गणित प्रकाश अध्याय 1 आइए, पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
निम्नलिखित में से कौन-सी संख्याएँ पूर्ण वर्ग नहीं हैं? (i) 2032 (ii) 2048 (iii) 1027 (iv) 1089
उत्तर

(i) 2032, (ii) 2048 और (iii) 1027 पूर्ण वर्ग नहीं हैं। 1089 पूर्ण वर्ग है।

संख्याकारणनिर्णय
(i)2032अंत 2 परवर्ग नहीं
(ii)2048अंत 8 परवर्ग नहीं
(iii)1027अंत 7 परवर्ग नहीं
(iv)10891089 = 3 × 3 × 11 × 11 = 332पूर्ण वर्ग
पहली तीन के लिए इकाई अंक ही पर्याप्त क्यों है: कोई भी वर्ग 2, 3, 7 या 8 पर समाप्त नहीं होता, अत: ये तीनों एक दृष्टि में ही बाहर हो जाती हैं। चौथी का अंत 9 पर है जो स्वीकार्य है, इसलिए उसकी वास्तविक जाँच आवश्यक थी — और गुणनखंडन से 1089 = 332, अर्थात √1089 = 33।
संकेत: 2048 = 211 है। घातांक 11 विषम है — यह दूसरा कारण है कि वह वर्ग नहीं हो सकती।
प्र2.
64², 108², 292², 36² में से किसका इकाई अंक 4 है?
उत्तर

केवल आधार संख्या का इकाई अंक महत्त्व रखता है।

वर्गआधार का इकाई अंकउसका वर्गअंतिम अंक
6424166
10828644 ✓
2922244 ✓
3626366

दो संख्याएँ शर्त पूरी करती हैं — 1082 और 2922

स्वयं जाँचिए: 1082 = 11664 और 2922 = 85264 — दोनों का अंत 4 पर; जबकि 642 = 4096 और 362 = 1296 का अंत 6 पर है। प्रश्न में 'किसका' पूछा गया है, परंतु संख्याओं से दो उत्तर मिलते हैं, अत: दोनों बताने चाहिए।
ऐसा क्यों होता है: वर्ग का इकाई अंक 4 ठीक तभी होता है जब मूल का इकाई अंक 2 या 8 हो, क्योंकि 2 × 2 = 4 और 8 × 8 = 64 ही एक अंक वाले ऐसे गुणनफल हैं जो 4 पर समाप्त होते हैं।
प्र3.
यदि 125² = 15625 तो 126² का मान क्या है? (i) 15625 + 126 (ii) 15625 + 262 (iii) 15625 + 253 (iv) 15625 + 251 (v) 15625 + 512
उत्तर

(iv) 15625 + 251

1262 = (125 + 1)2 = 1252 + 2 × 125 + 1
= 15625 + 250 + 1 = 15625 + 251
= 15876
ऐसा क्यों होता है: क्रमागत वर्गों का अंतर अगली विषम संख्या होता है और यहाँ वह 126वीं विषम संख्या 2 × 126 – 1 = 251 है। दूसरे रूप में, 1262 – 1252 = (126 + 125)(126 – 125) = 251 × 1।
स्वयं जाँचिए: 126 × 126 = 15876 और 15625 + 251 = 15876. ✓
प्र4.
441 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले वर्ग की भुजा की लंबाई ज्ञात कीजिए।
उत्तर

भुजा √441 है।

441 = 3 × 3 × 7 × 7
= (3 × 7) × (3 × 7) = 212
भुजा = 21 मीटर
अभाज्य गुणनखंडन यहाँ सबसे साफ़ रास्ता क्यों है: दोनों अभाज्य दो-दो बार आए हैं, अत: गुणनखंड 3 × 7 वाले दो समान समूहों में बँट जाते हैं। एक समूह का गुणनफल 21 ही वर्गमूल है। अनुमान से भी उत्तर मिल सकता था — 202 = 400 है और संख्या का अंत 1 पर है, अत: मूल का इकाई अंक 1 या 9 होगा, और इस परास में केवल 21 ही बचता है।
प्र5.
वह छोटी से छोटी वर्ग संख्या ज्ञात कीजिए जो 4, 9 और 10 से विभाजित होती हो।
उत्तर

पहले लघुत्तम समापवर्त्य लीजिए, फिर उसे वर्ग बनाइए।

4 = 22, 9 = 32, 10 = 2 × 5
ल.स. = 22 × 32 × 5 = 180
180 में अभाज्य 5 केवल एक बार आया है — विषम बार
5 से गुणा कीजिए: 180 × 5 = 900 = 22 × 32 × 52 = 302
अभीष्ट सबसे छोटी वर्ग संख्या = 900
900 ही सबसे छोटी क्यों है: 4, 9 और 10 से विभाजित होने वाली प्रत्येक संख्या उनके ल.स. 180 का गुणज होगी। 180 का जो गुणज वर्ग हो उसमें 180 का प्रत्येक अभाज्य सम बार आना चाहिए, अत: कम से कम एक और 5 चाहिए। ऐसा सबसे छोटा गुणज 180 × 5 = 900 है, और 900 = 302 वास्तव में 4, 9 तथा 10 से विभाजित होती है।
प्र6.
वह छोटी से छोटी संख्या ज्ञात कीजिए जिसे 9408 से गुणा करने पर पूर्ण वर्ग प्राप्त हो। प्राप्त गुणनफल का वर्गमूल भी ज्ञात कीजिए।
उत्तर

