कुतूहल अध्याय 5 अन्वेषणात्मक परियोजनाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
नींबू के रस का स्याही की तरह उपयोग करके कागज के टुकड़े पर एक संदेश लिखिए और उसे सूखने दीजिए। संदेश अदृश्य हो जाएगा। अब कागज पर गरम इस्त्री करें अथवा कागज को मोमबत्ती की लौ पर इस प्रकार से रखें कि यह आग न पकड़ ले। कागज के गरम होने पर अदृश्य अक्षर गहरे भूरे रंग के हो जाते हैं। क्या इनमें से किसी भी परिवर्तन को उत्क्रमित किया जा सकता है?
उत्तर

पहले परिवर्तन को उत्क्रमित किया जा सकता है; दूसरे को नहीं।

चरणक्या होता हैपरिवर्तन का प्रकारक्या उत्क्रमित हो सकता है?
नींबू के रस से लिखा संदेश सूखकर अदृश्य हो जाता हैरस का जल वाष्पित हो जाता है और एक पतली रंगहीन परत रह जाती हैभौतिकहाँ — कागज को पुनः गीला करने पर निशान हल्का-सा दिखने लगता है
गरम इस्त्री से अक्षर गहरे भूरे हो जाते हैंसूखा नींबू का रस झुलसकर नए भूरे पदार्थ बनाता हैरासायनिकनहीं — भूरे अक्षर पुनः अदृश्य नहीं किए जा सकते
ऐसा क्यों होता है: नींबू के रस में कार्बन-युक्त पदार्थ (शर्करा एवं सिट्रिक अम्ल) होते हैं। ये कागज की अपेक्षा कहीं कम तापमान पर टूटकर झुलस जाते हैं। इसीलिए जहाँ लिखा है वही भाग भूरा होता है और शेष कागज केवल गरम रहता है — यही कारण है कि संदेश दिखाई देने लगता है।
सावधानी: इस क्रियाकलाप को किसी वयस्क के निर्देशन में कीजिए। मोमबत्ती का उपयोग करें तो कागज को लौ से पर्याप्त ऊपर तथा हिलाते हुए रखें, ताकि वह आग न पकड़ ले।
प्र2.
इन दिनों हम पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और चट्टानों के टूटने के बहुत से समाचार सुनते हैं जिससे जान-माल की हानि होती है। भूस्खलन और चट्टानों के अपघटन को कम करने के लिए सावधानी के रूप में क्या प्रक्रम किए जा सकते हैं। चर्चा कीजिए।
उत्तर

चर्चा की विधि: पहले यह सूचीबद्ध कीजिए कि पहाड़ी ढलान क्यों खिसकती है — ढीली मृदा, भारी वर्षा, सड़क एवं भवन के लिए तीखी कटाई, तथा वृक्षों का कटना। फिर प्रत्येक कारण के सामने एक उपाय रखिए। अच्छे उत्तर में कम-से-कम चार उपाय हों और यह भी बताया जाए कि प्रत्येक कैसे काम करता है।

उपाययह कैसे सहायक है
वनरोपण — ढलानों पर वृक्ष, घास एवं गहरी जड़ वाले पौधे लगानाजड़ें मृदा को बाँधे रखती हैं और पत्तियाँ वर्षा की बूँदों का वेग तोड़ती हैं
वनोन्मूलन एवं अनियंत्रित चराई रोकनानंगी ढलानें ढकी ढलानों की तुलना में कहीं तेजी से बह जाती हैं
सीढ़ीदार खेती — ढलान के साथ जुताई के स्थान परसमतल सीढ़ियाँ जल की गति घटा देती हैं, जिससे वह मृदा नहीं बहा पाता
रोक-दीवारें, गैबियन (पत्थर भरे तार के पिंजरे) एवं कटे ढलानों पर तार की जालीसड़कों के किनारे ढीली चट्टान एवं मृदा को अपने स्थान पर रोके रखती हैं
उचित जल-निकास — वर्षा जल को ढलान से बाहर ले जाने वाली नालियाँपहाड़ में रिसा जल उसे भारी एवं फिसलनदार बनाता है, जो भूस्खलन का सबसे सामान्य कारण है
विस्फोट, खनन एवं तीखी सड़क-कटाई पर नियंत्रण; कमजोर ढलानों पर भारी निर्माण से बचनाप्रत्येक कटाई पहाड़ के पैर का सहारा छीन लेती है
पूर्व-चेतावनी तंत्र एवं वर्षा की निगरानीभूस्खलन से पहले ही लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा सकता है
नमूना उत्तर: “हमारे पहाड़ों में भूस्खलन मुख्यतः इसलिए बढ़े हैं क्योंकि पेड़ काटे जा रहे हैं और सड़कों व होटलों के लिए ढलानें तीखी काटी जा रही हैं। हमें नंगी ढलानों पर गहरी जड़ वाले वृक्ष लगाने चाहिए, उचित नालियाँ बनानी चाहिए ताकि वर्षा जल पहाड़ में न रिसे, सड़क-कटाई को रोक-दीवार एवं तार की जाली से सुरक्षित करना चाहिए, सीढ़ीदार खेती अपनानी चाहिए तथा भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों में निर्माण के नियमों का कठोरता से पालन करना चाहिए।”
प्र3.
रसोईघर में हो रहे क्रियाकलापों का अवलोकन कीजिए और उन परिवर्तनों को अभिलेखित कीजिए जिन्हें उत्क्रमित किया जा सकता है। क्या ये परिवर्तन भौतिक हैं अथवा रासायनिक हैं?
उत्तर

