कुतूहल अध्याय 3 आइए, और अधिक सीखें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
असत्य कथन का चयन कीजिए। (i) विद्युत परिपथ में स्विच धारा का स्रोत होता है। (ii) परिपथ को पूरा करने अथवा भंग करने में स्विच सहायता करता है। (iii) विद्युत के आवश्यकतानुसार उपयोग में स्विच सहायता करता है। (iv) जब स्विच ‘ऑफ’ स्थिति में होता है तो इसके टर्मिनलों के मध्य वायु अंतराल रहता है।
उत्तर

असत्य कथन (i) है — 'विद्युत परिपथ में स्विच धारा का स्रोत होता है।'

स्विच धारा का स्रोत नहीं होता। इन परिपथों में स्रोत विद्युत सेल अथवा बैटरी है; स्विच केवल यह नियंत्रित करता है कि धारा बहने दी जाए या नहीं।

कथनसही या असत्य?कारण
(i) स्विच धारा का स्रोत होता हैअसत्यस्रोत सेल या बैटरी है; स्विच कोई ऊर्जा नहीं देता
(ii) स्विच परिपथ को पूरा या भंग करता हैसत्यस्विच का काम ही यही है
(iii) स्विच आवश्यकतानुसार विद्युत उपयोग में सहायक हैसत्यपंखा या लैंप हम आवश्यकता पड़ने पर ही चला सकते हैं
(iv) 'ऑफ' स्थिति में टर्मिनलों के मध्य वायु अंतराल रहता हैसत्यवायु विद्युतरोधी है, अतः यह अंतराल धारा रोक देता है
प्र2.
चित्र 3.16 में सिरों ‘क’ एवं ‘ख’ के मध्य कौन-सा पदार्थ जोड़ने पर लैंप दीप्तिमान नहीं होगा?
उत्तर

यदि 'क' एवं 'ख' के मध्य कोई विद्युतरोधी पदार्थ जोड़ा जाए तो लैंप दीप्तिमान नहीं होगा।

चित्र 3.16 वास्तव में एक विद्युत चालन परीक्षण-यंत्र है — एक सेल और एक लैंप तारों से जुड़े हैं और तारों के दो सिरे 'क' तथा 'ख' मुक्त छोड़ दिए गए हैं। इनके बीच जो भी वस्तु रखी जाएगी वही परिपथ का भाग बन जाएगी।

'क' एवं 'ख' के मध्य जोड़ा गया पदार्थप्रकारलैंप
रबर, प्लास्टिक, लकड़ी, काँच, कागज, मोम, सूखा कपड़ा, थर्मोकोलविद्युतरोधीदीप्तिमान नहीं होगा
ताँबे का तार, लोहे की कील, चाबी, सिक्का, एलुमिनियम पर्णिका, पेंसिल की लीडविद्युत-चालकदीप्तिमान होगा
ऐसा क्यों होता है: विद्युतरोधी में से धारा नहीं जा सकती, अतः सेल और लैंप के पूरी तरह ठीक होने पर भी 'क' और 'ख' के बीच पाश भंग ही रहता है। केवल चालक ही उस अंतराल को पाटकर परिपथ पूरा करता है।
प्र3.
चित्र 3.17 में यदि एक लैंप का तंतु विखंडित हो जाए तो क्या दूसरा लैंप दीप्तिमान होगा? अपने उत्तर का औचित्य बताइए।
उत्तर

नहीं, दूसरा लैंप भी दीप्तिमान नहीं होगा।

चित्र 3.17 में दोनों लैंप तथा बैटरी एक के बाद एक एक ही पाश में जुड़े हैं — धारा के पास चलने के लिए केवल एक ही पथ है और वह दोनों तंतुओं से होकर जाता है।

लैंप 1 लैंप 2 — तंतु विखंडित बैटरी कहीं धारा नहीं
दोनों लैंप एक ही पाश में हैं। एक तंतु के टूटते ही पूरा पाश खुल जाता है, अतः धारा नहीं बहती और कोई भी लैंप दीप्तिमान नहीं होता।

औचित्य: टूटा हुआ तंतु उस बल्ब के भीतर अंतराल छोड़ देता है। इससे परिपथ खुल जाता है और पाश के किसी भी भाग में धारा प्रवाहित नहीं होती — दूसरे लैंप में भी नहीं। दूसरा लैंप पूरी तरह ठीक है, किंतु उसके लिए धारा ही उपलब्ध नहीं है।

