कुतूहल अध्याय 5 आइए, और अधिक सीखें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
निम्नलिखित में से कौन-से कथन भौतिक परिवर्तन की विशेषताएँ हैं? (i) पदार्थ की अवस्था परिवर्तित हो सकती है अथवा नहीं हो सकती है। (ii) भिन्न गुणों वाला एक पदार्थ बनता है। (iii) कोई नया पदार्थ नहीं बनता है। (iv) पदार्थ में रासायनिक अभिक्रिया होती है। (क) (i) और (ii) (ख) (ii) और (iii) (ग) (i) और (iii) (घ) (iii) और (iv)
उत्तर

(ग) (i) और (iii)

कथनक्या यह भौतिक परिवर्तन का गुण है?कारण
(i) पदार्थ की अवस्था परिवर्तित हो सकती है अथवा नहीं हो सकती है।हाँबर्फ पिघलने में अवस्था बदलती है; कागज मोड़ने में नहीं। दोनों भौतिक हैं।
(ii) भिन्न गुणों वाला एक पदार्थ बनता है।नहींयह रासायनिक परिवर्तन है — नए पदार्थ के गुण नए होते हैं।
(iii) कोई नया पदार्थ नहीं बनता है।हाँयही भौतिक परिवर्तन की मूल कसौटी है।
(iv) पदार्थ में रासायनिक अभिक्रिया होती है।नहींरासायनिक अभिक्रिया से रासायनिक परिवर्तन होता है।
ऐसा क्यों होता है: कथन (ii) एवं (iv) दोनों रासायनिक परिवर्तन का वर्णन करते हैं, अतः जिस विकल्प में ये हैं वह गलत होगा। केवल (i) और (iii) शेष रहते हैं, अर्थात विकल्प (ग)।
प्र2.
पूर्वानुमान लगाइए कि निम्नलिखित परिवर्तनों में से कौन-से परिवर्तन उत्क्रमित किए जा सकते हैं और कौन-से नहीं। यदि किसी परिवर्तन के विषय में आप आश्वस्त नहीं हैं तो उसका कारण लिखिए कि क्यों नहीं हैं? (i) वस्त्र सिलकर कमीज बनाना (ii) सीधी डोरी को ऐंठना (iii) इडली के घोल से इडली बनाना (iv) जल में चीनी घोलना (v) कुएँ से जल निकालना (vi) फलों का पकना (vii) खुले पात्र में जल उबालना (viii) चटाई समेटना (ix) गेहूँ के दानों को पीसकर आटा बनाना (x) चट्टानों से मृदा का बनना
उत्तर
परिवर्तनक्या उत्क्रमित किया जा सकता है?कारण
(i) वस्त्र सिलकर कमीज बनानाहाँटाँके उधेड़कर कपड़े के टुकड़े पुनः प्राप्त हो जाते हैं — केवल सुई के छोटे छेद रह जाते हैं। यह भौतिक परिवर्तन है।
(ii) सीधी डोरी को ऐंठनाहाँऐंठन खोलिए, डोरी पुनः सीधी हो जाती है। केवल आकृति बदली थी।
(iii) इडली के घोल से इडली बनानानहींखमीरीकरण एवं भाप में पकने से नए पदार्थ बनते हैं। पकी इडली पुनः घोल नहीं बन सकती।
(iv) जल में चीनी घोलनाहाँजल वाष्पित कर चीनी पुनः प्राप्त की जा सकती है। चीनी केवल जल-कणों के बीच फैली है।
(v) कुएँ से जल निकालनाहाँजल को पुनः कुएँ में डाला जा सकता है। केवल उसकी स्थिति बदली थी।
(vi) फलों का पकनानहींनए पदार्थ पके फल को रंग, कोमलता, मिठास एवं गंध देते हैं। पका आम पुनः कच्चा नहीं हो सकता।
(vii) खुले पात्र में जल उबालनाआश्वस्त नहीं — नीचे देखिएअवस्था-परिवर्तन के रूप में यह उत्क्रमणीय है; परंतु खुले पात्र में वाष्प कमरे में उड़ जाती है और उसे एकत्र नहीं किया जा सकता, अतः व्यवहार में जल लौटता नहीं।
(viii) चटाई समेटनाहाँखोलिए, चटाई पुनः समतल हो जाती है।
(ix) गेहूँ के दानों को पीसकर आटा बनानानहींआटा अब भी गेहूँ ही है, अतः यह भौतिक परिवर्तन है — परंतु आटे को दबाकर पुनः दाने नहीं बनाए जा सकते।
(x) चट्टानों से मृदा का बननानहींअपक्षय में रासायनिक परिवर्तन भी होते हैं और इसमें हजारों वर्ष लगते हैं। मृदा को पुनः मूल चट्टान नहीं बनाया जा सकता।
(vii) के विषय में आश्वस्त क्यों नहीं: उत्तर खुले शब्द पर निर्भर करता है। पात्र को ढक दीजिए तो वाष्प ढक्कन पर संघनित होकर टपक जाती है — परिवर्तन स्पष्ट रूप से उत्क्रमित हो जाता है। खुला छोड़ दीजिए तो वाष्प कमरे की वायु में मिल जाती है; जल विद्यमान तो रहता है, पर उसे लौटाने का कोई उपाय हमारे पास नहीं। अतः परिवर्तन स्वयं उत्क्रमणीय है, पर वर्णित प्रयोग नहीं।
