गणित प्रकाश अध्याय 2 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
बताइए कि दान किए गए गुड़ का मूल्य (रुपयों में) क्या होगा? दान किए गए गेहूँ का मूल्य (रुपयों में) क्या होगा?
उत्तर

पहले संबंध लिखिए, फिर उनमें संख्याएँ रखिए।

गुड़ की कीमत (₹) = रॉक्सी का भार (किलोग्राम में) × 1 किलोग्राम गुड़ का मूल्य
गेहूँ की कीमत (₹) = एस्तु का भार (किलोग्राम में) × 1 किलोग्राम गेहूँ का मूल्य

चारों अज्ञात मानों का अनुमान लगाए बिना कुछ भी गणना नहीं हो सकती। 13 वर्ष और 11 वर्ष की आयु तथा वर्तमान कीमतों के लिए तार्किक धारणाएँ:

रॉक्सी ≈ 45 किलोग्राम, गुड़ ≈ ₹70 प्रति किलोग्राम
गुड़ का मूल्य = 45 × 70 = ₹3150

एस्तु ≈ 50 किलोग्राम, गेहूँ ≈ ₹50 प्रति किलोग्राम
गेहूँ का मूल्य = 50 × 50 = ₹2500
ऐसा क्यों होता है: यहाँ गणित केवल एक गुणा है; असली काम प्रतिरूपण है — यह तय करना कि कौन-सी राशियाँ महत्त्वपूर्ण हैं और उनमें क्या संबंध है। संबंध लिख लेने के बाद अज्ञात मानों का अनुमान लगाया जा सकता है और उत्तर स्वतः निकल आता है। आपके आँकड़े इनसे भिन्न हो सकते हैं और फिर भी पूर्णतः सही रहेंगे, बशर्ते धारणाएँ तार्किक हों और स्पष्ट लिखी गई हों।
प्र2.
ज्ञात करने के लिए आवश्यक और तार्किक धारणाएँ बनाइए और उत्तर ज्ञात कीजिए। याद रखिए रॉक्सी की आयु 13 वर्ष और एस्तु की आयु 11 वर्ष है।
उत्तर

प्रत्येक धारणा लिखिए, फिर गणना कीजिए। एक पूरा उदाहरण नीचे है।

अज्ञातधारणाकारण
रॉक्सी का भार (13 वर्ष)45 किलोग्रामइस आयु के लिए सामान्य
एस्तु का भार (11 वर्ष)50 किलोग्रामपुस्तक का अपना आँकड़ा
गुड़₹70 / किलोग्रामस्थानीय बाजार भाव
गेहूँ₹50 / किलोग्रामस्थानीय बाजार भाव
गुड़: 45 × 70 = ₹3150
गेहूँ: 50 × 50 = ₹2500
दोनों मिलाकर ≈ ₹5650, अर्थात लगभग ₹5.7 × 103
ऐसा क्यों होता है: उत्तर उतना ही अच्छा है जितनी धारणाएँ, अतः परिणाम भी उसी सटीकता से बताइए जितनी धारणाएँ सहन कर सकें — "लगभग ₹5000–6000" ईमानदार उत्तर है, "₹5650.00" ऐसी सटीकता का दावा है जो किसी के पास नहीं। यह वही विचार है जो वैज्ञानिक संकेतन के गुणांक में है: आप कितने अंक लिखते हैं, यह इस पर निर्भर करता है कि आप संख्या को कितना जानते हैं।
प्र3.
रॉक्सी विचार करती है, “यदि हम गुड़ के स्थान पर 1 रुपए के सिक्के प्रयोग करें तो मेरे भार के समान कितने सिक्कों की आवश्यकता होगी?” बताइए हम यह किस प्रकार ज्ञात कर सकते हैं?
उत्तर

पहले राशियों में संबंध लिखिए:

सिक्कों की संख्या = रॉक्सी का भार ÷ एक 1 रुपए के सिक्के का भार

रॉक्सी का भार ज्ञात है (≈ 45 किलोग्राम)। एक सिक्के का भार ज्ञात नहीं — अतः उसे मापिए। अकेला सिक्का रसोई की तराजू के लिए बहुत हल्का है, इसलिए 100 सिक्के एक साथ तौलिए और 100 से भाग दीजिए। इससे प्रति सिक्का लगभग 4 ग्राम मिलता है।

45 किलोग्राम = 45,000 ग्राम
सिक्कों की संख्या ≈ 45,000 ÷ 4
= 11,250 सिक्के ≈ 1.1 × 104
ऐसा क्यों होता है: एक के बदले 100 सिक्के तौलना कोई चालाकी नहीं, एक वास्तविक मापन तकनीक है। तराजू पढ़ने में जो भी त्रुटि होगी वह 100 सिक्कों में बँट जाएगी, अतः प्रति सिक्का त्रुटि 100 गुना कम हो जाएगी। जब भी कोई एक वस्तु मापने के लिए बहुत छोटी हो, बहुत-सी वस्तुएँ मापिए और भाग दे दीजिए।
प्र4.
क्या सिक्कों की संख्या सैकड़ों, हजारों, लाखों, करोड़ों या उससे भी अधिक होगी? सहज अनुमान लगाइए।
उत्तर

