प्र1.
आगे बढ़ते हुए इस श्रेणी में हमें क्रमागत विषम संख्याओं का निम्नलिखित योग प्राप्त होता है — 91 + 93 + 95 + 97 + 99 + 101 + 103 + 105 + 107 + 109. क्या आप गणना किए बिना ज्ञात कर सकते हैं कि उपर्युक्त का योगफल कितना है?
उत्तर
1000, अर्थात 103।
पदों की गिनती: 91, 93, …, 109 → 10 क्रमागत विषम संख्याएँ
प्रतिरूप में n क्रमागत विषम संख्याओं का योग n3 होता है
अत: योग = 103 = 1000
प्रतिरूप में n क्रमागत विषम संख्याओं का योग n3 होता है
अत: योग = 103 = 1000
यह क्यों चलता है: पंक्तियों में क्रमश: 1, फिर 2, फिर 3, … क्रमागत विषम संख्याएँ ली गई हैं और उनके योग 13, 23, 33, … हैं। अत: 10 संख्याओं की पंक्ति का योग 103 ही होगा। बीच से भी देख सकते हैं — पद जोड़े बनाते हैं: 91 + 109 = 200, 93 + 107 = 200, इस प्रकार 200 के पाँच जोड़े, अर्थात 5 × 200 = 1000।
संकेत: प्रत्येक पंक्ति वहीं से आरंभ होती है जहाँ पिछली समाप्त हुई थी, अत: पंक्तियाँ कहीं भी नहीं दोहराती। इसीलिए n तक की सभी पंक्तियों को जोड़ने पर 13 + 23 + … + n3 विषम संख्याओं के एक अखंड खंड के रूप में मिल जाता है।