संकेत: मद (ix) यह याद दिलाती है कि अनुत्क्रमणीय का अर्थ रासायनिक नहीं होता। गेहूँ पीसना एक भौतिक परिवर्तन है जिसे उत्क्रमित नहीं किया जा सकता।
प्र3.
बताइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं अथवा असत्य। यदि कोई कथन असत्य है तो सही कथन लिखिए। (i) मोमबत्ती जलाने के लिए मोम का पिघलना आवश्यक है। (ii) संघनन द्वारा जलवाष्प को एकत्रित करने में रासायनिक परिवर्तन होता है। (iii) पत्तियों को खाद में बदलने की प्रक्रिया एक रासायनिक परिवर्तन है। (iv) बेकिंग सोडा को नींबू के रस के साथ मिश्रित करना एक रासायनिक परिवर्तन है।
उत्तर
कथनसत्य / असत्यसही कथन एवं कारण
(i) मोमबत्ती जलाने के लिए मोम का पिघलना आवश्यक है।सत्यठोस मोम जल नहीं सकता। उसे पहले पिघलकर बत्ती में ऊपर चढ़ना और वाष्पित होना पड़ता है; जलती वाष्प ही है।
(ii) संघनन द्वारा जलवाष्प को एकत्रित करने में रासायनिक परिवर्तन होता है।असत्यसही कथन: संघनन द्वारा जलवाष्प को एकत्रित करने में भौतिक परिवर्तन होता है। केवल अवस्था गैस से द्रव में बदलती है; पदार्थ पहले भी जल था और बाद में भी जल है।
(iii) पत्तियों को खाद में बदलने की प्रक्रिया एक रासायनिक परिवर्तन है।सत्यजीवाणु एवं कवक पत्तियों को पूर्णतः नए पदार्थों में बदल देते हैं। खाद को पुनः पत्तियाँ नहीं बनाया जा सकता।
(iv) बेकिंग सोडा को नींबू के रस के साथ मिश्रित करना एक रासायनिक परिवर्तन है।सत्यएक नई गैस, कार्बन डाइऑक्साइड, बनती है — बुदबुदाहट होती है और वह चूने के पानी को दूधिया कर देती है।
प्र4.
निम्नलिखित कथनों के रिक्त स्थान भरिए — (i) नलिनी ने देखा कि उसकी साइकिल के हत्थे पर भूरे रंग का निक्षेप हो गया है। भूरे रंग का यह निक्षेप ________ के कारण होता है और यह एक ________ परिवर्तन है। (ii) रूमाल की तह लगाना एक ________ परिवर्तन है और यह ________ हो सकता है। (iii) वह रासायनिक प्रक्रिया जिसमें कोई पदार्थ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके ऊष्मा उत्सर्जित करता है, उसे ________ कहते हैं और यह ________ परिवर्तन होता है। (iv) मैग्नीशियम जब वायु में जलाया जाता है तो यह एक पदार्थ बनाता है जिसे ________ कहा जाता है। बनने वाला पदार्थ ________ प्रकृति का होता है। मैग्नीशियम का जलना एक ________ परिवर्तन है।
उत्तर
कथनउत्तर
(i) भूरे रंग का यह निक्षेप ______ के कारण होता है और यह एक ______ परिवर्तन है।जंग लगने (भूरा पदार्थ जंग अर्थात आयरन ऑक्साइड है); रासायनिक
(ii) रूमाल की तह लगाना एक ______ परिवर्तन है और यह ______ हो सकता है।भौतिक; उत्क्रमित
(iii) वह रासायनिक प्रक्रिया जिसमें कोई पदार्थ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके ऊष्मा उत्सर्जित करता है, उसे ______ कहते हैं और यह ______ परिवर्तन होता है।दहन; रासायनिक
(iv) मैग्नीशियम ... पदार्थ बनाता है जिसे ______ कहा जाता है। बनने वाला पदार्थ ______ प्रकृति का होता है। मैग्नीशियम का जलना एक ______ परिवर्तन है।मैग्नीशियम ऑक्साइड; क्षारकीय; रासायनिक
ऐसा क्यों होता है: (i) में साइकिल के हत्थे का लोहा वायु की ऑक्सीजन एवं नमी से संयोग कर एक नया भूरा पदार्थ बनाता है — यही जंग लगना है, और नया पदार्थ बनने का अर्थ है रासायनिक परिवर्तन। (iv) में रिबन के जलने के बाद बचा श्वेत चूर्ण मैग्नीशियम ऑक्साइड है; जल में घोलने पर यह लाल लिटमस को नीला कर देता है, जिससे सिद्ध होता है कि यह क्षारकीय प्रकृति का है।
प्र5.
जल का बर्फ या वाष्प में परिवर्तित होना भौतिक परिवर्तन है अथवा रासायनिक परिवर्तन? व्याख्या कीजिए।
उत्तर

