कुतूहल अध्याय 4 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
यशवंत — आप सामान्यत: कौन-सी वस्तुएँ बनाते हैं?
उत्तर

सुदर्शन चाचा लोहे से दैनिक उपयोग की वस्तुएँ और कृषि उपकरण बनाते हैं।

वस्तु का प्रकारउनके द्वारा बताए गए उदाहरण
दैनिक उपयोग की घरेलू वस्तुएँतवा, बाल्टी, चिमटा
कृषि उपकरणफावड़ा, कुल्हाड़ी, खुर्पी, जेली
ऐसा क्यों होता है: इन सभी वस्तुओं का सुदृढ़ होना और धार या आकार बनाए रखना आवश्यक है। लोहा कठोर और मजबूत होता है, इसलिए खुर्पी प्रतिदिन मिट्टी काटने पर भी मुड़ती नहीं और तवा बार-बार आग पर चढ़ाने पर भी नहीं चटकता।
प्र2.
आनंदी — ये वस्तुएँ किस सामग्री से बनती हैं?
उत्तर

लोहार की कार्यशाला में तीन सामग्रियों का उपयोग होता है और प्रत्येक का कारण अलग है।

  • लोहा — वस्तु स्वयं इसी धातु से बनती है। यह कठोर, मजबूत और पीटकर आकार दिए जाने योग्य है।
  • लकड़ी — आवश्यकतानुसार हत्थे बनाने के लिए, क्योंकि लकड़ी ऊष्मा की कुचालक है और हाथ नहीं जलाती।
  • कोयलाभट्टी में जलाकर लोहे को इतना गरम किया जाता है कि वह सुर्ख लाल और नरम हो जाए।
क्या आप जानते हैं? कोयला एक अधातु है (मुख्यत: कार्बन)। अर्थात् जो कार्यशाला पूरी तरह एक धातु पर टिकी है, वह भी एक अधातु के बिना नहीं चल सकती।
प्र3.
आनंदी आश्चर्यचकित होकर पूछती है — आप इसे क्यों पीट रहे हैं?
उत्तर

सुदर्शन चाचा उत्तर देते हैं — “मैं इसे कुल्हाड़ी का आकार देने के लिए पीट रहा हूँ।”

वे पहले लोहे के टुकड़े को कोयले की भट्टी में सुर्ख लाल होने तक गरम करते हैं। गरम लोहा ठंडे लोहे की तुलना में कहीं अधिक नरम होता है, इसलिए हथौड़े का प्रत्येक प्रहार धातु को थोड़ा-थोड़ा फैलाता और मोड़ता है। प्रहार दर प्रहार बेडौल टुकड़ा कुल्हाड़ी के चपटे फलक में बदल जाता है।

ऐसा क्यों होता है: लोहा आघातवर्धनीय है — इसे बिना टूटे नया आकार दिया जा सकता है। गरम करने पर यह गुण और बढ़ जाता है। कोयले के टुकड़े के साथ ऐसा करने पर वह केवल चूर-चूर हो जाएगा।
प्र4.
आनंदी — वाह! लोहे के एक टुकड़े को पीटकर चपटा आकार दिया जा सकता है! क्या हम अन्य धातुओं के साथ भी ऐसा कर सकते हैं?
उत्तर

हाँ — अधिकांश धातुओं को पीटकर चपटा किया जा सकता है। क्रियाकलाप 4.1 इसी प्रश्न की जाँच करता है।

ताँबा, ऐलुमिनियम, लोहा → पीटने पर चपटे → आघातवर्धनीय
कोयला, सल्फर → टुकड़ों में टूट जाते हैं → भंगुर
लकड़ी → न चपटी होती है, न टूटती है → न आघातवर्धनीय, न भंगुर
सोना और चाँदी सर्वाधिक आघातवर्धनीय धातुएँ हैं।
स्वयं देखिए: बर्फी पर लगे चाँदी के वर्क को देखिए। वह एक धातु की इतनी पतली चादर है कि छूते ही फट जाती है — यही आघातवर्धनीयता का प्रमाण है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