गणित प्रकाश अध्याय 2 आइए, पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
2²²⁴ ÷ 4³² के मान में इकाई अंक को ज्ञात कीजिए? [संकेत — 4 = 2²]
उत्तर

इकाई अंक 6 है।

432 = (22)32 = 264

2224 ÷ 432 = 2224 ÷ 264
= 2224–64
= 2160

अब 2 की घातों के इकाई अंक देखिए। ये चार का चक्र बनाकर दोहराते हैं:

घात2122232425262728
मान248163264128256
इकाई अंक24862486
160 ÷ 4 = 40, शेषफल 0
शेषफल 0 का अर्थ है कि हम चक्र के अंत पर हैं, अर्थात 24 वाले स्थान पर
2160 का इकाई अंक = 6
ऐसा क्यों होता है: किसी गुणनफल का इकाई अंक केवल गुणनखंडों के इकाई अंकों पर निर्भर करता है, अतः 2 से गुणा करते रहने पर 2 → 4 → 8 → 6 → 2 चलता है और इन चारों से बाहर कभी नहीं जा सकता। चक्र की लंबाई 4 होने के कारण घातांक केवल 4 से भाग देने पर आए शेषफल के रूप में मायने रखता है। इसीलिए 49 अंकों की संख्या के विषय में उत्तर बिना उसे लिखे ही दिया जा सकता है।
प्र2.
एक बक्से में 5 बोतलें हैं। प्रत्येक दिन एक नया बक्सा लाया जाता है। 40 दिन के पश्चात वहाँ कितनी बोतलें होंगी?
उत्तर

200 बोतलें = 2 × 102

प्रतिदिन जुड़ने वाली बोतलें = 5
दिन = 40
कुल = 5 × 40 = 200 = 2 × 102
ऐसा क्यों होता है: यह प्रश्न यहाँ जान-बूझकर विरोधाभास दिखाने के लिए रखा गया है। यहाँ कुछ भी दोगुना या तिगुना नहीं हो रहा — प्रतिदिन वही 5 बोतलें आती हैं, अतः कुल संख्या जुड़ती है और वृद्धि रैखिक है। 40 दिन बाद 200 बोतलें होंगी, 540 नहीं। जादुई तालाब से तुलना कीजिए, जहाँ 40 दिन दोगुना होने पर 240 ≈ 1.1 × 1012 कमल होते। घातांक उठाने से पहले स्थिति को पढ़ लीजिए।
स्वयं जाँचिए: "प्रतिदिन 5 बोतलें" 5 × n है। "प्रतिदिन 5 गुनी" 5n होता। एक शब्द उत्तर को 200 से बदलकर 28 अंकों की संख्या बना देता है।
प्र3.
नीचे दी गई संख्या को दो या दो से अधिक घातों के गुणनफल के रूप में तीन भिन्न-भिन्न प्रकारों से लिखिए। घातें कोई भी पूर्णांक हो सकती हैं। (i) 64³ (ii) 192⁸ (iii) 32⁻⁵
उत्तर

पहले प्रत्येक संख्या को अभाज्य घातों में लाइए; उसके बाद घातांकों का कोई भी विभाजन काम करेगा।