कैसे कीजिए: एक कॉपी लेकर आधा घंटा रसोईघर में बैठिए। जो भी परिवर्तन दिखे उसके सामने तीन बातें लिखिए — क्या बदला, क्या मूल वस्तु पुनः मिल सकती है, और क्या कोई नया पदार्थ बना।

रसोईघर में दिखने वाला परिवर्तनक्या उत्क्रमित हो सकता है?भौतिक अथवा रासायनिक?
गिलास में बर्फ के टुकड़ों का पिघलनाहाँभौतिक
जल का उबलना; ढक्कन पर वाष्प का संघनित होनाहाँभौतिक
जल में चीनी अथवा नमक का घुलनाहाँ (जल वाष्पित कीजिए)भौतिक
आटे की लोइयाँ बनाना और रोटियाँ बेलनाहाँ (पुनः लोई बना लीजिए)भौतिक
गरम तवे पर मक्खन का पिघलनाहाँ (ठंडा होने पर पुनः जम जाता है)भौतिक
भीगे चावल एवं दाल को पीसकर घोल बनानानहींभौतिक, परंतु अनुत्क्रमणीय
दूध का दही जमना; भोजन पकना; रसोई गैस का जलनानहींरासायनिक

निष्कर्ष: रसोईघर के जो परिवर्तन उत्क्रमित किए जा सकते हैं, वे लगभग सभी भौतिक निकलते हैं — प्रायः अवस्था अथवा आकृति के परिवर्तन। जिन्हें उत्क्रमित नहीं किया जा सकता, जैसे भोजन पकना, दही जमना और ईंधन का जलना, वे रासायनिक होते हैं।

प्र4.
डबल रोटी को मुलायम और फूला हुआ बनाने के लिए पकाते समय उसमें खमीर मिश्रित किया जाता है। खमीर किस प्रकार कार्य करता है? पता लगाने का प्रयास कीजिए। एक छोटी बोतल, थोड़ी शक्कर, ताजा खमीर, जल और एक गुब्बारा लीजिए। बोतल में दो चम्मच शक्कर और थोड़ा जल मिश्रित कर शक्कर का विलयन बनाइए। अब इसमें एक चम्मच खमीर डालिए और बोतल के मुँह पर गुब्बारा लगाइए। इसे लगभग एक घंटे तक अबाधित रहने दीजिए। आप क्या अवलोकन करते हैं? गुब्बारे को सावधानी से हटाइए। अब गुब्बारे का मुँह कसकर बंद रखिए और उसे ताजा चूने के पानी वाली दूसरी छोटी बोतल के मुँह पर लगा दीजिए। बोतल को हिलाइए ताकि गुब्बारे की सामग्री चूने के पानी में मिल जाए। आप क्या अवलोकन करते हैं? आप इस प्रयोग से क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं? इस प्रयोग में होने वाले सभी परिवर्तनों को पहचानिए और बताइए कि कौन-से परिवर्तन भौतिक हैं और कौन-से रासायनिक।
उत्तर

एक घंटे बाद का अवलोकन: मिश्रण झागदार एवं बुलबुलेदार हो जाता है, उसमें से हल्की खट्टी, डबल रोटी जैसी गंध आती है, और गुब्बारा धीरे-धीरे फूलकर खड़ा हो जाता है। स्पष्ट है कि बोतल के भीतर कोई गैस बन रही है।

चूने के पानी के साथ अवलोकन: गुब्बारे की गैस को ताजा चूने के पानी के साथ हिलाने पर चूने का पानी दूधिया हो जाता है