दोनों भौतिक परिवर्तन हैं।

जल (द्रव) जमकर → बर्फ (ठोस)   — और बर्फ पिघलकर पुनः जल
जल (द्रव) उबलकर → वाष्प (गैस)   — और वाष्प संघनित होकर पुनः जल
पहले का पदार्थ = बाद का पदार्थ = जल

तीन कारण —

  1. कोई नया पदार्थ नहीं बनता। बर्फ, जल और वाष्प एक ही पदार्थ की तीन अवस्थाएँ हैं।
  2. केवल अवस्था बदलती है, जो एक भौतिक गुण है।
  3. दोनों परिवर्तन उत्क्रमित किए जा सकते हैं — बर्फ पिघलकर जल बनती है, वाष्प संघनित होकर जल।
ऐसा क्यों होता है: ठोस में कण पास-पास बँधे रहकर केवल कंपन करते हैं। गरम करने पर वे ऊर्जा पाकर दूर हटते हैं और एक-दूसरे पर सरकने लगते हैं — यही द्रव है। और अधिक गरम करने पर वे बहुत दूर बिखर जाते हैं — यही गैस है। पूरे समय कण स्वयं अपरिवर्तित रहते हैं, इसीलिए परिवर्तन भौतिक है।
प्र6.
क्या दूध का फटना एक भौतिक परिवर्तन है अथवा रासायनिक परिवर्तन? अपने कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर

दूध का फटना एक रासायनिक परिवर्तन है।

पुष्टि:

  1. एक नया पदार्थ — दही — बनता है, जिसका स्वाद (खट्टा), गंध एवं गठन (गाढ़ा, जमा हुआ) दूध से पूर्णतः भिन्न होता है।
  2. यह परिवर्तन उत्क्रमित नहीं किया जा सकता — दही को पुनः दूध नहीं बनाया जा सकता।
  3. यह परिवर्तन जीवाणुओं द्वारा होता है, जो दूध की शर्करा को अम्ल में बदल देते हैं और अम्ल दूध की प्रोटीन को जमा देता है। यह एक रासायनिक अभिक्रिया है।
ऐसा क्यों होता है: गुनगुने दूध में एक चम्मच दही (जामन) डालने पर उसमें उपस्थित जीवाणु बढ़ते हैं और दूध की शर्करा लैक्टोस को लैक्टिक अम्ल में बदल देते हैं। यह अम्ल दूध की प्रोटीन को गुच्छों में जमा देता है और दूध एक कोमल ठोस के रूप में जम जाता है। नए गुणों वाले नए पदार्थ बने, अतः परिवर्तन रासायनिक है।
क्या आप जानते हैं? ग्रीष्म ऋतु में दूध का स्वयं फट जाना अवांछनीय परिवर्तन है, परंतु जब हम जान-बूझकर दही जमाते हैं तो वही परिवर्तन वांछनीय हो जाता है। कोई परिवर्तन अच्छा है या बुरा, यह परिस्थिति तय करती है, परिवर्तन नहीं।
प्र7.
वायु, वर्षा आदि जैसे प्राकृतिक कारक चट्टानों से मृदा का निर्माण करते हैं। क्या यह परिवर्तन भौतिक है अथवा रासायनिक और क्यों?
उत्तर