(i) 643 : 64 = 26, अतः 643 = (26)3 = 218
210 × 28
45 × 44 (क्योंकि 49 = 218)
83 × 83 (क्योंकि 86 = 218)
(ii) 1928 : 192 = 26 × 3, अतः 1928 = 248 × 38
248 × 38
240 × 28 × 38
240 × 68 (क्योंकि 28 × 38 = 68)
(iii) 32–5 : 32 = 25, अतः 32–5 = (25)–5 = 2–25
2–10 × 2–15
2–5 × 2–20
4–12 × 2–1 (क्योंकि 4–12 = 2–24)
ऐसा क्यों होता है: एक बार संख्या किसी एक अभाज्य की घात बन जाए, तो उस घातांक को योग के रूप में लिखने का हर तरीका एक नया गुणनखंडन दे देता है — और तरीके असीमित हैं, क्योंकि भाग ऋणात्मक भी हो सकते हैं। (iii) में घातांकों का योग –25 होना चाहिए, अतः 2–30 × 25 भी उतना ही ठीक है। जाँच सदैव यही है: क्या प्रत्येक अभाज्य के घातांक ठीक-ठीक जुड़ रहे हैं?
प्र4.
नीचे दिए गए प्रत्येक कथन की जाँच कीजिए और पता लगाइए कि ‘यह सदैव सत्य है’, ‘कभी-कभी सत्य है’ या ‘कभी सत्य नहीं है’। अपने तर्क की व्याख्या कीजिए। (i) घन संख्याएँ भी वर्ग संख्याएँ होती हैं। (ii) चतुर्थ घात वर्ग संख्याएँ भी होती हैं। (iii) किसी संख्या की पाँचवी घात उस संख्या के घन से विभाज्य होती है। (iv) दो घन संख्याओं का गुणनफल एक घन संख्या होती है। (v) q⁴⁶ एक चतुर्थ घात और एक छठी घात दोनों है (q एक अभाज्य संख्या है)।
उत्तर
निर्णयतर्क
(i)कभी-कभी सत्य है8 = 23 घन है पर वर्ग नहीं। 64 = 43 = 82 दोनों है। कोई संख्या दोनों तभी होती है जब वह छठी घात हो: n6 = (n2)3 = (n3)2
(ii)सदैव सत्य हैn4 = (n2)2, अतः प्रत्येक चतुर्थ घात n2 का वर्ग है। 4 सम है, इतना ही पर्याप्त है।
(iii)सदैव सत्य हैn5 ÷ n3 = n5–3 = n2, जो एक पूर्ण संख्या है। (n = 0 पर दोनों 0 हैं, अतः कथन n ≠ 0 के लिए कहा जाता है।)
(iv)सदैव सत्य हैनियम ma × na = (mn)a से a3 × b3 = (ab)3। जैसे 8 × 27 = 216 = 63
(v)कभी सत्य नहीं हैq अभाज्य है, अतः q46 चतुर्थ घात तभी होगी जब 4, 46 को विभाजित करे, और छठी घात तभी जब 6, 46 को विभाजित करे। 46 = 4 × 11 + 2 और 46 = 6 × 7 + 4 — दोनों में से कोई विभाजित नहीं करता। अतः यह इनमें से एक भी नहीं है, दोनों तो दूर की बात।
ऐसा क्यों होता है: इनमें से हर कथन वास्तव में घातांक के विषय में है। "वर्ग है" का अर्थ है घातांक 2 का गुणज; "घन है" का अर्थ 3 का गुणज; "दोनों है" का अर्थ 6 का गुणज। एक बार प्रश्न को घातांकों की विभाज्यता में बदल लेने पर उत्तर बिना किसी बड़ी गणना के मिल जाते हैं। भाग (v) में q का अभाज्य होना आवश्यक है, क्योंकि q = 4 जैसे भाज्य आधार के लिए 446 = 292 चतुर्थ घात हो ही जाती है।
प्र5.
इन्हें सरल कीजिए और घातांकीय रूप में लिखिए। (i) 10⁻² × 10⁻⁵ (ii) 5⁷ ÷ 5⁴ (iii) 9⁻⁷ ÷ 9⁴ (iv) (13⁻²)⁻³ (v) m⁵n¹²(mn)⁹
उत्तर
(i) 10–2 × 10–5 = 10–2+(–5) = 10–7 ( = 1/107)

(ii) 57 ÷ 54 = 57–4 = 53 ( = 125)

(iii) 9–7 ÷ 94 = 9–7–4 = 9–11 ( = 1/911)

(iv) (13–2)–3 = 13(–2)×(–3) = 136

भाग (v) में दो आधार हैं, अतः दोनों को अलग-अलग सँभालिए।

(v) m5n12(mn)9
= m5n12 × m9n9 (क्योंकि (mn)9 = m9n9)
= (m5 × m9) × (n12 × n9)
= m14n21
ऐसा क्यों होता है: (iii) पर विशेष ध्यान दीजिए। 94 से भाग देने पर 4 घटता है, अतः –7 – 4 = –11 — यहाँ गलती से –3 लिख देना बहुत आसान है। (iv) दिखाता है कि दो ऋण चिह्न मिलकर धनात्मक घातांक देते हैं, ठीक वैसे ही जैसे साधारण पूर्णांकों में (–2) × (–3) = 6; यह संयोग नहीं है, क्योंकि घात की घात वाला नियम घातांकों को साधारण गुणा में बदल देता है।
प्र6.
यदि 12² = 144 तो निम्न का मान क्या है? (i) (1.2)² (ii) (0.12)² (iii) (0.012)² (iv) 120²
उत्तर