क्या आप जानते हैं? पुरानी सजावटी झालरें इसी प्रकार जुड़ी होती थीं, इसीलिए एक बल्ब फ्यूज होने पर पूरी झालर बुझ जाती थी।
प्र4.
विद्युत परिपथ बनाते समय कोई विद्यार्थी संयोजी तारों से विद्युतरोधी आवरण हटाना भूल गया। यदि लैंप और सेल ठीक कार्य कर रहे हों तब भी क्या लैंप दीप्तिमान होगा?
उत्तर

नहीं, लैंप दीप्तिमान नहीं होगा।

संयोजी तार पर चढ़ा प्लास्टिक का आवरण विद्युतरोधी है। यदि सिरों से यह आवरण न हटाया जाए तो भीतर का ताँबा सेल अथवा लैंप के टर्मिनलों को वास्तव में स्पर्श ही नहीं करेगा।

सेल का टर्मिनल → प्लास्टिक → ताँबा → प्लास्टिक → लैंप का टर्मिनल
धारा प्लास्टिक को पार नहीं कर सकती → परिपथ खुलालैंप अदीप्त
ऐसा क्यों होता है: परिपथ के लिए सेल के एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल तक चालकों का अटूट पथ चाहिए। जोड़ों पर लगा विद्युतरोधी प्लास्टिक उस पथ को उतना ही तोड़ देता है जितना कोई तार गायब होने पर टूटता। इसीलिए क्रियाकलापों में कहा जाता है कि प्रत्येक तार के दोनों सिरों से लगभग 1 cm आवरण हटा दीजिए।
संकेत: आवरण हटाने के बाद ताँबा चमकीला दिखना चाहिए। यदि वह धुँधला या काला दिखे तो रेगमाल से हल्के-से रगड़ दीजिए — मैल या ऑक्साइड की परत भी धारा रोक सकती है।
प्र5.
विद्युत परिपथ के घटकों के प्रतीकों का उपयोग करके एक साधारण टॉर्च का परिपथ आरेख बनाइए।
उत्तर

एक साधारण टॉर्च में एक ही पाश में केवल तीन घटक होते हैं — दो सेलों की बैटरी, एक विद्युत लैंप तथा एक स्विच, जो तारों से जुड़े रहते हैं।

विद्युत लैंप + बैटरी (दो सेल) स्विच (ऑन) धारा
साधारण टॉर्च का परिपथ आरेख — दो सेलों की बैटरी, 'ऑन' स्थिति में स्विच तथा विद्युत लैंप, सभी एक ही पाश में। धारा धन टर्मिनल से निकलकर लैंप से होती हुई ऋण टर्मिनल पर लौटती है।

अपने आरेख में ये बातें जाँचिए:

  • प्रत्येक सेल का लंबा रेखाखंड धन टर्मिनल तथा छोटा रेखाखंड ऋण टर्मिनल है, और सेल लंबा-छोटा, लंबा-छोटा क्रम में बने हों।
  • लैंप का प्रतीक क्रॉस युक्त वृत्त है।
  • स्विच दो छोटे वृत्त हैं; 'ऑन' के लिए उन्हें सीधी रेखा से जोड़िए, 'ऑफ' के लिए रेखा ऊपर उठा दीजिए।
  • सभी तार सीधी सादी रेखाएँ हैं और लैंप दीप्तिमान होने के लिए पाश बंद होना चाहिए।
संकेत: यदि आपकी टॉर्च में बल्ब के स्थान पर एल.ई.डी. है तो लैंप के प्रतीक के स्थान पर एल.ई.डी. का प्रतीक बनाइए और ध्यान रखिए कि त्रिभुज बैटरी के धन टर्मिनल से दूर की ओर इंगित हो।
प्र6.
चित्र 3.18 में — (i) यदि S2 ‘ऑन’ स्थिति में और S1 ‘ऑफ’ स्थिति में हो तो कौन-कौन से लैंप दीप्त होंगे? (ii) यदि S2 ‘ऑफ’ स्थिति में और S1 ‘ऑन’ स्थिति में हो तो कौन-कौन से लैंप दीप्त होंगे? (iii) यदि S1 एवं S2 दोनों ‘ऑन’ स्थिति में हो तो कौन-कौन से लैंप दीप्त होंगे? (iv) यदि S1 एवं S2 दोनों ‘ऑफ’ स्थिति में हो तो कौन-कौन से लैंप दीप्त होंगे?
उत्तर