यह दोनों है — चट्टानों से मृदा का बनना, जिसे अपक्षय कहते हैं, भौतिक तथा रासायनिक दोनों परिवर्तनों से होता है।

अपक्षय का भौतिक भागअपक्षय का रासायनिक भाग
तापमान में परिवर्तन से चट्टानें फैलती-सिकुड़ती हैं और दरारें पड़ जाती हैंजल तथा जल में घुले रसायन चट्टान के खनिजों से अभिक्रिया करते हैं
दरारों में जमा जल जमने पर फैलकर चट्टान को तोड़ देता हैकाले बेसाल्ट का लोहा लाल आयरन ऑक्साइड में बदल जाता है [चित्र 5.10 (ख)]
पेड़ों की बढ़ती जड़ें दरारें चौड़ी कर टुकड़े अलग कर देती हैंचट्टान की संरचना ही बदल जाती है — नए पदार्थ बनते हैं
केवल आमाप एवं आकृति बदलती है — कोई नया पदार्थ नहींनए पदार्थ बनते हैं
ऐसा क्यों होता है: वायु और बहता जल मुख्यतः चट्टान को तोड़ते एवं बहाकर ले जाते हैं, जो भौतिक है। परंतु वर्षा का जल केवल जल नहीं होता — उसमें घुली गैसें एवं रसायन चट्टान पर आक्रमण कर उसकी संरचना बदल देते हैं, जो रासायनिक है। दोनों मिलकर हजारों वर्षों में कठोर चट्टान को मृदा में बदल देते हैं। यह परिवर्तन उत्क्रमित नहीं किया जा सकता।
प्र8.
‘पर्यावरण-हितैषी — पृथु’ शीर्षक वाली निम्नलिखित कहानी पढ़िए और कोष्ठक में दिए गए सबसे उपयुक्त विकल्प पर चिह्न लगाइए। कहानी के लिए अपनी रुचि का उपयुक्त शीर्षक दीजिए। पृथु रसोई में भोजन तैयार कर रहा है। वह सब्जियाँ काटता है, आलू छीलता है और फल काटता है (भौतिक परिवर्तन अथवा रासायनिक परिवर्तन)। वह बीजों को, फलों और सब्जियों के छिलकों को मिट्टी के एक पात्र में एकत्रित करता है (भौतिक परिवर्तन अथवा रासायनिक परिवर्तन)। जीवाणु और कवक की क्रिया के कारण फलों व सब्जियों के छिलके और अन्य सामग्रियाँ सड़ने लगती हैं जिससे खाद बनती है (भौतिक परिवर्तन अथवा रासायनिक परिवर्तन)। पृथु बीज बोने के समय गमलों में खाद डालने एवं उनमें नियमित रूप से जल देने का निश्चय करता है। कुछ दिनों पश्चात वह देखता है कि बीज अंकुरित होने लगे हैं और छोटे-छोटे पौधे उगने लगे हैं जिनमें अंततः रंग-बिरंगे पुष्प खिल जाते हैं (भौतिक परिवर्तन अथवा रासायनिक परिवर्तन)। परिवार के सभी सदस्य पृथु के प्रयासों की प्रशंसा करते हैं।
उत्तर
कहानी का अंशसही विकल्पकारण
वह सब्जियाँ काटता है, आलू छीलता है और फल काटता हैभौतिक परिवर्तनकेवल आमाप एवं आकृति बदलती है; कटा आलू अब भी आलू है
वह बीजों, छिलकों को मिट्टी के पात्र में एकत्रित करता हैभौतिक परिवर्तनकेवल पदार्थ की स्थिति बदलती है; कुछ नया नहीं बनता
जीवाणु और कवक की क्रिया से छिलके सड़कर खाद बनते हैंरासायनिक परिवर्तनजीवाणु एवं कवक अपशिष्ट को पूर्णतः नए पदार्थों में बदल देते हैं; खाद पुनः छिलके नहीं बन सकती
बीज अंकुरित होते हैं, पौधे उगते हैं और रंग-बिरंगे पुष्प खिलते हैंरासायनिक परिवर्तनअंकुरण एवं वृद्धि जैविक प्रक्रियाएँ हैं जिनमें पौधे के भीतर नए पदार्थ बनते हैं

उपयुक्त शीर्षक: “रसोई के कचरे से रंग-बिरंगे फूल तक”।

अन्य समान रूप से अच्छे शीर्षक: “पृथु की खाद-वाटिका”, “कुछ भी कचरा नहीं”, “कचरे से खुशहाली”, अथवा “फूल उगाती रसोई”।