प्रत्येक संख्या को 12 गुणा 10 की किसी घात के रूप में लिखिए, फिर दोनों भागों का वर्ग कीजिए।

(i) 1.2 = 12 × 10–1
(1.2)2 = 122 × 10–2 = 144 × 0.01 = 1.44

(ii) 0.12 = 12 × 10–2
(0.12)2 = 144 × 10–4 = 0.0144

(iii) 0.012 = 12 × 10–3
(0.012)2 = 144 × 10–6 = 0.000144

(iv) 120 = 12 × 101
1202 = 144 × 102 = 14400
संख्यादशमलव स्थानवर्गवर्ग में दशमलव स्थान
1.211.442
0.1220.01444
0.01230.0001446
ऐसा क्यों होता है: अंक 144 कभी नहीं बदलते, केवल दशमलव बिंदु का स्थान बदलता है — क्योंकि बिंदु खिसकाना 10 की किसी घात से गुणा करना है और वर्ग करने पर उस घात का घातांक बस दोगुना हो जाता है। इसी से तालिका में दिखता यह सुंदर नियम मिलता है: वर्ग करने पर दशमलव स्थान दोगुने हो जाते हैं
प्र7.
समान संख्याओं पर घेरा लगाइए। 2⁴ × 3⁶ 6⁴ × 3² 6¹⁰ 18² × 6² 6²⁴
उत्तर

प्रत्येक व्यंजक को अभाज्य 2 और 3 की घातों में लाइए।

व्यंजकअभाज्यों मेंमान
24 × 3624 × 3616 × 729 = 11664
64 × 32(2×3)4 × 32 = 24 × 34+2 = 24 × 361296 × 9 = 11664
610210 × 3106,04,66,176
182 × 62(2×32)2 × (2×3)2 = 22+2 × 34+2 = 24 × 36324 × 36 = 11664
624224 × 324लगभग 4.7 × 1018

अतः समान तीन हैं — 24 × 36, 64 × 32 और 182 × 62, प्रत्येक का मान 11664।

ऐसा क्यों होता है: दो संख्याएँ ठीक तभी बराबर होती हैं जब उनके अभाज्य गुणनखंडन मिलते हों, अतः सब कुछ 2 और 3 में बदल देने से पूरी तुलना केवल घातांकों के दो युग्म जाँचने में सिमट जाती है। 624 का मान निकालने की आवश्यकता ही नहीं — उसके घातांक (24, 24) स्पष्टतः (4, 6) से भिन्न हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है: 11664 = 1082, क्योंकि 24 × 36 = (22 × 33)2
प्र8.
निम्नलिखित विकल्पों में से प्रत्येक बड़ी संख्या को पहचानिए। (i) 4³ या 3⁴ (ii) 2⁸ या 8² (iii) 100² या 2¹⁰⁰
उत्तर
(i) 43 = 64 और 34 = 81 → 34 बड़ी है

(ii) 28 = 256 और 82 = 64 → 28 बड़ी है

(iii) 1002 = 10,000 = 104
2100 = (210)10 ≈ (103)10 = 1030
2100 बड़ी है, लगभग 1026 गुना

