कुतूहल अध्याय 6 विज्ञान एवं समाज

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
किशोर विशेषकर किशोरवय लड़कियाँ शरीर में लौह तत्त्व अथवा विटामिन B12 की कमी के कारण बहुधा रक्त-संबंधी स्वास्थ्य विकारों से पीड़ित होती हैं। ऐसे स्वास्थ्य विकारों के बारे में पता लगाइए।
उत्तर

ऐसा सबसे सामान्य विकार रक्ताल्पता (एनीमिया) है। रक्ताल्पता में रक्त में स्वस्थ लाल रक्त कणिकाओं अथवा उनमें उपस्थित हीमोग्लोबिन की मात्रा पर्याप्त नहीं होती। हीमोग्लोबिन ही ऑक्सीजन ले जाता है, अतः शरीर के प्रत्येक अंग को आवश्यकता से कम ऑक्सीजन मिलती है।

किसकी कमीस्वास्थ्य विकारलक्षण
लौह तत्त्व (आयरन)लौह तत्त्व की कमी से होने वाली रक्ताल्पताथकान और दुर्बलता, त्वचा, नाखून तथा पलक के भीतरी भाग का पीला पड़ना, थोड़े परिश्रम पर साँस फूलना, चक्कर आना, कक्षा में ध्यान न लगना, सिरदर्द
विटामिन B12 (या फोलिक अम्ल)बड़ी लाल रक्त कणिकाओं वाली रक्ताल्पताथकान, पीलापन, जीभ में जलन, हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन, दुर्बलता, स्मरणशक्ति कमजोर होना
किशोरवय लड़कियाँ अधिक प्रभावित क्यों: किशोरावस्था की तीव्र वृद्धि के लिए शरीर को अतिरिक्त लौह तत्त्व चाहिए और लड़कियों के शरीर से प्रति माह मासिक धर्म के दौरान कुछ रक्त भी निकलता है। यदि आहार से पर्याप्त लौह तत्त्व न मिले तो शरीर का संचय घट जाता है और रक्ताल्पता हो जाती है।
स्वयं देखिए: निचली पलक को धीरे से नीचे खींचकर उसका भीतरी भाग देखिए। स्वस्थ व्यक्ति में यह गुलाबी होता है। अत्यधिक पीला या सफेद दिखना उन संकेतों में से एक है जिन्हें चिकित्सक देखते हैं। पुष्टि केवल रक्त जाँच से ही होती है।
प्र2.
हम अपने शरीर में लौह तत्त्व की कमी की पूर्ति कैसे कर सकते हैं?
उत्तर

मुख्यतः लौह तत्त्व से भरपूर आहार लेकर, उसके अवशोषण में सहायता करके और आवश्यक होने पर चिकित्सक द्वारा बताई गई औषधि लेकर।

  1. प्रतिदिन लौह तत्त्व वाले खाद्य लीजिए — पालक और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियाँ, राजमा, चना, अन्य दालें, बाजरा और रागी, गुड़, मूँगफली तथा किशमिश एवं अंजीर जैसे सूखे मेवे। मांसाहारी परिवारों में अंडा, मछली और माँस भी।
  2. उसी भोजन में विटामिन C जोड़िए — आँवला, नींबू, अमरूद, संतरा या टमाटर। विटामिन C पादप आहार के लौह तत्त्व को शरीर के लिए कहीं अधिक सुलभ बना देता है। दाल या चने पर नींबू निचोड़ना पर्याप्त है।
  3. भोजन के तुरंत बाद चाय या कॉफी न लीजिए; ये लौह तत्त्व का अवशोषण घटा देती हैं। इन्हें भोजन से पर्याप्त अंतराल पर लीजिए।
  4. लोहे की कड़ाही या तवे में पकाइए — इससे थोड़ी मात्रा में लौह तत्त्व भोजन में आ जाता है।
  5. आयरन एवं फोलिक अम्ल (IFA) की गोली तभी लीजिए जब चिकित्सक या विद्यालय का स्वास्थ्य कार्यक्रम दे, तथा सलाह के अनुसार कृमिनाशक दवा भी लीजिए — आँतों के कृमि धीरे-धीरे रक्त की हानि करते हैं।
  6. थकान और पीलापन बना रहे तो रक्त जाँच कराइए और स्वयं औषधि लेने के स्थान पर चिकित्सक की सलाह मानिए।
सुझाव: आयरन की गोली से मल का रंग गहरा हो सकता है — यह हानिरहित है। कोर्स बीच में न छोड़ें; शरीर के लौह भंडार भरने में कई सप्ताह लगते हैं।
प्र3.
ऐसी सरकारी योजनाओं के बारे में पता लगाइए जिनका उद्देश्य इन तत्वों की कमी से होने वाले रोगों की रोकथाम करना है।
उत्तर

भारत सरकार अनेक कार्यक्रम चलाती है ताकि किसी बच्चे या किशोर में लौह तत्त्व एवं अन्य पोषकों की कमी न रहे। प्रमुख योजनाएँ —

योजनायह क्या करती है
एनीमिया मुक्त भारत (AMB)रक्ताल्पता कम करने की राष्ट्रव्यापी रणनीति — विद्यार्थियों और किशोरों को साप्ताहिक IFA गोली, वर्ष में दो बार कृमिनाशक दवा, जाँच और उपचार।
साप्ताहिक आयरन एवं फोलिक अम्ल अनुपूरण (WIFS)विद्यालयों और आँगनवाड़ियों के माध्यम से किशोर-किशोरियों को प्रति सप्ताह एक IFA गोली, साथ में जागरूकता सत्र।
राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK)किशोरों के सम्पूर्ण स्वास्थ्य — पोषण, रक्ताल्पता, मासिक धर्म संबंधी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता — में सुधार; साथियों द्वारा शिक्षा और किशोर-हितैषी स्वास्थ्य क्लीनिक।
पी.एम. पोषण (मध्याह्न भोजन योजना)प्रत्येक विद्यालय दिवस पर पका हुआ पौष्टिक भोजन, जिससे बढ़ते बच्चों को प्रोटीन, लौह तत्त्व और अन्य पोषक मिलें।
पोषण अभियान तथा आई.सी.डी.एस./आँगनवाड़ी सेवाएँबच्चों, किशोरियों तथा गर्भवती एवं धात्री माताओं के लिए अनुपूरक पोषण, वृद्धि की निगरानी और पोषण शिक्षा।
खाद्य पदार्थों का सुदृढ़ीकरण (फोर्टिफिकेशन)सरकारी योजनाओं में फोर्टिफाइड चावल तथा द्वि-सुदृढ़ नमक (आयोडीन + आयरन), जिससे रोजमर्रा का भोजन ही लौह तत्त्व दे।
यह कीजिए: निकटतम आँगनवाड़ी या अपने विद्यालय के स्वास्थ्य रजिस्टर से पता लगाइए कि आपका विद्यालय इनमें से किन योजनाओं में सम्मिलित है और IFA गोली सप्ताह के किस दिन दी जाती है।
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