गणित प्रकाश अध्याय 1 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
1 सेंटीमीटर भुजा वाले कितने घनों से 2 सेंटीमीटर भुजा वाला एक घन बनता है?
उत्तर

8 घन।

प्रत्येक परत में 2 × 2 = 4 इकाई घन
ऐसी 2 परतें हैं
कुल = 2 × 2 × 2 = 23 = 8
तीन बार गुणा क्यों करते हैं: घन की लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई तीनों बराबर होती हैं। उसे इकाई घनों से भरने का अर्थ है तीनों दिशाओं में 2-2 स्थान चुनना, अत: गिनती 2 × 2 × 2 होगी। यही कारण है कि n × n × n को 'n का घन' कहते हैं।
प्र2.
1 सेंटीमीटर भुजा वाले कितने घनों से 3 सेंटीमीटर भुजा वाला एक घन बनता है?
उत्तर

27 घन।

प्रत्येक परत में 3 × 3 = 9 इकाई घन
ऐसी 3 परतें हैं
कुल = 3 × 3 × 3 = 33 = 27
संकेत: भुजा दुगुनी करने पर इकाई घनों की संख्या दुगुनी नहीं, आठ गुनी हो जाती है, क्योंकि तीनों दिशाएँ दुगुनी होती हैं। भुजा 2 से 3 करने पर गिनती 8 से 27 हो जाती है, 8 से 12 नहीं।
प्र3.
ये संख्याएँ पूर्ण घन कहलाती हैं। क्या आप बता सकते हैं कि इन्हें ये नाम क्यों दिया गया?
उत्तर

क्योंकि इनमें से प्रत्येक बताती है कि किसी घन को भरने में कितने इकाई घन लगते हैं।

1 = 1 × 1 × 1 → भुजा 1 का घन
8 = 2 × 2 × 2 → भुजा 2 का घन
27 = 3 × 3 × 3 → भुजा 3 का घन
64 = 4 × 4 × 4 → भुजा 4 का घन
यह नाम कैसे आया: वर्गों के साथ भी ठीक यही हुआ था — 1, 4, 9, 16 को वर्ग इसलिए कहते हैं क्योंकि वे किसी वर्ग में इकाई वर्गों की संख्या बताते हैं। यहाँ ठोस आकृति ने संख्या को अपना नाम दे दिया। संस्कृत में भी यही चुनाव हुआ — घन शब्द ठोस घन और तीसरी घात दोनों के लिए प्रयुक्त होता था।
प्र4.
क्या 9 एक पूर्ण घन है?
उत्तर

नहीं।

2 × 2 × 2 = 8
3 × 3 × 3 = 27
9, 8 और 27 के बीच है और 2 तथा 3 के बीच कोई पूर्ण संख्या नहीं है

अत: 9 पूर्ण घन नहीं है — और न ही 10 से 26 तक की कोई संख्या।

यह अंतराल इतना बड़ा क्यों है: घन, वर्गों की तुलना में बहुत तेज़ी से बढ़ते हैं। 8 और 27 के बीच कोई और घन इसलिए नहीं है क्योंकि 2 और 3 के बीच कोई पूर्ण संख्या नहीं है। यही कारण है कि पूर्ण घन, पूर्ण वर्गों से कहीं अधिक विरल हैं — 100 तक दस वर्ग हैं पर केवल चार घन (1, 8, 27, 64)।
प्र5.
क्या आप 4 इकाई की भुजा वाले घन में इकाई घनों की संख्या का अनुमान लगा सकते हैं?
उत्तर

64 इकाई घन।

प्रत्येक वर्गाकार परत में 4 × 4 = 16 इकाई घन
ऐसी 4 परतें हैं
कुल = 16 × 4 = 4 × 4 × 4 = 43 = 64
संकेत: परतों में सोचना आगे भी काम आएगा। यह त्रिविमीय गिनती को 'एक परत का क्षेत्रफल × परतों की संख्या' में बदल देता है — आयतन इसी प्रकार मापा जाता है।
प्र6.
नीचे दी गई तालिका को पूर्ण कीजिए। 1³ = 1, 11³ = 1331, 2³ = 8, 12³ = , 3³ = 27, 13³ = 2197, 4³ = 64, 14³ = 2744, 5³ = 125, 15³ = , 6³ = , 16³ = , 7³ = , 17³ = 4913, 8³ = , 18³ = 5832, 9³ = , 19³ = 6859, 10³ = , 20³ = . उपर्युक्त तालिका में आप क्या प्रतिरूप देखते हैं?
उत्तर

घनों की पूरी तालिका —

13 =1113 =1331
23 =8123 =1728
33 =27133 =2197
43 =64143 =2744
53 =125153 =3375
63 =216163 =4096
73 =343173 =4913
83 =512183 =5832
93 =729193 =6859
103 =1000203 =8000

तालिका में दिखने वाले प्रतिरूप —

  • सम-विषम बना रहता है। विषम संख्या का घन विषम और सम संख्या का घन सम होता है।
  • सभी इकाई अंक आते हैं। वर्गों के विपरीत घनों का अंत दसों अंकों पर होता है — 1 से 10 तक के आधारों के लिए 1, 8, 7, 4, 5, 6, 3, 2, 9, 0।
  • इकाई अंक से आधार का अंक तय। घन का अंत 8 पर हो तो आधार का अंत 2 पर; 7 पर हो तो 3 पर; 3 पर हो तो 7 पर; 2 पर हो तो 8 पर। अंक 0, 1, 4, 5, 6, 9 अपने स्थान पर ही रहते हैं।
  • शून्य तिगुने होते हैं। 103 = 1000, 203 = 8000 — संख्या के अंत का एक शून्य घन में तीन शून्य बन जाता है।
  • घन विरल हैं। 8000 तक केवल 20 घन हैं, जबकि उतने ही परास में 89 वर्ग हैं।
सभी अंक क्यों आते हैं: 0 से 9 तक के अंकों के घन हैं 0, 1, 8, 27, 64, 125, 216, 343, 512, 729, जिनके अंतिम अंक हैं 0, 1, 8, 7, 4, 5, 6, 3, 2, 9 — दसों अंक, प्रत्येक ठीक एक बार। अत: घन का अंतिम अंक उसके घनमूल का इकाई अंक निश्चित रूप से बता देता है — वर्गों में ऐसा नहीं होता।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