करके देखिए: पृथु की तरह घर पर भी खाद बनाइए — मिट्टी के पात्र में सब्जियों के छिलके एवं सूखी पत्तियाँ डालकर उसे नम रखिए और कुछ-कुछ दिनों में उलटते-पलटते रहिए। लगभग छह से आठ सप्ताह में गहरे रंग की भुरभुरी खाद तैयार मिलेगी — और आप एक रासायनिक परिवर्तन को अपनी आँखों से होते देख लेंगे।
प्र9.
अगले पृष्ठ पर कुछ परिवर्तन दिए गए हैं। चिह्नित क्षेत्र ‘क’ में भौतिक परिवर्तन और चिह्नित क्षेत्र ‘ख’ में रासायनिक परिवर्तनों को लिखिए। चिह्नित क्षेत्र ‘ग’ में भौतिक और रासायनिक दोनों प्रकार के परिवर्तनों को लिखिए। मोमबत्ती जलने की प्रक्रिया; कागज का फटना; जंग का लगना; दूध का फटना, फलों का पकना, बर्फ का पिघलना, वस्त्रों की तह लगाना, मैग्नीशियम का जलना और बेकिंग सोडा को सिरके में मिश्रित करना।
उत्तर
क — केवल भौतिक ख — केवल रासायनिक कागज का फटना बर्फ का पिघलना वस्त्रों की तह लगाना जंग का लगना दूध का फटना फलों का पकना मैग्नीशियम का जलना बेकिंग सोडा को सिरके में मिश्रित करना ग — दोनों मोमबत्ती जलने की प्रक्रिया
नौ परिवर्तनों को क, ख और ग क्षेत्रों में बाँटकर दिखाया गया है।
क्षेत्रपरिवर्तनकारण
क — भौतिक परिवर्तनकागज का फटना; बर्फ का पिघलना; वस्त्रों की तह लगानाकेवल आकृति, आमाप अथवा अवस्था बदलती है — कोई नया पदार्थ नहीं
ख — रासायनिक परिवर्तनजंग का लगना; दूध का फटना; फलों का पकना; मैग्नीशियम का जलना; बेकिंग सोडा को सिरके में मिश्रित करनाप्रत्येक में नया पदार्थ बनता है — आयरन ऑक्साइड, दही, पकने के पदार्थ, मैग्नीशियम ऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड
ग — भौतिक एवं रासायनिक दोनोंमोमबत्ती जलने की प्रक्रियामोम का पिघलना, बहना, जमना एवं वाष्पीकृत होना भौतिक है; मोम की वाष्प का जलना रासायनिक है
प्र10.
चित्र 5.11 (क), (ख), (ग), और (घ) में दर्शाए गए प्रयोग किए गए। पता लगाइए कि किस प्रयोग में चूने का पानी दूधिया हो गया और क्यों?
उत्तर

चूने का पानी केवल (क) और (घ) में दूधिया होता है।

प्रयोगपहली परखनली का मिश्रणगैस बनी?चूने का पानी
(क)सिरका और बेकिंग सोडाहाँ — कार्बन डाइऑक्साइडदूधिया हो जाता है
(ख)नींबू का रस और सिरकानहींस्वच्छ ही रहता है
(ग)सिरका और साधारण नमकनहींस्वच्छ ही रहता है
(घ)नींबू का रस और बेकिंग सोडाहाँ — कार्बन डाइऑक्साइडदूधिया हो जाता है
ऐसा क्यों होता है: कार्बन डाइऑक्साइड तभी मुक्त होती है जब बेकिंग सोडा किसी अम्ल से मिले। सिरका और नींबू का रस दोनों अम्ल हैं, अतः (क) और (घ) में बुदबुदाहट होती है और बनी कार्बन डाइऑक्साइड चूने के पानी को दूधिया कर देती है। (ख) में दोनों पदार्थ अम्ल हैं — दो अम्ल आपस में अभिक्रिया नहीं करते, अतः कोई गैस नहीं बनती। (ग) में साधारण नमक न अम्ल है न हाइड्रोजन कार्बोनेट, अतः सिरके के पास अभिक्रिया करने के लिए कुछ है ही नहीं। कार्बन डाइऑक्साइड न पहुँचने के कारण (ख) एवं (ग) का चूने का पानी स्वच्छ बना रहता है।
बेकिंग सोडा + अम्ल → कार्बन डाइऑक्साइड + अन्य पदार्थ
कार्बन डाइऑक्साइड + चूने का पानी → कैल्सियम कार्बोनेट (श्वेत, अघुलनशील) + जल → दूधिया
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