प्र1.
3⁷ को 3² × 3⁵ के रूप में भी लिखा जा सकता है। क्या आप इस प्रकार लिखने का कारण बता सकते हैं?
उत्तर
क्योंकि सात 3 को दो 3 और पाँच 3 में बाँटा जा सकता है और कोष्ठक कहाँ लगाया जाए, इससे गुणनफल नहीं बदलता।
37 = 3 × 3 × 3 × 3 × 3 × 3 × 3
= (3 × 3) × (3 × 3 × 3 × 3 × 3)
= 32 × 35
जाँच: 9 × 243 = 2187 = 37 ✓
= (3 × 3) × (3 × 3 × 3 × 3 × 3)
= 32 × 35
जाँच: 9 × 243 = 2187 = 37 ✓
7 को दो गणन संख्याओं में बाँटने का हर तरीका उतना ही ठीक है: 31 × 36, 33 × 34, 34 × 33। इन सभी का मान 2187 ही है।
ऐसा क्यों होता है: गुणन साहचर्य नियम मानता है — गुणनखंडों का समूह बदलने से गुणनफल कभी नहीं बदलता। अतः a + b समान गुणनखंडों की एक लड़ी को सदैव a और b के समूहों में काटा जा सकता है। na × nb = na+b का पूरा अर्थ यही है: घातांक इसलिए जुड़ते हैं क्योंकि गुणनखंडों की गिनतियाँ जुड़ती हैं।