चित्र 3.18 को ध्यान से देखिए: बैटरी, S1, L1, S2 तथा L2 — सभी एक ही पाश में हैं। कहीं कोई शाखा नहीं है, अतः धारा को या तो सभी घटकों से होकर जाना पड़ेगा या किसी से भी नहीं।

प्रकरणS1S2क्या पाश पूरा है?दीप्त होने वाले लैंप
(i)ऑफऑननहीं — S1 पर भंगकोई नहीं
(ii)ऑनऑफनहीं — S2 पर भंगकोई नहीं
(iii)ऑनऑनहाँ — पाश बंद हैL1 एवं L2 दोनों
(iv)ऑफऑफनहीं — दो स्थानों पर भंगकोई नहीं

एक-एक पंक्ति में उत्तर:

  1. कोई लैंप दीप्त नहीं होगा — S1 खुला है, अतः परिपथ भंग है।
  2. कोई लैंप दीप्त नहीं होगा — S2 खुला है, अतः परिपथ भंग है।
  3. L1 एवं L2 दोनों दीप्त होंगे — परिपथ संपूरित है और वही धारा दोनों लैंपों से होकर जाती है।
  4. कोई लैंप दीप्त नहीं होगा — परिपथ दोनों स्विचों पर भंग है।
ऐसा क्यों होता है: एक ही पाश में सभी घटक एक ही पथ साझा करते हैं। उस पथ में कहीं भी स्विच खोल देने से पूरे पथ में धारा रुक जाती है। इसीलिए स्विच को परिपथ में कहीं भी लगाकर पूरे परिपथ को नियंत्रित किया जा सकता है।
प्र7.
एक विद्यार्थी ने चित्र 3.19 में दर्शाए अनुसार विद्युत परिपथ संयोजित किया। परिपथ को बंद करने के बाद भी लैंप दीप्तिमान नहीं हुआ। इसके क्या संभावित कारण हो सकते हैं? इस दोषपूर्ण प्रचालन के लिए अधिक-से-अधिक कारणों की सूची बनाइए। लैंप के दीप्तिमान न होने के कारण का पता लगाने के लिए आप क्या करेंगे?
उत्तर

चित्र 3.19 के परिपथ में केवल चार प्रकार के भाग हैं — सेल, लैंप, तार और स्विच। अतः दोष इन्हीं में से किसी में होगा।

संभावित कारण:

भागक्या गड़बड़ हो सकती है
सेलसेल समाप्त (डेड) हो चुका हो; धारक में उलटा लगा हो; स्प्रिंग एवं संपर्क से ठीक से न दबा हो
लैंपलैंप फ्यूज हो गया हो — तंतु टूटा हो; अथवा धारक में ढीला लगा हो जिससे कोई टर्मिनल स्पर्श न कर रहा हो
तारकिसी सिरे से प्लास्टिक का आवरण न हटाया गया हो; तार आवरण के भीतर से टूटा हो; तार पेच या ड्राइंग-पिन से ढीला हो गया हो; खुला ताँबा मैला या जंग लगा हो
स्विचसेफ्टी-पिन वास्तव में दूसरी ड्राइंग-पिन को स्पर्श न कर रही हो, अतः अंतराल अब भी खुला हो; अथवा ड्राइंग-पिनें गत्ते में ढीली हो गई हों
धारकलैंप-धारक अथवा सेल-धारक के पेच ढीले हों, जिससे जोड़ों में ठीक संपर्क न बन रहा हो

कारण कैसे पता लगाएँ — एक-एक भाग की जाँच कीजिए:

