प्र1.
अमन ने भूल से अंडे के छिलकों पर तथा संगमरमर के कुछ टुकड़ों पर सिरका गिरा दिया और उसने वहाँ बुलबुले उठते देखे। फिर उसने अंडे के छिलकों को तथा संगमरमर के अन्य टुकड़ों पर साबुन का विलयन डाला परंतु तब बुलबुले नहीं निकले। सिरके के साथ बुलबुले बने परंतु साबुन के विलयन के साथ नहीं, ऐसा क्यों?
उत्तर
क्योंकि अंडे का छिलका और संगमरमर एक ही पदार्थ — कैल्शियम कार्बोनेट — से बने हैं, और कैल्शियम कार्बोनेट अम्ल से अभिक्रिया करता है, क्षार से नहीं।
अंडे का छिलका / संगमरमर = कैल्शियम कार्बोनेट
सिरका = अम्ल (ऐसीटिक अम्ल)
अम्ल + कार्बोनेट → लवण + जल + कार्बन डाइऑक्साइड गैस
→ यही गैस बुलबुलों के रूप में निकलती है
सिरका = अम्ल (ऐसीटिक अम्ल)
अम्ल + कार्बोनेट → लवण + जल + कार्बन डाइऑक्साइड गैस
→ यही गैस बुलबुलों के रूप में निकलती है
साबुन का विलयन क्षारीय है। क्षार कैल्शियम कार्बोनेट से इस प्रकार अभिक्रिया नहीं करता, अत: कोई गैस नहीं बनती और बुलबुले नहीं दिखते।
ऐसा क्यों होता है: बुलबुले अम्ल द्वारा छिलके को सामान्य रूप से ‘घोल देने’ का परिणाम नहीं हैं — यह एक विशिष्ट अभिक्रिया है जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड मुक्त होती है। इसीलिए बुलबुले एक त्वरित परीक्षण हैं: किसी पत्थर पर सिरका या नींबू का रस डालिए, यदि बुदबुदाहट हो तो उसमें कार्बोनेट है।
क्या आप जानते हैं? ठीक इसी कारण अम्लीय वर्षा संगमरमर के स्मारकों को क्षति पहुँचाती है, और इसीलिए मंदिर के संगमरमरी फर्श को कभी नींबू या सिरके से साफ नहीं करना चाहिए। चॉक (यह भी कैल्शियम कार्बोनेट है) भी प्रयोगशाला में तनु अम्ल में इसी प्रकार बुदबुदाता है।