प्र1.
प्रत्येक नाम का पहला भाग क्या दर्शाता है? [मिलियन (10⁶), बिलियन (10⁹), ट्रिलियन (10¹²), क्वाड्रिलियन (10¹⁵), क्विनटिलियन (10¹⁸), सेक्सटिलियन (10²¹), सेप्टीलियन (10²⁴), ओक्टिलियन (10²⁷), नोनिलियन (10³⁰), डेकिलियन (10³³)]
उत्तर
यह एक गिनती-शब्द है और बताता है कि 1000 में 1000 को कितनी बार गुणा किया गया है।
| नाम | पहले भाग का अर्थ | कैसे बना | मान |
|---|---|---|---|
| मिलियन | 1 (लैटिन मिल्ले = हजार) | 1000 × 1000 | 106 |
| बिलियन | बाइ = 2 | 1000 × 10002 | 109 |
| ट्रिलियन | ट्राइ = 3 | 1000 × 10003 | 1012 |
| क्वाड्रिलियन | क्वाड्रि = 4 | 1000 × 10004 | 1015 |
| क्विनटिलियन | क्विन्ट = 5 | 1000 × 10005 | 1018 |
| डेकिलियन | डेक = 10 | 1000 × 100010 | 1033 |
यदि पहला भाग k दर्शाता हो, तो नाम का मान 1000 × 1000k = 103 × 103k = 103k+3
जाँच: k = 3 (ट्रिलियन) से 109+3 = 1012 ✓
जाँच: k = 3 (ट्रिलियन) से 109+3 = 1012 ✓
ऐसा क्यों होता है: यह पूरा परिवार एक ही नियम से बनता है — प्रत्येक नाम पिछले नाम का 1000 गुना है, अतः घातांक 3-3 के चरणों में बढ़ते हैं। भारतीय नाम भी इसी प्रकार बनते हैं, पर 100-100 के चरणों में: लाख 105, करोड़ 107, अरब 109, खरब 1011, नील 1013, पद्म 1015, शंख 1017, महाशंख 1019 — यहाँ घातांक 2-2 बढ़ते हैं।
क्या आप जानते हैं? प्रथम शताब्दी सामान्य संवत् पूर्व के ललितविस्तर में गणितज्ञ अर्जुन 10 की विषम घातों के नाम तल्लाक्षण अर्थात 1053 तक गिनाते हैं। कच्चायन का पाली व्याकरण ग्रंथ 10140 तक जाता है, जिसका नाम असंख्येय है।