2100 का सटीक मान 1,267,650,600,228,229,401,496,703,205,376 है — लगभग 1.27 × 1030

ऐसा क्यों होता है: जब आधार और घातांक की अदला-बदली की जाती है तब प्रायः बड़ा घातांक जीतता है, क्योंकि घातांक यह नियंत्रित करता है कि गुणा कितनी बार होगा। 28, 82 को सरलता से हरा देता है और 2100, 1002 को मिटा ही देता है। यह केवल सबसे छोटी संख्याओं में विफल होता है: 23 = 8, 32 = 9 से कम है और 24 = 42 ठीक बराबर हैं।
संकेत: भाग (iii) के लिए 31 अंकों की संख्या की आवश्यकता ही नहीं। 210 = 1024 ≈ 103 से 2 की किसी भी घात का एक ही चरण में आकलन हो जाता है — यह आदत बनाए रखने योग्य है।
प्र9.
एक डेयरी एक वर्ष में दूध के 8.5 अरब पैकेट के उत्पादन की योजना बनाती है। वह प्रत्येक पैकेट पर एक विशिष्ट पहचान कोड (आई.डी.) दर्शाना चाहती है। यदि वह इसके लिए 0 से 9 तक के अंकों का उपयोग करती है तो बताइए कि कोड कितने अंकों का होना चाहिए?
उत्तर

10 अंकों का।

एक वर्ष के पैकेट = 8.5 अरब = 8.5 × 109 = 8,50,00,00,000
प्रत्येक खाँचे में 10 अंकों में से एक आता है, अतः n अंकों का कोड 10n भिन्न कोड देता है

चाहिए 10n ≥ 8.5 × 109
109 = 1 × 109 < 8.5 × 109 — पर्याप्त नहीं
1010 = 10 × 109 > 8.5 × 109 — पर्याप्त
अतः n = 10

10 अंकों का कोड 850 करोड़ पैकेटों के लिए 1000 करोड़ कोड देता है — आवश्यकता से काफी अधिक, कुछ गुंजाइश के साथ।

ऐसा क्यों होता है: उत्तर पूर्ण संख्या ही होना चाहिए, अतः प्रश्न वास्तव में यह है कि "वह सबसे छोटा n क्या है जिसके लिए 10n ≥ 8.5 × 109 हो?" नौ अंक 8.5 के गुणक से कम पड़ते हैं और साढ़े नौ अंकों का कोड जैसी कोई चीज होती नहीं — अतः ऊपर की ओर पूर्णांकित करना पड़ता है। यह भी देखिए कि एक अतिरिक्त अंक कितना सस्ता है: एक और खाँचा, और क्षमता दस गुनी।
प्र10.
64 एक वर्ग संख्या (8²) और एक घन संख्या (4³) है। क्या ऐसी और भी संख्याएँ हैं जो वर्ग और घन दोनों हों? क्या ऐसी संख्याओं को ज्ञात करने की कोई सामान्य विधि है?
उत्तर

हाँ — असीमित रूप से बहुत। वे ठीक-ठीक छठी घातें n6 हैं।

n6 = (n3)2 → एक वर्ग (n3 का)
n6 = (n2)3 → एक घन (n2 का)
nn6वर्ग के रूप मेंघन के रूप में
111213
2648243
372927293
44096642163
5156251252253
ऐसा क्यों होता है: कोई संख्या वर्ग तब होती है जब उसके अभाज्य गुणनखंडन का प्रत्येक घातांक 2 का गुणज हो, और घन तब जब प्रत्येक घातांक 3 का गुणज हो। दोनों होने के लिए प्रत्येक घातांक 2 और 3 दोनों का गुणज होना चाहिए, अर्थात उनके ल.स. 6 का। अतः दोनों होने वाली संख्याएँ ठीक छठी घातें हैं, और चूँकि प्रत्येक n के लिए एक n6 है, ऐसी संख्याएँ असीमित हैं।
प्रयास कीजिए: कौन-सी संख्याएँ एक साथ वर्ग, घन और चतुर्थ घात होती हैं? 2, 3 और 4 का ल.स. 12 है, अतः वे बारहवीं घातें हैं: 1, 4096, 5,31,441, …
प्र11.
एक डिजिटल लॉकर का 5 अक्षरांकीय (एल्फान्यूमेरिक) वाला (इसमें अंक एवं अक्षर दोनों हो सकते हैं) गुप्त संकेत है जिसकी लंबाई 5 है। गुप्त संकेत (पासकोड) के कुछ उदाहरण G89PO, 38098, BRJKW और 003AZ हैं। इस प्रकार के कितने गुप्त संकेत संभव हैं?
उत्तर

