कुतूहल अध्याय 5 क्रियाकलाप 5.1

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आपने अपने आस-पास अनेक परिवर्तनों का अवलोकन किया होगा। इनमें से कुछ परिवर्तन तालिका 5.1 में सूचीबद्ध किए गए हैं। आप यह देख सकते हैं कि प्रत्येक स्थिति में कुछ परिवर्तन हो रहे हैं। प्रत्येक स्थिति के इन परिवर्तनों पर कुछ क्षणों के लिए विचार कीजिए और तालिका 5.1 में अपने अवलोकन अभिलेखित कीजिए।
उत्तर

पूरी की गई तालिका 5.1 नीचे दी गई है। ध्यान दीजिए कि प्रत्येक स्थिति में ठीक-ठीक क्या बदलता है — अवलोकन स्तंभ में यही लिखना है।

क्र.सं.परिवर्तनअवलोकन
1.बर्फ का पिघलनाकठोर ठोस बर्फ धीरे-धीरे द्रव जल में बदल जाती है। केवल अवस्था बदलती है; पदार्थ अब भी जल ही है।
2.सब्जियों का कटनाएक बड़ा टुकड़ा अनेक छोटे टुकड़ों में बँट जाता है। केवल आमाप एवं आकृति बदलती है; सब्जी वही रहती है।
3.जल का उबलनाबुलबुले उठते हैं, वाष्प निकलती है, जल का स्तर घटता है। द्रव जल जलवाष्प में बदलता है — अवस्था का परिवर्तन।
4.मक्का से पॉपकोर्न बननादाना चटककर फूट जाता है, श्वेत, मुलायम एवं फूला हुआ हो जाता है तथा गंध भी बदल जाती है। नए पदार्थ बनते हैं।
5.कागज का टुकड़ों में कटनाआमाप एवं आकृति बदलती है। प्रत्येक टुकड़ा अब भी कागज ही है।
6.चुकंदर के रस का जल में मिलनारंगहीन जल गुलाबी अथवा गहरा लाल हो जाता है। रंग पूरे जल में फैल जाता है; कोई नया पदार्थ नहीं बनता — यह एक मिश्रण है।
7.लकड़ी का जलनालौ, ऊष्मा, प्रकाश, धुआँ तथा अंत में राख शेष रहती है। नए पदार्थ बनते हैं और लकड़ी सदा के लिए समाप्त हो जाती है।
8.गीले वस्त्रों का सूखनावस्त्र में उपस्थित जल वाष्पित होकर वायु में चला जाता है। वस्त्र हल्का एवं सूखा हो जाता है; वस्त्र स्वयं नहीं बदलता।
9.गूँधे हुए आटे से छोटी-छोटी लोइयाँ बननाकेवल आटे की आकृति बदलती है; वह आटा ही रहता है।
10.आटे की लोइयों से रोटियाँ बिलनालोई चपटी एवं गोल हो जाती है। पुनः केवल आकृति बदलती है — कच्ची रोटी को फिर से लोई बनाया जा सकता है।
11.कोई अन्य — वर्षा में पड़ी लोहे की कीलचमकती कील पर खुरदरी, भूरी, परतदार तह (जंग) बन जाती है। एक नया पदार्थ बना है।
स्वयं जाँचिए: अपने अवलोकन स्तंभ को पढ़िए। जहाँ भी आपने नई गंध, नया रंग, राख, पुनः नहीं लौटाया जा सकता जैसे शब्द लिखे हैं, वहाँ लगभग निश्चित रूप से रासायनिक परिवर्तन हुआ है।
प्र2.
क्या आप अपने आस-पास होने वाले अन्य परिवर्तनों के विषय में विचार कर सकते हैं? उन परिवर्तनों की एक सूची भी बनाइए।
उत्तर

हाँ। तालिका 5.1 में जोड़ने योग्य कुछ परिवर्तन इस प्रकार हैं —

  • रसोईघर में: दूध का दही जमना, गेहूँ पीसकर आटा बनना, आटा गूँधना, तवे पर रोटी सिकना, मूँगफली भुनना, दूध उबलना, चाय में चीनी घुलना, कटे सेब का भूरा होना।
  • घर एवं विद्यालय में: पेंसिल छीलना, पुरानी कॉपी फाड़ना, कागज की नाव बनाना, चॉक का टूटना, गीले श्यामपट्ट का सूखना, लोहे के गेट पर जंग लगना, मोमबत्ती का जलना, गैस चूल्हे का जलना।
  • प्रकृति में: बीज का अंकुरित होना, पत्ती का पीला होकर गिरना, फलों का पकना, शीत ऋतु में घास पर ओस जमना, बादल बनना एवं वर्षा होना, नदी के कंकड़ों का चिकना होना, सूखी पत्तियों का सड़कर खाद बनना।
  • हमारे शरीर में: हमारी लंबाई बढ़ना, बाल एवं नाखून बढ़ना, घाव भरना, खाए हुए भोजन का पाचन।
ऐसा क्यों होता है: इन सभी को एक ही कसौटी से छाँटा जा सकता है — क्या नया पदार्थ बना? पेंसिल छीलना, कागज मोड़ना और ओस जमना भौतिक हैं। दही जमना, जंग लगना, जलना, पकना, सड़ना और पाचन रासायनिक हैं।
प्र3.
क्या हम इन परिवर्तनों को विभिन्न श्रेणियों में व्यवस्थित कर सकते हैं?
उत्तर

हाँ। परिवर्तनों को एक से अधिक आधारों पर श्रेणीबद्ध किया जा सकता है, और एक ही परिवर्तन कई श्रेणियों में आ सकता है।

श्रेणीकरण का आधारश्रेणियाँउदाहरण
क्या नया पदार्थ बनता है?भौतिक परिवर्तन / रासायनिक परिवर्तनबर्फ का पिघलना (भौतिक) · लकड़ी का जलना (रासायनिक)
क्या मूल स्वरूप पुनः प्राप्त हो सकता है?उत्क्रमणीय / अनुत्क्रमणीयजल का उबलना (उत्क्रमणीय) · पॉपकॉर्न बनना (अनुत्क्रमणीय)
क्या हम यह परिवर्तन चाहते हैं?वांछनीय / अवांछनीयदूध का दही बनना (वांछनीय) · लोहे में जंग लगना (अवांछनीय)
परिवर्तन कितना तीव्र है?तीव्र / धीमामैग्नीशियम का जलना (तीव्र) · चट्टानों का अपक्षय (अत्यंत धीमा)
परिवर्तन किसने किया?प्राकृतिक / मानव-निर्मितफलों का पकना (प्राकृतिक) · सब्जियाँ काटना (मानव-निर्मित)

इस अध्याय में जिस आधार का उपयोग किया गया है वह पहला है — भौतिक परिवर्तन एवं रासायनिक परिवर्तन।

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