  1. पहले स्विच जाँचिए। उसे हटाकर देखिए — ड्राइंग-पिनों तक जाने वाले दोनों तारों को सीधे परस्पर स्पर्श कराइए। यदि अब लैंप दीप्त हो जाए तो दोष स्विच में था।
  2. सेल जाँचिए। उसके स्थान पर ऐसा सेल लगाइए जिसका कार्य करना निश्चित हो। लैंप दीप्त हो जाए तो पुराना सेल समाप्त था।
  3. लैंप जाँचिए। संदिग्ध लैंप को किसी चालू टॉर्च में लगाकर देखिए, अथवा उसके स्थान पर ठीक लैंप लगाइए। बल्ब को प्रकाश के सामने रखकर टूटे तंतु को भी देखिए।
  4. तार और जोड़ जाँचिए। प्रत्येक सिरे पर बिना हटा आवरण देखिए; सभी पेच एवं ड्राइंग-पिनें कसिए; प्रत्येक तार को हल्के-से खींचकर देखिए कि वह भीतर से टूटा तो नहीं।
  5. एक परीक्षण-यंत्र बनाइए। निश्चित रूप से काम करने वाले सेल और लैंप से परीक्षण-यंत्र बनाकर उसके दोनों मुक्त सिरों को बारी-बारी से प्रत्येक तार के दोनों सिरों से स्पर्श कराइए — लैंप केवल साबुत तार से होकर ही दीप्त होगा।
संकेत: एक बार में केवल एक ही वस्तु बदलिए और प्रत्येक बदलाव के बाद जाँचिए। यदि आप एक साथ दो चीजें बदल देंगे और लैंप दीप्त हो जाएगा तो यह कभी पता नहीं चलेगा कि दोष किसमें था।
प्र8.
चित्र 3.20 में दर्शाई गई किस व्यवस्था में स्विच ‘ऑन’ करने पर भी बल्ब/एल.ई.डी. दीप्तिमान नहीं होगा?
उत्तर

केवल व्यवस्था (ग) में एल.ई.डी. दीप्तिमान नहीं होगी। (क), (ख) तथा (घ) में स्विच ऑन करने पर बल्ब/एल.ई.डी. दीप्त हो जाती है।

व्यवस्थापरिपथ में क्या हैदीप्त होगा?कारण
(क)एक सेल एवं एक विद्युत लैंपदीप्त होगापरिपथ संपूरित है; तापदीप्त लैंप किसी भी ध्रुवता में जलता है
(ख)एक सेल एवं एक विद्युत लैंप, सेल उलटा लगा हैदीप्त होगा(क) जैसा ही — सेल उलटने से केवल धारा की दिशा बदलती है, तंतु फिर भी गर्म होता है
(ग)दो सेलों की बैटरी एवं एक एल.ई.डी.दीप्त नहीं होगीएल.ई.डी. उलटी जुड़ी है — उसका त्रिभुज बैटरी के धन टर्मिनल की ओर इंगित है, अतः धारा रुक जाती है
(घ)दो सेलों की बैटरी एवं एक एल.ई.डी., बैटरी उलटी हैदीप्त होगीयहाँ त्रिभुज धन टर्मिनल से दूर की ओर इंगित है, अतः धारा एल.ई.डी. से होकर जा सकती है
ऐसा क्यों होता है: तापदीप्त लैंप दिशा की परवाह नहीं करता — धारा किसी भी दिशा में उसके तंतु को गर्म कर देती है। किंतु एल.ई.डी. केवल एक ही दिशा में धारा जाने देती है। एल.ई.डी. के प्रतीक में त्रिभुज वही दिशा बताता है; अतः बैटरी के लंबे रेखाखंड (+) से धारा का पथ खींचिए — यदि वह त्रिभुज की नोक की ओर से मिले तो धारा जाएगी, और यदि पहले रेखाखंड (बार) से टकराए तो रुक जाएगी।
स्वयं जाँचिए: (ग) में एल.ई.डी. के दोनों तार आपस में बदल देने से — अथवा बैटरी उलट देने से — वह दीप्तिमान हो जाएगी, ठीक वैसे ही जैसे क्रियाकलाप 3.7 में हुआ था।
प्र9.
यदि किसी बैटरी पर ‘+’ एवं ‘–’ चिह्न पढ़े नहीं जा रहे हैं तो इस बैटरी के टर्मिनलों को पहचानने की कोई एक विधि सुझाइए।
उत्तर

इसके लिए एल.ई.डी. का उपयोग कीजिए, क्योंकि एल.ई.डी. केवल एक ही दिशा में धारा जाने देती है और इस प्रकार दिशा-सूचक का काम करती है।

विधि:

