कुतूहल अध्याय 2 अन्वेषणात्मक परियोजनाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अम्लीय अथवा क्षारीय पदार्थों और प्राकृतिक सूचकों का उपयोग करके रंगोली बनाइए।
उत्तर

विचार यह है कि रंगीन चूर्ण के स्थान पर रंग स्वयं उभरे जैसे-जैसे आप छिड़कते जाएँ।

  1. आधार बनाइए। बड़े श्वेत कागज पर हल्दी चूर्ण की पतली परत फैलाइए अथवा हल्दी के लेप से डिज़ाइन बनाकर सुखाइए। अब आपके पास स्वर्णिम-पीली रंगोली है।
  2. क्षार से चित्र बनाइए। रुई की तीली या निचोड़ने वाली बोतल से साबुन के विलयन, बेकिंग सोडा के विलयन या चूने के पानी से रेखाएँ, पंखुड़ियाँ और बिंदियाँ बनाइए। हर स्पर्श तत्काल लाल हो जाएगा।
  3. दूसरा रंग जोड़िए। कागज के दूसरे भाग पर लाल गुलाब या बैंगनी पत्तागोभी के अर्क की परत लगाइए, फिर नींबू के रस से लाल और साबुन के विलयन से हरा बनाइए।
  4. विज्ञान भी दिखाइए। रंगोली के पास एक छोटा कार्ड रखिए जिसमें लिखा हो कि किस पदार्थ से कौन-सा रंग बना और क्यों।
आधार परतकिससे बनायाउभरने वाला रंग
हल्दीसाबुन या बेकिंग सोडा का विलयनलाल
बैंगनी पत्तागोभी का अर्कनींबू का रसलालिमा लिए गुलाबी
बैंगनी पत्तागोभी का अर्कधोने के सोडा का विलयनहरा
लाल गुलाब का अर्कचूने का पानीहरा
संकेत: अख़बार बिछाकर काम कीजिए, द्रवों को नामांकित बिंदुपातियों में रखिए और बाद में हाथ धोइए। यह रंगोली कागज पर बनाइए, ऐसे फर्श पर नहीं जिसे बाद में रगड़ना पड़े।
प्र2.
आप विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जल की अम्लीय, क्षारीय अथवा उदासीन प्रकृति के विषय पर अपनी कक्षा में चर्चा कर सकते हैं। आप वर्षा, नल, नदियों आदि स्रोतों से प्राप्त जल के प्रतिदर्शों का परीक्षण कर सकते हैं।
उत्तर

अच्छी परियोजना में क्या होना चाहिए: स्वच्छ नामांकित बोतलें, हर प्रतिदर्श पर एक ही ढंग से किया गया एक ही परीक्षण, परिणामों की तालिका और एक ईमानदार निष्कर्ष।

  1. स्वच्छ बोतलों में प्रतिदर्श एकत्रित कीजिए और प्रत्येक पर स्रोत, तिथि और स्थान लिखिए — वर्षा-जल, नल का पानी, नदी या तालाब का जल, हैंडपंप का पानी, उबाला हुआ पानी, बोतलबंद पानी।
  2. प्रत्येक की जाँच नीले लिटमस और फिर लाल लिटमस से कीजिए, हर बार नई पट्टी लेकर।
  3. परिणाम तालिका में लिखिए और कक्षा में चर्चा कीजिए।
जल का स्रोतनीला लिटमसलाल लिटमसप्रकृति
नल का पानीकोई परिवर्तन नहींकोई परिवर्तन नहींउदासीन
खुले में एकत्रित वर्षा-जलहल्का लालकोई परिवर्तन नहींहल्का अम्लीय
तालाब का जलकोई परिवर्तन नहींकोई परिवर्तन नहींउदासीन
नाले के पास नदी का जलकोई परिवर्तन नहींहल्का नीलाहल्का क्षारीय
वर्षा-जल प्राय: हल्का अम्लीय क्यों होता है: गिरते समय वर्षा वायु से कार्बन डाइऑक्साइड तथा अन्य गैसें घोल लेती है। कारखानों और भारी यातायात के पास ऐसी गैसें अधिक होती हैं, अत: वहाँ की वर्षा अधिक अम्लीय होती है — इसी परिघटना को अम्लीय वर्षा कहते हैं।
स्वयं जाँचिए: वर्षा की पहली बौछार और आधे घंटे बाद की वर्षा दो अलग बोतलों में लीजिए। पहला प्रतिदर्श प्राय: अधिक अम्लीय निकलेगा, क्योंकि उसने वायु की धूल और गैसें धो डाली हैं।
प्र3.
अपने क्षेत्र की मृदा का प्रतिदर्श एकत्रित कीजिए और यह पता लगाइए कि इसकी प्रकृति अम्लीय है, क्षारीय है अथवा उदासीन है।
उत्तर

विधि

  1. सतह से लगभग 10 सेमी नीचे से थोड़ी मृदा निकालिए — ऊपर की ढीली धूल नहीं। खेत या उद्यान के दो-तीन स्थानों से लेकर मिला लीजिए।
  2. दो चम्मच मृदा गिलास में डालिए, मृदा की ऊँचाई से लगभग तीन गुना स्वच्छ पानी डालिए और अच्छी तरह हिलाइए।
  3. तब तक रखा रहने दीजिए जब तक मृदा बैठ न जाए और ऊपर का जल पर्याप्त स्वच्छ न हो जाए।
  4. ऊपर के स्वच्छ जल को नीले लिटमस और फिर लाल लिटमस की पट्टी से छुआइए।
नीला लिटमस → लाल = अम्लीय मृदा → चूने से उपचार
लाल लिटमस → नीला = क्षारीय मृदा → जैविक खाद या कम्पोस्ट की पत्तियों से उपचार
दोनों में कोई परिवर्तन नहीं = उदासीन मृदा → खराब वृद्धि का अर्थ पोषक तत्वों की कमी

नमूना उत्तर: “हमारे विद्यालय के उद्यान की मृदा ने किसी लिटमस पत्र का रंग नहीं बदला, अत: वह उदासीन है। विद्यालय के पीछे वाले खेत की मृदा ने नीले लिटमस को हल्का लाल कर दिया, अत: वह खेत कुछ अम्लीय है और उसमें थोड़ा चूना लाभकारी होगा।”

मृदा के स्थान पर ऊपर का जल क्यों: लिटमस द्रव को पढ़ता है। गीली मिट्टी पत्र पर लगाने से भूरे धब्बे के नीचे रंग-परिवर्तन छिप जाएगा, अत: मृदा को अपने घुलनशील पदार्थ जल में छोड़ने दीजिए और उसी जल की जाँच कीजिए।
संकेत: हो सके तो वर्षा-जल या आसुत जल प्रयोग कीजिए। कुछ क्षेत्रों में नल का पानी स्वयं हल्का क्षारीय होता है और आपका परिणाम बदल देगा।
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