निष्कर्ष: खमीर द्वारा बनाई गई गैस कार्बन डाइऑक्साइड है। खमीर एक जीवित कवक है; यह शक्कर को अपना भोजन बनाकर उसका विघटन करता है और कार्बन डाइऑक्साइड मुक्त करता है। आटे में यही गैस असंख्य छोटे बुलबुलों के रूप में फँस जाती है, आटे को ऊपर उठाती है और उसमें छिद्र बना देती है — इसी से डबल रोटी फूली हुई और मुलायम बनती है।

शक्कर + खमीर → कार्बन डाइऑक्साइड + अन्य पदार्थ
कार्बन डाइऑक्साइड + चूने का पानी → कैल्सियम कार्बोनेट (श्वेत, अघुलनशील) + जल → दूधिया
प्रयोग में होने वाला परिवर्तनभौतिक अथवा रासायनिक?कारण
जल में शक्कर का घुलनाभौतिकशक्कर केवल फैलती है; वाष्पीकरण द्वारा पुनः प्राप्त की जा सकती है
खमीर का शक्कर पर क्रिया कर गैस बनानारासायनिकएक नया पदार्थ, कार्बन डाइऑक्साइड, बनता है
गुब्बारे का तनकर फूलनाभौतिकरबर का केवल आमाप एवं आकृति बदलती है
गैस का बोतल से गुब्बारे में जानाभौतिककेवल गैस की स्थिति बदलती है
चूने के पानी का दूधिया होनारासायनिकएक नया पदार्थ, कैल्सियम कार्बोनेट, बनता है
संकेत: गुनगुने जल का उपयोग कीजिए, अधिक गरम का नहीं। खमीर जीवित है — बहुत गरम जल उसे मार देता है और फिर गुब्बारा कभी नहीं फूलेगा। बोतल को किसी गरम स्थान पर रखने से परिणाम शीघ्र मिलता है।
प्र5.
गिरगिट अपने आस-पास के वातावरण के अनुरूप अपना रंग बदलते हैं और जब वे क्रोधित होते हैं या संकट का अनुभव करते हैं तो भी अपना रंग बदलते हैं। क्या यह ऐसा परिवर्तन है जिसे उत्क्रमित किया जा सकता है? इंटरनेट से अथवा अपने विद्यालय के पुस्तकालय से इसके संबंध में सूचना एकत्रित कीजिए।
उत्तर

हाँ — इस परिवर्तन को उत्क्रमित किया जा सकता है। चमकीले एवं गहरे रंग में बदला गिरगिट कुछ ही मिनटों में अपने सामान्य हरे अथवा भूरे रंग में लौट आता है, और एक ही दिन में वह अनेक बार रंग बदल सकता है।

ऐसा क्यों होता है: यह रंग कोई ऐसा रंजक नहीं है जो बनता और नष्ट होता हो। गिरगिट की त्वचा में विशेष कोशिकाएँ होती हैं जिनमें सूक्ष्म क्रिस्टल एक नियमित क्रम में सजे रहते हैं। जब जंतु शांत होता है तो ये क्रिस्टल पास-पास रहते हैं और त्वचा नीला-हरा प्रकाश परावर्तित करती है; जब वह उत्तेजित, क्रोधित अथवा भयभीत होता है तो त्वचा थोड़ी तन जाती है, क्रिस्टलों के बीच की दूरी बढ़ जाती है और अब पीला, नारंगी तथा लाल प्रकाश परावर्तित होता है। एक अन्य परत की रंजक-कोशिकाएँ भी फैल या सिकुड़ सकती हैं। चूँकि कोई नया पदार्थ नहीं बनता — केवल क्रिस्टलों की दूरी एवं रंजक का फैलाव बदलता है — अतः यह एक भौतिक एवं उत्क्रमणीय परिवर्तन है।
क्या आप जानते हैं? गिरगिट रंग छिपने के लिए कम और संवाद तथा ताप-नियंत्रण के लिए अधिक बदलते हैं। ठंडी सुबह में गहरा रंग अधिक ऊष्मा सोखता है और चटकीला प्रदर्शन प्रतिद्वंद्वी को चेतावनी देता है। कटलफिश, ऑक्टोपस तथा कुछ मछलियाँ भी इसी प्रकार उत्क्रमणीय रंग-परिवर्तन कर सकती हैं।

कहाँ खोजें: अपने विद्यालय के पुस्तकालय का जंतु-विश्वकोश, NCERT की संदर्भ पुस्तकें अथवा किसी राष्ट्रीय संग्रहालय या प्राणि-विज्ञान संस्था की विश्वसनीय वेबसाइट। जिस स्रोत का उपयोग करें उसे अवश्य लिखिए।

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