कुतूहल अध्याय 5 क्रियाकलाप 5.2

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कागज के कुछ पृष्ठ लीजिए तथा उन्हें मोड़कर विभिन्न वस्तुएँ बनाइए (चित्र 5.1)। क्या कागज की बनी वस्तुओं की तहों को खोलकर आप पुनः पहले जैसा कागज प्राप्त कर सकते हैं?
उत्तर

हाँ। नाव, हवाई जहाज, चिड़िया अथवा तितली की तहें खोलने पर हमें वही कागज पुनः प्राप्त हो जाता है — वही आमाप, वही रंग, वही भार। केवल तहों की रेखाएँ शेष रह जाती हैं।

ऐसा क्यों होता है: मोड़ने से केवल कागज की आकृति बदलती है। पदार्थ — कागज — ज्यों का त्यों रहता है। चूँकि कोई नया पदार्थ नहीं बनता, अतः यह एक भौतिक परिवर्तन है, और इसे पुनः पहले जैसा किया जा सकता है, अतः यह उत्क्रमणीय भी है।
क्या आप जानते हैं? बिना काटे और बिना चिपकाए कागज मोड़कर वस्तुएँ बनाने की कला को ओरिगामी कहते हैं। प्रत्येक ओरिगामी वस्तु यह दर्शाती है कि भौतिक परिवर्तन स्वरूप को पूर्णतः बदल सकता है, पदार्थ को नहीं।
प्र2.
एक गुब्बारा लीजिए और उसे फुलाइए। अब अपनी पकड़ ढ़ीली करते हुए गुब्बारे में से वायु बाहर निकलने दीजिए। क्या आपको गुब्बारा पुनः मूल स्थिति में प्राप्त होता है?
उत्तर

हाँ। वायु बाहर निकलते ही रबर सिकुड़ जाती है और हमें वही बिना फुलाया हुआ गुब्बारा पुनः प्राप्त हो जाता है।

फुलाने पर: रबर की झिल्ली फैलती है → गुब्बारा बड़ा हो जाता है
वायु निकलने पर: रबर पूर्ववत हो जाती है → गुब्बारा पुनः छोटा
पहले का पदार्थ = बाद का पदार्थ = रबर
ऐसा क्यों होता है: वायु भरने से केवल रबर तनती है और गुब्बारे का आमाप एवं आकृति बदलती है। कोई नया पदार्थ नहीं बनता, अतः यह एक भौतिक तथा उत्क्रमणीय परिवर्तन है।
प्र3.
एक अन्य गुब्बारा लेकर उसे फुलाइए और उसके मुँह को मजबूती से पकड़े रहिए। अब इसमें एक सुई चुभाइए। क्या होता है? क्या आप गुब्बारे को पुनः उसकी मूल स्थिति में प्राप्त कर सकेंगे?
उत्तर

गुब्बारा तेज ध्वनि के साथ फट जाता है और रबर के टुकड़ों में बँट जाता है। नहीं — पूरा बिना फुलाया गुब्बारा हमें पुनः प्राप्त नहीं होता।

ऐसा क्यों होता है: तनी हुई रबर अत्यधिक दबाव में होती है। सुई एक छोटा-सा छेद करती है, और दरार क्षण भर में पूरी झिल्ली में फैल जाती है। फिर भी टुकड़े रबर ही रहते हैं — कोई नया पदार्थ नहीं बनता। अतः गुब्बारे का फटना भी एक भौतिक परिवर्तन है, बस यह अनुत्क्रमणीय है।
संकेत: “भौतिक” और “उत्क्रमणीय” को एक न समझिए। गुब्बारे का फटना, चॉक का चूरा होना और कागज का फटना — तीनों ऐसे भौतिक परिवर्तन हैं जिन्हें उत्क्रमित नहीं किया जा सकता। भौतिक परिवर्तन की कसौटी केवल यही है — कोई नया पदार्थ नहीं बनता
प्र4.
चॉक के एक छोटे टुकड़े को पीसकर चूरा कीजिए। क्या आप इस चूरे से पुनः चॉक प्राप्त कर सकते हैं?
उत्तर

नहीं — चूरे को दबाकर पुनः चॉक की छड़ नहीं बनाई जा सकती। परंतु यह चूरा चॉक ही है: वही श्वेत रंग, श्यामपट्ट पर वैसे ही लिखता है, वही स्पर्श।

ऐसा क्यों होता है: पीसने से एक बड़ा टुकड़ा असंख्य सूक्ष्म कणों में बँट जाता है। केवल आमाप बदला है, पदार्थ नहीं। अतः यह एक भौतिक परिवर्तन है जिसे घर पर उत्क्रमित नहीं किया जा सकता।
करके देखिए: इस चूरे को उँगली से श्यामपट्ट पर रगड़िए। यह उसी प्रकार लिखता है जैसे छड़ लिखती थी। यही प्रमाण है कि कोई नया पदार्थ नहीं बना।
प्र5.
क, ख और ग में सूचीबद्ध किए गए परिवर्तनों में क्या कोई समानता है?
उत्तर

हाँ — तीनों में केवल स्वरूप बदला, पदार्थ वही का वही रहा।

परिवर्तनक्या बदलापहले का पदार्थबाद का पदार्थ
क. कागज से वस्तुएँ बनानाआकृतिकागजकागज
ख. गुब्बारा फुलाना / फोड़नाआमाप एवं आकृतिरबररबर
ग. चॉक का चूरा करनाआमापचॉकचॉक

चूँकि इनमें से किसी में भी कोई नया पदार्थ नहीं बनता, अतः ये तीनों भौतिक परिवर्तन हैं। पुस्तक की परिभाषा भी यही है — ऐसे परिवर्तन जिनमें केवल भौतिक गुण, जैसे आकार, आमाप और अवस्था बदलते हैं, भौतिक परिवर्तन कहलाते हैं।

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