वर्षा ऋतु के बाद पुराने पेड़ों के तनों की छायादार ओर, चारदीवारी और पत्थर की सतहों पर देखिए। लाइकेन चपटे, पपड़ीदार या पत्ती जैसे धब्बों के रूप में दिखते हैं — मटमैले हरे, धूसर-हरे, पीले या नारंगी — मानो छाल पर रंग पोत दिया गया हो।
नमूना उत्तर: “हमारे मोहल्ले में एक पुराने आम के पेड़ के तने और विद्यालय की चारदीवारी पर धूसर-हरे पपड़ीदार धब्बे मिले, परंतु मुख्य सड़क के किनारे के पेड़ों पर एक भी नहीं मिला।”
उत्तर स्थान के अनुसार क्यों बदलता है: लाइकेन को स्वच्छ वायु चाहिए। ये वर्षा-जल में घुली हर वस्तु सोख लेते हैं, अत: धुआँ और वाहनों का उत्सर्जन इन्हें मार देता है। अधिक लाइकेन का अर्थ है स्वच्छ वायु; स्वस्थ दिखने वाले पेड़ों पर भी लाइकेन का न होना प्राय: प्रदूषित वायु का संकेत है। इसीलिए वैज्ञानिक लाइकेन को वायु गुणवत्ता का जैव-सूचक कहते हैं।
यह कीजिए: व्यस्त सड़क के किनारे के दस पेड़ों और उद्यान के भीतर के दस पेड़ों पर लाइकेन के धब्बे गिनिए। दोनों संख्याओं की तुलना कीजिए — आपने बिना किसी उपकरण के वायु प्रदूषण माप लिया।