  1. एक एल.ई.डी. लीजिए और उसके दोनों तार देखिए — लंबा तार उसका धन टर्मिनल तथा छोटा तार ऋण टर्मिनल है।
  2. दो संयोजी तारों की सहायता से एल.ई.डी. के लंबे तार को बैटरी के एक टर्मिनल से तथा छोटे तार को दूसरे टर्मिनल से जोड़िए।
  3. यदि एल.ई.डी. दीप्तिमान हो जाए, तो जिस टर्मिनल से लंबा तार जुड़ा है वही बैटरी का धन (+) टर्मिनल है और दूसरा ऋण टर्मिनल है।
  4. यदि एल.ई.डी. दीप्तिमान न हो, तो दोनों संयोजन परस्पर बदल दीजिए। जब वह दीप्त हो जाए तब उसी नियम से टर्मिनल पहचान लीजिए।
अवलोकननिष्कर्ष
एल.ई.डी. दीप्तिमान होती हैजिस टर्मिनल से एल.ई.डी. का लंबा तार जुड़ा है वह धन है
पहले दीप्त नहीं हुई, तार बदलने पर दीप्त हुईअब जिस टर्मिनल से लंबा तार जुड़ा है वह धन है

एक और सरल जाँच — स्वयं सेलों को देखिए। प्रत्येक सेल में उभरी हुई धातु की टोपी धनात्मक टर्मिनल तथा चपटी धातु की चकती ऋणात्मक टर्मिनल होती है। सेल-धारक में स्प्रिंग सदैव चपटी चकती से दबती है, अतः धारक का स्प्रिंग वाला सिरा बैटरी का ऋण टर्मिनल होता है।

सावधानी: बैटरी की जाँच जीभ से स्पर्श कराकर अथवा दोनों टर्मिनलों को सीधे तार से जोड़कर कभी न कीजिए। एल.ई.डी. या लैंप का ही उपयोग कीजिए — यह सुरक्षित भी है और विश्वसनीय भी।
प्र10.
आपको छः सेल दिए गए हैं जिन पर क, ख, ग, घ, ङ और च अंकित हैं। इनमें से कुछ कार्य कर रहे हैं और कुछ कार्य नहीं कर रहे हैं। एक क्रियाकलाप सुझाइए जिससे आप यह पहचान सकें कि कौन-कौन से सेल कार्य कर रहे हैं। (i) आपको जो वस्तुएँ चाहिए उनकी एक सूची बनाइए। (ii) वह कार्यविधि लिखिए जिसका अनुसरण आप करेंगे। (iii) चरण (i) में सूचीबद्ध वस्तुओं का उपयोग करके पहचानिए कि कौन-कौन से सेल काम कर रहे हैं?
उत्तर

मूल विचार यह है कि एक ही परीक्षण-परिपथ बनाइए और उसमें बारी-बारी से प्रत्येक सेल लगाइए, शेष कुछ भी न बदलिए। तब परिणाम बदलने का एकमात्र कारण सेल ही होगा।

(i) आवश्यक वस्तुएँ

  • क, ख, ग, घ, ङ एवं च अंकित छहों सेल
  • एक सेल-धारक (एक सेल के लिए)
  • एक टॉर्च का लैंप (तापदीप्त बल्ब) एवं एक लैंप-धारक
  • विद्युत-तार के चार छोटे टुकड़े, जिनके दोनों सिरों से लगभग 1 cm आवरण हटा हो
  • एक ऐसा सेल जिसका कार्य करना निश्चित हो, ताकि परीक्षण-परिपथ की जाँच की जा सके
  • अवलोकन लिखने के लिए एक कॉपी

(ii) कार्यविधि

  1. लैंप को लैंप-धारक में बैठाइए और धारक के पेचों से दो तार जोड़िए।
  2. सेल-धारक के दोनों सिरों से दो तार जोड़िए।
  3. लैंप-धारक का एक तार सेल-धारक के एक तार से जोड़ दीजिए। शेष दो सिरे मुक्त रखिए — प्रत्येक परीक्षण में इन्हीं दोनों को जोड़ना है।
  4. पहले परीक्षण-यंत्र को जाँचिए। निश्चित रूप से काम करने वाला सेल धारक में इस प्रकार लगाइए कि उसका ऋण टर्मिनल स्प्रिंग की ओर रहे और दोनों मुक्त सिरे जोड़ दीजिए। लैंप अवश्य दीप्त होना चाहिए। यदि न हो तो आगे बढ़ने से पहले जोड़ कसिए और बल्ब जाँचिए।
  5. अब वह सेल निकालकर सेल को उसी प्रकार धारक में लगाइए, मुक्त सिरे जोड़िए और लैंप देखिए।
  6. 'दीप्त होता है' अथवा 'दीप्त नहीं होता' लिख लीजिए। क को निकालकर ठीक इन्हीं चरणों को ख, ग, घ, ङ एवं च के लिए एक-एक करके दोहराइए।
  7. जिस सेल के लिए लैंप तेज दीप्त हो वह कार्य कर रहा है; जिसके लिए लैंप दीप्त न हो (अथवा बहुत मंद दीप्त हो) वह कार्य नहीं कर रहा