हजारों में — लगभग दस हजार।

एक सिक्का कुछ ग्राम का होता है, अतः लगभग 250 सिक्के 1 किलोग्राम बनाते हैं
250 × 45 ≈ 11,000 सिक्के
कोटि: लगभग 104

लाखों होने के लिए प्रत्येक सिक्के का भार आधे ग्राम से भी कम होना पड़ेगा — एक छोटी पिन से भी हल्का। सैकड़ों होने के लिए प्रत्येक सिक्के का भार 100 ग्राम से अधिक होना पड़ेगा — एक मोबाइल फोन से भी भारी। दोनों स्पष्टतः गलत हैं और इन्हें बिना कोई गणना किए ही हटाया जा सकता है।

ऐसा क्यों होता है: अच्छा अनुमान मनमाना नहीं होता। यह पूछकर दोनों छोर तय कीजिए कि उत्तर सिक्के का भार क्या मान लेने को बाध्य करेगा, असंभव विकल्प हटा दीजिए और प्रायः 10 की सही घात ही शेष रह जाएगी। घातांक सही कर लेना ही आधी से अधिक लड़ाई है; गुणांक बाद में देख लीजिए।
प्र5.
अज्ञात मानों के लिए आवश्यक और संभावित अभिधारणाएँ तथा सन्निकटन का उपयोग करके उत्तर ज्ञात कीजिए। ध्यान दीजिए कि हम सटीक उत्तर नहीं अपितु एक यथोचित रूप से निकट आकलन को देख रहे हैं।
उत्तर
मान लीजिए: रॉक्सी का भार = 45 किलोग्राम = 45,000 ग्राम
मान लीजिए: एक 1 रुपए का सिक्का = 4 ग्राम

सिक्कों की संख्या = 45,000 ÷ 4 = 11,250
1.1 × 104 सिक्के, मूल्य ₹11,250

यह कितना संवेदनशील है? यदि सिक्का वास्तव में 3.5 ग्राम का हो तो उत्तर लगभग 12,900 आएगा; 5 ग्राम का हो तो 9,000। हर तार्किक धारणा 9,000 और 13,000 के बीच ही ले जाती है — अतः उत्तर है "लगभग दस हजार सिक्के", और आँकड़े इससे अधिक का समर्थन नहीं करते।

ऐसा क्यों होता है: धारणा बदलने पर उत्तर कितना हिलता है, यह जाँचना ही बताता है कि उस पर कितना भरोसा किया जाए। यहाँ उत्तर 104 की सीमा से कभी बाहर नहीं जाता, अतः कोटि पक्की है यद्यपि सटीक आँकड़ा नहीं। यही अंतर — पक्का घातांक, ढीला गुणांक — इस भाग का व्यावहारिक सार है।
प्र6.
एस्तु पूछता है, “क्या होगा यदि हम इसके अतिरिक्त 5 रुपए के सिक्के या 10 रुपए के नोट का उपयोग करें? यह कितने रुपए होंगे?” सर्वप्रथम सहज अनुमान लगाइए और इसके पश्चात ज्ञात कीजिए (अज्ञात विवरणों के विषय में आवश्यक और संभावित अभिधारणाएँ बनाइए और उत्तर ज्ञात कीजिए)।
उत्तर

अनुमान: 5 रुपए के सिक्कों से 1 रुपए के सिक्कों की तुलना में अधिक मूल्य मिलना चाहिए और नोटों से दोनों की तुलना में कहीं अधिक — नोट का भार तो नगण्य होता है।

वस्तुमाना गया भार45 किलोग्राम में संख्यामूल्य
1 रुपए का सिक्का4 ग्राम11,250₹11,250
5 रुपए का सिक्का6 ग्राम7,500₹37,500
10 रुपए का नोट1 ग्राम45,000₹4,50,000
5 रुपए के सिक्के: 45,000 ग्राम ÷ 6 ग्राम = 7,500 सिक्के × ₹5 = ₹37,500
10 रुपए के नोट: 45,000 ग्राम ÷ 1 ग्राम = 45,000 नोट × ₹10 = ₹4,50,000
ऐसा क्यों होता है: किसी भार के धन का मूल्य = (प्रति वस्तु मूल्य ÷ प्रति वस्तु भार) × कुल भार। नोट भारी अंतर से जीतते हैं क्योंकि कागज के लिए यह अनुपात बहुत बड़ा है — ₹10 प्रति ग्राम बनाम ₹1 प्रति 4 ग्राम। मोटे तौर पर, प्रति किलोग्राम नोट 1 रुपए के सिक्कों से लगभग 40 गुना अधिक धन देते हैं।
प्रयास कीजिए: यही गणना ₹500 के नोटों से कीजिए। वही 45 किलोग्राम लगभग ₹2.25 करोड़ हो जाते हैं — 50 गुना की छलाँग, केवल कागज पर छपी संख्या के कारण।
प्र7.
एस्तु और रॉक्सी के उपर्युक्त प्रस्तावों से वर्ष में कितने व्यक्तियों को लाभ हो सकता है? ज्ञात करने से पूर्व पुन: अनुमान लगाइए।
उत्तर

