कुतूहल अध्याय 2 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
मैं यह जानने के लिए उत्सुक हूँ कि लाल और नीले लिटमस पत्र की पट्टियाँ किस पदार्थ से बनी हैं। जब इन पर कुछ प्रतिदर्शों की बूँदें डाली जाती हैं तो इनका रंग क्यों बदल जाता है?
उत्तर

लिटमस पत्र साधारण कागज है जिसे लिटमस में भिगोया गया है। लिटमस लाइकेन से प्राप्त एक प्राकृतिक रंजक है। यह दो रूपों में मिलता है — रंजक का नीला रूप और लाल रूप।

रंग इसलिए बदलता है क्योंकि लिटमस एक अम्ल-क्षार सूचक है: अम्लीय द्रव में इसका एक रंग होता है और क्षारीय द्रव में दूसरा। नीली पट्टी पर अम्ल की बूँद डालते ही रंजक लाल रूप में बदल जाता है और लाल पट्टी पर क्षार डालते ही नीले रूप में।

ऐसा क्यों होता है: किसी रंजक का रंग इस बात पर निर्भर करता है कि उसके अणु किस रूप में हैं। अम्ल लिटमस अणु को लाल रूप में और क्षार उसे नीले रूप में ले जाता है। कागज पर कुछ नया नहीं चढ़ता — वही रंजक दो रूपों के बीच पलटता है, इसीलिए परिवर्तन तत्काल होता है।
क्या आप जानते हैं? लिटमस अकेला ऐसा रंजक नहीं है। इसी अध्याय में आगे लाल गुलाब और हल्दी का उपयोग होता है, और चुकंदर, बैंगनी पत्तागोभी, जामुन तथा गुड़हल भी काम करते हैं।
प्र2.
समूह ‘ग’ के पदार्थों जैसे नल का पानी, शक्कर का विलयन और नमक का विलयन इत्यादि से दोनों प्रकार के लिटमस पत्रों का रंग नहीं बदलता है। क्या आप इनकी प्रकृति के विषय में पूर्वानुमान लगा सकते हैं?
उत्तर

ये उदासीन हैं — न अम्लीय, न क्षारीय।

ऐसा क्यों होता है: नीले लिटमस को लाल केवल अम्ल कर सकता है और लाल लिटमस को नीला केवल क्षार। जो द्रव दोनों पत्रों को अछूता छोड़ देता है उसमें न अम्ल है, न क्षार — रंजक को प्रतिक्रिया करने के लिए कुछ है ही नहीं। अध्याय इस तीसरी प्रकृति को उदासीन कहता है।
संकेत: ‘कोई परिवर्तन नहीं’ एक वास्तविक परिणाम है, असफल परीक्षण नहीं। विज्ञान में परिवर्तन का न होना भी उत्तर होता है।
प्र3.
लाइकेन दो जीवों की सहजीविता से बनते हैं जिनमें एक कवक होता है और दूसरा शैवाल होता है। ये उन क्षेत्रों की चट्टानों और पेड़ों पर उगते हैं जहाँ प्रचुर मात्रा में वर्षा होती है और वायु स्वच्छ होती है। क्या आपको अपने आस-पास के पेड़ों पर लाइकेन मिलते हैं?
उत्तर

वर्षा ऋतु के बाद पुराने पेड़ों के तनों की छायादार ओर, चारदीवारी और पत्थर की सतहों पर देखिए। लाइकेन चपटे, पपड़ीदार या पत्ती जैसे धब्बों के रूप में दिखते हैं — मटमैले हरे, धूसर-हरे, पीले या नारंगी — मानो छाल पर रंग पोत दिया गया हो।

नमूना उत्तर: “हमारे मोहल्ले में एक पुराने आम के पेड़ के तने और विद्यालय की चारदीवारी पर धूसर-हरे पपड़ीदार धब्बे मिले, परंतु मुख्य सड़क के किनारे के पेड़ों पर एक भी नहीं मिला।”

उत्तर स्थान के अनुसार क्यों बदलता है: लाइकेन को स्वच्छ वायु चाहिए। ये वर्षा-जल में घुली हर वस्तु सोख लेते हैं, अत: धुआँ और वाहनों का उत्सर्जन इन्हें मार देता है। अधिक लाइकेन का अर्थ है स्वच्छ वायु; स्वस्थ दिखने वाले पेड़ों पर भी लाइकेन का न होना प्राय: प्रदूषित वायु का संकेत है। इसीलिए वैज्ञानिक लाइकेन को वायु गुणवत्ता का जैव-सूचक कहते हैं।
यह कीजिए: व्यस्त सड़क के किनारे के दस पेड़ों और उद्यान के भीतर के दस पेड़ों पर लाइकेन के धब्बे गिनिए। दोनों संख्याओं की तुलना कीजिए — आपने बिना किसी उपकरण के वायु प्रदूषण माप लिया।
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