(iii) क्रियाकलाप करना — अपने परिणाम इस प्रकार की तालिका में लिखिए। नीचे दी गई प्रविष्टियाँ केवल नमूना हैं; आप वही लिखिए जो आपके छह सेल वास्तव में दर्शाते हैं।

सेलक्या लैंप दीप्त होता है?निष्कर्ष
हाँ, तेजकार्य कर रहा है
नहींकार्य नहीं कर रहा
हाँ, तेजकार्य कर रहा है
नहींकार्य नहीं कर रहा
हाँ, तेजकार्य कर रहा है
बहुत मंद दीप्तिलगभग समाप्त — कार्य न करने वाला ही मानिए
संकेत: छहों परीक्षणों में वही लैंप, वही तार और वही जोड़ रखिए। यदि बीच में बल्ब बदल दिया तो अदीप्त लैंप का दोष गलत वस्तु पर मढ़ा जा सकता है। किसी सेल को अधिक देर तक जुड़ा भी न रहने दीजिए, इससे सेल जल्दी समाप्त हो जाता है।
प्र11.
किसी ऐसी एल.ई.डी., जिसे दीप्तिमान करने के लिए श्रेणी-क्रम में लगे दो सेलों की आवश्यकता हो, का उपयोग करके, तान्या ने चित्र 3.21 में दर्शाए अनुसार परिपथ बनाया। क्या लैंप दीप्तिमान होगा? यदि नहीं तो संयोजी तारों को सही विन्यास के लिए आरेखित कीजिए।
उत्तर

नहीं, एल.ई.डी. दीप्तिमान नहीं होगी। तान्या से एक साथ दो भूलें हुई हैं।

  • सेल श्रेणी-क्रम में नहीं हैं। चित्र 3.21 में काला तार एक सेल के ऋण टर्मिनल को दूसरे सेल के ऋण टर्मिनल से जोड़ रहा है। – से – जुड़े दो सेल धारा को विपरीत दिशाओं में धकेलते हैं, अतः उनके प्रभाव कट जाते हैं और बैटरी कोई उपयोगी प्रभाव नहीं देती।
  • एल.ई.डी. उलटी जुड़ी है। सेल के धन टर्मिनल से आने वाला तार एल.ई.डी. के ऋण (छोटे) तार तक पहुँच रहा है, जबकि एल.ई.डी. में धारा केवल एक ही दिशा में जा सकती है।

सही संयोजन:

+ + जोड़:+ से – + एल.ई.डी. सेल 1 सेल 2 हरा तार → एल.ई.डी. का छोटा (–) तार पीला तार → एल.ई.डी. का लंबा (+) तार
सही विन्यास: एक सेल को घुमाकर जोड़ने वाला तार एक सेल के धन टर्मिनल को दूसरे सेल के ऋण टर्मिनल से जोड़ता है — इससे दो सेलों की श्रेणी-क्रम बैटरी बनती है। फिर मुक्त धन टर्मिनल एल.ई.डी. के लंबे तार से और मुक्त ऋण टर्मिनल छोटे तार से जोड़ा जाता है।

तार पुनः बनाते समय दो नियम:

  1. एक सेल के धन टर्मिनल को दूसरे सेल के ऋण टर्मिनल से जोड़िए। शेष बचे दोनों मुक्त टर्मिनल ही बैटरी के + एवं – टर्मिनल होंगे।
  2. बैटरी के धन टर्मिनल को एल.ई.डी. के लंबे तार से और बैटरी के ऋण टर्मिनल को एल.ई.डी. के छोटे तार से जोड़िए।
ऐसा क्यों होता है: दो सेल तभी एक-दूसरे की सहायता करते हैं जब वे + से – जुड़े हों; – से – जुड़ने पर वे परस्पर विरोध करते हैं। और सही बैटरी भी उलटी लगी एल.ई.डी. को दीप्त नहीं कर सकती, क्योंकि एल.ई.डी. में धारा केवल एक ही दिशा में जाती है। दोनों शर्तें एक साथ पूरी होनी चाहिए।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