9408 का अभाज्य गुणनखंडन कीजिए और विषम घातांक वाला अभाज्य ढूँढ़िए।

9408 = 2 × 4704 = 2 × 2 × 2352 = 2 × 2 × 2 × 1176
= 2 × 2 × 2 × 2 × 588 = 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 294 = 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 147
147 = 3 × 49 = 3 × 7 × 7
अत: 9408 = 26 × 3 × 72

सभी 2 और दोनों 7 युग्म बना लेते हैं; केवल अकेला 3 बचता है। अत: 3 से गुणा कीजिए।

9408 × 3 = 28224 = 26 × 32 × 72
= (23 × 3 × 7)2 = 1682
√28224 = 168
3 ही सबसे छोटा गुणक क्यों है: प्रत्येक घातांक को सम बनाने के लिए विषम घातांक वाले हर अभाज्य को एक बार और देना पड़ता है। यहाँ ऐसा केवल अभाज्य 3 है, अत: सबसे छोटा गुणक 3 ही है; इससे छोटी कोई संख्या 3 को अकेला ही छोड़ देगी।
प्र7.
निम्नांकित संख्याओं के वर्गों के मध्य कितनी संख्याएँ हैं? (i) 16 और 17 (ii) 99 और 100
उत्तर

n2 और (n+1)2 के मध्य 2n संख्याएँ होती हैं।

(i) n = 16 → 2 × 16 = 32 संख्याएँ (257 से 288 तक, क्योंकि 162 = 256, 172 = 289)
(ii) n = 99 → 2 × 99 = 198 संख्याएँ (9802 से 9999 तक, क्योंकि 992 = 9801, 1002 = 10000)
ऐसा क्यों होता है: (n + 1)2 – n2 = 2n + 1 एक वर्ग से अगले वर्ग तक की पूरी छलाँग गिनता है। ऊपरी सिरे के वर्ग को हटा देने पर ठीक बीच की 2n संख्याएँ बचती हैं।
स्वयं जाँचिए: 289 – 256 – 1 = 32 और 10000 – 9801 – 1 = 198. ✓
प्र8.
निम्नलिखित प्रतिरूप में विलुप्त संख्या अंकित कीजिए। 1² + 2² + 2² = 3², 2² + 3² + 6² = 7², 3² + 4² + 12² = 13², 4² + 5² + 20² = (___)², 9² + 10² + (___)² = (___)²
उत्तर

पहले चौथी पंक्ति —

42 + 52 + 202 = 16 + 25 + 400 = 441 = 212

अब पूरी पंक्तियों से नियम पढ़िए। प्रत्येक पंक्ति में तीसरा आधार पहले दो आधारों का गुणनफल है और उत्तर उस गुणनफल से एक अधिक है।

nn + 1n(n + 1)n(n + 1) + 1
1223
2367
341213
452021
9109091
92 + 102 + 902 = 81 + 100 + 8100 = 8281 = 912
यह नियम क्यों सत्य है: मान लीजिए k = n(n + 1)। तब
n2 + (n+1)2 + k2 = n2 + n2 + 2n + 1 + k2 = 2n2 + 2n + 1 + k2 = 2k + 1 + k2 = (k + 1)2,
क्योंकि 2n2 + 2n = 2n(n + 1) = 2k। अत: यह सर्वसमिका केवल दी गई पंक्तियों के लिए नहीं, प्रत्येक n के लिए सत्य है।
प्र9.
निम्नांकित चित्र में छोटे वर्गों की संख्या कितनी हैं? छोटे वर्गों की संख्या का अभाज्य गुणनखंडन लिखिए।
उत्तर

दो चरणों में गिनिए — पहले खंड, फिर एक खंड के भीतर के छोटे वर्ग।

चित्र में खंडों की व्यवस्था 9 × 9 है → 81 खंड
प्रत्येक खंड (सीधा हो या तिरछा) 4 × 4 का जाल है → 16 छोटे वर्ग
कुल = 81 × 16 = 1296 छोटे वर्ग

अभाज्य गुणनखंडन —

81 = 34, 16 = 24
1296 = 24 × 34
= 2 × 2 × 2 × 2 × 3 × 3 × 3 × 3
उत्तर वर्ग क्यों निकला — और उससे भी अधिक: यहाँ प्रत्येक अभाज्य का घातांक सम है, अत: 1296 पूर्ण वर्ग है — 1296 = (22 × 32)2 = 362। दोनों घातांक 4 के गुणज भी हैं, अत: 1296 = 64 भी है — अर्थात वर्ग का वर्ग, जो चित्र सीधे दिखाता है — खंडों का एक वर्ग, और प्रत्येक खंड छोटे वर्गों का एक वर्ग।
संकेत: खंड को तिरछा कर देने से उसमें छोटे वर्गों की संख्या नहीं बदलती, अत: तिरछे खंड भी सीधे खंडों की तरह ही गिने जाते हैं।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