कुतूहल अध्याय 5 क्रियाकलाप 5.4

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
एक परखनली में एक चम्मच सिरका या नींबू का रस लीजिए। उसमें एक चुटकी बेकिंग सोडा (सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट) मिलाइए। आपने क्या अवलोकन किया?
उत्तर

मिश्रण में तुरंत बुदबुदाहट आरंभ हो जाती है। हमें बुदबुदाहट की ध्वनि सुनाई देती है और गैस के बुलबुलों का झाग परखनली के ऊपरी भाग में भर जाता है। परखनली स्पर्श में थोड़ी ठंडी भी लगती है।

ऐसा क्यों होता है: सिरका (और नींबू का रस) अम्लीय है तथा बेकिंग सोडा एक हाइड्रोजन कार्बोनेट। मिलते ही दोनों में अभिक्रिया होती है और एक गैस मुक्त होती है। जिन दो पदार्थों में गैस थी ही नहीं, उनके मिलने पर गैस निकलना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि नया पदार्थ बना है — अर्थात रासायनिक परिवर्तन हुआ है।
संकेत: बेकिंग सोडा एक चुटकी ही डालिए। अधिक डालने पर झाग परखनली से बाहर निकल आता है और गैस का परीक्षण करने से पहले ही वह उड़ जाती है।
प्र2.
चित्र 5.3 (क) में दर्शाए अनुसार इस गैस को एक अन्य परखनली में लिए गए ताजा चूने के पानी में प्रवाहित कीजिए। आपने क्या अवलोकन किया?
उत्तर

स्वच्छ, रंगहीन चूने का पानी दूधिया हो जाता है — ठीक वैसे ही जैसे क्रियाकलाप 5.3 में वायु फूँकने पर हुआ था।

सिरका + बेकिंग सोडा से बनी गैस → चूने के पानी में प्रवाहित
स्वच्छ चूने का पानी → दूधिया
कुछ देर रखने पर तली में श्वेत अघुलनशील ठोस बैठ जाता है
ऐसा क्यों होता है: यह गैस चूने के पानी में उपस्थित कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड से अभिक्रिया कर कैल्सियम कार्बोनेट के सूक्ष्म कण बनाती है, जो जल में नहीं घुलते। द्रव में लटके ये कण प्रकाश को बिखेरते हैं, इसीलिए चूने का पानी दूधिया दिखता है।
स्वयं जाँचिए: चूने का पानी ताजा एवं स्वच्छ होना चाहिए। पुराना चूने का पानी वायु की कार्बन डाइऑक्साइड से पहले ही अभिक्रिया कर चुका होता है और स्पष्ट परिणाम नहीं देता।
प्र3.
चूने का पानी दूधिया हो जाता है। सिरका और बेकिंग सोडा मिश्रित करने पर निर्मित गैस के विषय में आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
उत्तर

हम यह निष्कर्ष निकालते हैं कि निर्मित गैस कार्बन डाइऑक्साइड है।

ऐसा क्यों होता है: चूने के पानी का दूधिया होना कार्बन डाइऑक्साइड का परीक्षण माना जाता है। क्रियाकलाप 5.3 में जिस वायु को हमने फूँका था उसमें कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति ज्ञात थी और उसने चूने के पानी को दूधिया कर दिया था। यहाँ एक अज्ञात गैस ठीक वही करती है, अतः वह वही गैस होगी। चूँकि आरंभ में न सिरके में और न बेकिंग सोडा में कार्बन डाइऑक्साइड थी, अतः यह एक नया पदार्थ है और यह अभिक्रिया एक रासायनिक परिवर्तन है —
सिरका + बेकिंग सोडा → कार्बन डाइऑक्साइड + अन्य पदार्थ

यही क्रियाकलाप आप चित्र 5.3 (ख) के अनुसार परखनलियों के स्थान पर दो छोटी बोतलों एवं एक नम्य नली से भी कर सकते हैं।

प्र4.
इस क्रियाकलाप को बेकिंग सोडा तथा जल के साथ दोहराइए। क्या आप गैस के बुलबुले बनते हुए देखते हैं? क्या यह एक भौतिक परिवर्तन है या रासायनिक परिवर्तन है?
उत्तर

न बुदबुदाहट होती है और न गैस के बुलबुलों की धार बनती है। बेकिंग सोडा केवल जल में घुल जाता है और द्रव स्वच्छ बना रहता है। (चूर्ण से चिपकी वायु के कुछ छोटे बुलबुले ऊपर आ सकते हैं, परंतु बुदबुदाहट की ध्वनि नहीं होती।) यह एक भौतिक परिवर्तन है।

बेकिंग सोडा + सिरकाबेकिंग सोडा + जल
क्या दिखता हैतेज बुदबुदाहट, अनेक गैस बुलबुलेचूर्ण चुपचाप घुल जाता है
चूने के पानी का परीक्षणचूने का पानी दूधियाचूने का पानी स्वच्छ ही रहता है
नया पदार्थ बना?हाँ — कार्बन डाइऑक्साइडनहीं
परिवर्तन का प्रकाररासायनिक परिवर्तनभौतिक परिवर्तन
ऐसा क्यों होता है: कार्बन डाइऑक्साइड मुक्त करने के लिए बेकिंग सोडा को किसी अम्ल की आवश्यकता होती है। सिरका एवं नींबू का रस अम्ल हैं, साधारण जल नहीं। जल में बेकिंग सोडा के कण केवल जल-कणों के बीच फैल जाते हैं — यही घुलना है, और जल वाष्पित कर बेकिंग सोडा पुनः प्राप्त किया जा सकता है। कोई नया पदार्थ न बनने के कारण यह भौतिक परिवर्तन है।
क्या आप जानते हैं? इसी कारण ढोकला या केक की विधि में सोडा के साथ दही, नींबू का रस अथवा ईनो मिलाने को कहा जाता है। अम्ल के बिना गैस नहीं बनेगी और घोल फूलेगा नहीं।
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