दोनों का वयस्क भार लगभग 60 किलोग्राम मान लीजिए।

लेखन पुस्तिकाएँ। 100 पृष्ठ की एक पुस्तिका ≈ 200 ग्राम
60 किलोग्राम = 60,000 ग्राम → 60,000 ÷ 200 = 300 पुस्तिकाएँ
यदि प्रत्येक विद्यार्थी को 5 पुस्तिकाएँ मिलें:
300 ÷ 5 = 60 विद्यार्थी प्रति वर्ष
अन्नदान। एक भोजन में लगभग 150 ग्राम अनाज लगता है
60,000 ÷ 150 = 400 भोजन
= 400 व्यक्ति एक बार, या एक वर्ष तक प्रतिदिन लगभग 1 व्यक्ति, या 4-4 के 100 परिवार
ऐसा क्यों होता है: दोनों उत्तर इसी पर टिके हैं कि "एक इकाई का भार कितना है", और दोनों इकाइयों का भार बहुत अलग है — भार के हिसाब से एक पुस्तिका एक भोजन से भारी है, अतः पुस्तिकाएँ कम बँटती हैं पर प्रत्येक कई महीनों तक विद्यार्थी के काम आती है। यह भी ध्यान दीजिए कि ये प्रतिवर्ष के दान हैं: 40 वर्ष के कार्यकाल में केवल पुस्तिकाओं से ही लगभग 2400 विद्यार्थियों तक पहुँचा जा सकता है।
क्या आप जानते हैं? व्यक्ति के भार के समान वस्तु दान करने की प्रथा तुलाभार या तुलाभारम कहलाती है। यह बहुत पुरानी है और दक्षिण भारत में कई स्थानों पर आज भी प्रचलित है। यह कृतज्ञता का प्रतीक है और समुदाय का समर्थन भी करती है।
प्र8.
उन्होंने अपनी यात्रा कितने समय पूर्व प्रारंभ की होगी?
उत्तर

लगभग 12 से 13 दिन पूर्व — मोटे तौर पर दो सप्ताह।

मान लीजिए सुविधाजनक चाल = 4 किलोमीटर प्रति घंटा
मान लीजिए प्रतिदिन 8 घंटे पैदल चलना (विश्राम और रात छोड़कर)

प्रतिदिन तय दूरी = 4 × 8 = 32 किलोमीटर
आवश्यक दिन = 400 ÷ 32 = 12.5 दिन

धारणाओं की जाँच कीजिए। 3 किलोमीटर प्रति घंटा की चाल से 6 घंटे प्रतिदिन चलने पर 400 ÷ 18 ≈ 22 दिन; 5 किलोमीटर प्रति घंटा से 10 घंटे प्रतिदिन चलने पर 400 ÷ 50 = 8 दिन। अतः ईमानदार उत्तर है "एक से तीन सप्ताह के बीच, सबसे संभवतः लगभग एक पखवाड़ा"।

ऐसा क्यों होता है: पदयात्रा कोई दौड़ नहीं है, अतः उत्तर को वास्तव में चाल नहीं बल्कि प्रतिदिन की दूरी नियंत्रित करती है। एक बार लगभग 30 किलोमीटर प्रतिदिन तय कर लेने पर गणना केवल एक भाग रह जाती है। यहाँ गणना से पहले अनुमान लगाना विशेष रूप से उपयोगी है: अधिकांश लोगों का पहला अनुमान बहुत कम होता है, क्योंकि हम दूरी को बस के समय से आँकते हैं।
क्या आप जानते हैं? पदयात्रा धार्मिक या आध्यात्मिक साधना के अंतर्गत लंबी दूरी तक पैदल चलने की परंपरागत प्रथा है। अजमेर शरीफ दरगाह जियारत, पंढरपुर वारी, काँवड़ यात्रा, सबरीमाला यात्रा, सम्मेद शिखर जी यात्रा और लुंबिनी से सारनाथ यात्रा कुछ प्रसिद्ध तीर्थयात्राएँ हैं।
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