबी-लाल | उदासीन |
| चित्र 2.15 | गहरा लाल | अम्लीय |
यह द्रव अम्लीय है।
| सूचक | प्रेक्षित परिवर्तन | इससे क्या सिद्ध होता है |
|---|---|---|
| लाल लिटमस | कोई परिवर्तन नहीं | क्षारीय नहीं — क्षार होता तो नीला हो जाता |
| नीला लिटमस | लाल में परिवर्तित | निश्चित रूप से अम्लीय |
| हल्दी | रंग में कोई परिवर्तन नहीं | पुष्टि करता है कि क्षारीय नहीं है |
मान्या को घ्राण सूचक का उपयोग करना चाहिए — जैसे प्याज की पट्टियाँ, वैनिला एसेंस या लौंग का तेल।
नियम सरल है: दोनों में से एक सूचक हो और दूसरा अम्ल या क्षार। कुछ कार्यशील संयोजन नीचे दिए हैं।
| कागज पर लिखने के लिए | छिड़काव के लिए | प्राप्त लेखन का रंग |
|---|---|---|
| साबुन का विलयन (क्षार) | हल्दी का विलयन | पीले कागज पर लाल |
| बेकिंग सोडा का विलयन (क्षार) | हल्दी का विलयन | पीले कागज पर लाल |
| हल्दी का विलयन | चूने का पानी (क्षार) | हल्के पीले कागज पर लाल |
| नींबू का रस (अम्ल) | लाल गुलाब का अर्क | लाल लेखन |
| साबुन का विलयन (क्षार) | लाल गुलाब का अर्क | हरा लेखन |
| लाल गुलाब का अर्क | नींबू का रस (अम्ल) | लाल लेखन |
| सिरका (अम्ल) | बैंगनी पत्तागोभी का अर्क | लालिमा लिए गुलाबी लेखन |
| धोने के सोडा का विलयन (क्षार) | बैंगनी पत्तागोभी का अर्क | हरा लेखन |
मिश्रण का रंग लाल से हरा हो जाएगा।
हाँ। संतरे का रस अम्लीय है (सिट्रिक अम्ल), अत: दादी को ऐसा सूचक चाहिए जो अम्ल में स्पष्ट रंग दे। लाल गुलाब का अर्क सर्वोत्तम है; नीला लिटमस विलयन अथवा बैंगनी पत्तागोभी का अर्क भी चलेगा।
प्राकृतिक सूचक बनाने का अर्थ है किसी पादप-भाग से रंगीन रस निकालकर उसे, अथवा उसमें भिगोए कागज को, सूचक के रूप में उपयोग करना। दो मानक विधियाँ हैं।
विधि 1 — अर्क (उदाहरण: लाल गुलाब का अर्क)
विधि 2 — सूचक-पत्र (उदाहरण: हल्दी-पत्र)
पूरी तरह नहीं — हल्दी-पत्र बेकिंग सोडा का विलयन तो पहचान लेगा, परंतु सिरके और चीनी के विलयन में भेद नहीं कर पाएगा।
| द्रव | प्रकृति | हल्दी-पत्र | पहचान हुई? |
|---|---|---|---|
| बेकिंग सोडा का विलयन | क्षारीय | लाल हो जाता है | हाँ — पहचान हो गई |
| सिरका | अम्लीय | कोई परिवर्तन नहीं | नहीं — भेद नहीं हो पाया |
| चीनी का विलयन | उदासीन | कोई परिवर्तन नहीं | नहीं — भेद नहीं हो पाया |
कार्य पूरा कैसे करें: जिन दोनों ने हल्दी-पत्र को पीला ही रहने दिया, उन पर नीला लिटमस पत्र लगाइए।
द्रव X क्षारीय है। उसमें आँवले का रस अधिक मात्रा में मिलाने पर हरा रंग लाल हो जाएगा।
पूर्ण प्रवाह चित्र इस प्रकार है।
| प्रवाह चित्र का रिक्त स्थान | उत्तर |
|---|---|
| मृदा की प्रकृति ______ हो सकती है। | अम्लीय |
| मृदा की प्रकृति ______ हो सकती है। | क्षारीय |
| मृदा की प्रकृति का परीक्षण करने के लिए किस सूचक का उपयोग किया जा सकता है? | लिटमस पत्र (लाल एवं नीला); हल्दी-पत्र अथवा लाल गुलाब का अर्क भी |
| अम्लीय मृदा का उपचार ______ से किया जा सकता है। | चूने से, जो क्षारीय है |
| क्षारीय मृदा का उपचार ______ से किया जा सकता है। | जैविक खाद और कम्पोस्ट की गई पत्तियों जैसे कार्बनिक पदार्थों से, जो अम्ल छोड़ते हैं |