365 = 6,04,66,176 — लगभग 6 करोड़ अर्थात 6.05 × 107

उपलब्ध चिह्न = 26 अक्षर + 10 अंक = 36
खाँचे = 5, प्रत्येक स्वतंत्र रूप से भरा जाता है

कुल संकेत = 36 × 36 × 36 × 36 × 36 = 365
362 = 1296
364 = 12962 = 16,79,616
365 = 16,79,616 × 36 = 6,04,66,176

तुलना कीजिए: केवल अंकों वाला 5 अंकीय संकेत मात्र 105 = 1,00,000 देता है। अक्षर भी जोड़ देने से लॉकर लगभग 600 गुना कठिन हो जाता है।

ऐसा क्यों होता है: प्रश्न के उदाहरण यह पुष्टि करते हैं कि अंक दोहराए जा सकते हैं (38098 में 8 दो बार है) और किसी भी प्रकार का मिश्रण चलता है, अतः प्रत्येक खाँचे में वास्तव में स्वतंत्र रूप से पूरे 36 विकल्प हैं। यही स्वतंत्रता गुणा करने की अनुमति देती है। यदि, मान लीजिए, पहला चिह्न अक्षर ही होना अनिवार्य होता तो गिनती घटकर 26 × 364 = 4,36,70,016 रह जाती।
प्र12.
वर्ष 2024 में संपूर्ण विश्व में भेड़ों की संख्या लगभग 10⁹ थी और बकरियों की संख्या भी लगभग भेड़ों के समान ही थी। बताइए कि भेड़ों और बकरियों की कुल संख्या कितनी है? (i) 20⁹ (ii) 10¹¹ (iii) 10¹⁰ (iv) 10¹⁸ (v) 2 × 10⁹ (vi) 10⁹ + 10⁹
उत्तर

(vi) 109 + 109 — और यह (v) 2 × 109 के बराबर है, अतः दोनों ही सही कुल संख्या दर्शाते हैं।

कुल = भेड़ + बकरियाँ = 109 + 109
= 2 × 109
= 2,00,00,00,000 (200 करोड़ / 2 बिलियन)

शेष विकल्प क्यों गलत हैं:

  • 209 में आधार को गलती से दोगुना कर दिया गया है। 209 = 29 × 109 = 512 × 109 — 512 गुना अधिक।
  • 1010 और 1011 में घातांक गलती से बढ़ा दिया गया है। जोड़ने से घातांक बदलता नहीं; 1010 सही उत्तर का 5 गुना है।
  • 1018 दोनों संख्याओं को जोड़ने के बजाय गुणा करने से आता है — वह 109 × 109 होगा और बिलकुल दूसरे प्रश्न का उत्तर है।
ऐसा क्यों होता है: यह वही चूक है जिसकी ओर पूरा अध्याय संकेत करता आ रहा है। घातांक के नियम गुणा और भाग के नियम हैं; घातों को जोड़ने का कोई नियम है ही नहीं। जोड़ने के लिए उभयनिष्ठ घात बाहर निकालनी पड़ती है: 109 + 109 = (1 + 1) × 109 = 2 × 109। उत्तर नए गुणांक वाली संख्या है, नए घातांक वाली नहीं।
स्वयं जाँचिए: विकल्प (v) और (vi) एक ही संख्या के दो रूप हैं, अतः दोनों सही हैं — पुस्तक (vi) पर घेरा लगाती है, जो यह भी दिखाता है कि कुल संख्या आई कहाँ से।
प्र13.
गणना कीजिए और अपने उत्तर को वैज्ञानिक संकेतन में लिखिए। (i) यदि विश्व में प्रत्येक व्यक्ति के पास 30 वस्त्र हों तो वस्त्रों की कुल संख्या ज्ञात कीजिए? (ii) विश्व में लगभग 100 मिलियन मधुमक्खियों के छत्ते हैं। यदि प्रत्येक छत्ते में 50,000 मधुमक्खियाँ हो तो मधुमक्खियों की कुल संख्या ज्ञात कीजिए। (iii) मानव शरीर में लगभग 38 ट्रिलियन (380 खरब) जीवाणु कोशिकाएँ होती हैं। विश्व के सभी मानवों के शरीर में रहने वाले जीवाणुओं की संख्या ज्ञात कीजिए। (iv) संपूर्ण जीवनकाल में खाने में व्यतीत किया गया कुल समय सेकंडों में ज्ञात कीजिए।
उत्तर
(i) विश्व जनसंख्या ≈ 8.2 × 109, प्रति व्यक्ति वस्त्र = 30 = 3 × 101
कुल = (8.2 × 109) × (3 × 101)
= 24.6 × 1010
= 2.46 × 1011 वस्त्र
(ii) छत्ते = 100 मिलियन = 108, प्रति छत्ता मधुमक्खियाँ = 50,000 = 5 × 104
कुल = 108 × 5 × 104
= 5 × 1012 मधुमक्खियाँ
(iii) प्रति व्यक्ति जीवाणु = 38 ट्रिलियन = 3.8 × 1013
व्यक्ति ≈ 8.2 × 109
कुल = (3.8 × 1013) × (8.2 × 109)
= 31.16 × 1022
= 3.116 × 1023 जीवाणु कोशिकाएँ
(iv) मान लीजिए जीवनकाल 70 वर्ष और खाने में प्रतिदिन 1 घंटा
1 घंटा = 3600 सेकंड
कुल = 3600 × 365 × 70
= 3600 × 25,550
= 9,19,80,000 सेकंड
= 9.198 × 107 सेकंड (लगभग 2.9 वर्ष)
ऐसा क्यों होता है: (i) और (iii) दोनों में अंत में समायोजन करना पड़ा — 24.6 × 1010 और 31.16 × 1022 सही मान हैं पर मानक रूप नहीं, क्योंकि गुणांक 10 से कम रहना चाहिए। (iv) का स्वरूप ही अलग है: इसमें कोई आँकड़ा नहीं, केवल धारणाएँ हैं, अतः ईमानदार उत्तर है "लगभग 108 सेकंड", और जो प्रतिदिन 2 घंटे मानेगा उसे 1.8 × 108 मिलेगा और वह भी उतना ही ठीक होगा।
क्या आप जानते हैं? भाग (iii) कहता है कि विश्व के मनुष्यों के शरीरों में रहने वाले जीवाणुओं की संख्या हमारी आकाशगंगा के तारों से कहीं अधिक है — 3 × 1023 बनाम लगभग 1011
प्र14.
आज से 1 बिलियन या 1 अरब सेकंड पूर्व क्या दिनांक थी?
उत्तर

सेकंडों को दिनों में और फिर वर्षों में बदलिए।

1 बिलियन = 1 अरब = 109 सेकंड
1 दिन = 86,400 सेकंड = 8.64 × 104 सेकंड

दिन = 109 ÷ (8.64 × 104)
= 0.11574 × 105
= 11,574 दिन

वर्ष = 11,574 ÷ 365.25
= लगभग 31.7 वर्ष (31 वर्ष और लगभग साढ़े आठ मास)

अतः आज की तिथि में से 31 वर्ष तथा लगभग 8 मास 20 दिन घटा दीजिए। 31 अगस्त 2026 से गणना करने पर एक बिलियन सेकंड पूर्व की तिथि 23 दिसंबर 1994 आती है। अपनी तिथि से गणना कीजिए, आप लगभग 31 वर्ष 8 मास पहले उसी ऋतु में पहुँचेंगे।

ऐसा क्यों होता है: उत्तर चौंकाता है क्योंकि एक बिलियन एक संख्या लगती है और 31 वर्ष जीवन का एक पड़ाव — फिर भी दोनों एक ही राशि हैं, केवल एक बहुत छोटे मात्रक से देखी गई। यही इस अध्याय की अंतिम सीख है: 10 की किसी घात का अपने आप में कोई अर्थ नहीं, अर्थ तभी बनता है जब वह किसी मात्रक से जुड़े और किसी परिचित राशि से तुलना की जाए।
स्वयं जाँचिए: दस लाख सेकंड पूर्व एक पखवाड़े से भी कम समय पहले था; एक बिलियन सेकंड पूर्व आपका जन्म भी नहीं हुआ था; एक ट्रिलियन सेकंड पूर्व (1012 सेकंड ≈ 31,700 वर्ष) हिमयुग अपने चरम पर भी नहीं पहुँचा था।
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