प्र1.
इन संख्याओं को उपर्युक्त विधि से लिखिए — (i) 172 (ii) 5642 (iii) 6374
उत्तर
प्रत्येक अंक को उसके स्थान की 10 की घात से गुणा किया जाता है। इकाई का स्थान 100 = 1 है।
(i) 172 = (1 × 100) + (7 × 10) + 2
= (1 × 102) + (7 × 101) + (2 × 100)
= (1 × 102) + (7 × 101) + (2 × 100)
(ii) 5642 = (5 × 1000) + (6 × 100) + (4 × 10) + 2
= (5 × 103) + (6 × 102) + (4 × 101) + (2 × 100)
= (5 × 103) + (6 × 102) + (4 × 101) + (2 × 100)
(iii) 6374 = (6 × 1000) + (3 × 100) + (7 × 10) + 4
= (6 × 103) + (3 × 102) + (7 × 101) + (4 × 100)
= (6 × 103) + (3 × 102) + (7 × 101) + (4 × 100)
ऐसा क्यों होता है: हमारे अंक 10 पर आधारित स्थानीय मान पद्धति हैं, अतः विस्तारित रूप वास्तव में 10 की घातों का योग है। दाएँ से बाएँ पढ़ने पर घातांक 0, 1, 2, 3, … चलते हैं — और इसीलिए इकाई के स्थान के लिए 100 = 1 चाहिए। n0 = 1 की परिपाटी न हो तो प्रतिरूप अंतिम अंक पर ही टूट जाता।