गणित प्रकाश अध्याय 4 आइए, पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
4 सेंटीमीटर भुजा वाले दो समबाहु त्रिभुजों को जोड़कर प्राप्त चतुर्भुज के सभी कोणों और सभी भुजाओं को ज्ञात कीजिए।
उत्तर

चारों भुजाएँ 4 सेंटीमीटर; कोण 60°, 120°, 60° तथा 120°। आकृति एक समचतुर्भुज है।

दोनों कटआउट को पूरी एक भुजा पर जोड़िए। वह भुजा 4 सेंटीमीटर का विकर्ण बन जाती है, और शेष चार किनारे भुजाएँ बन जाते हैं।

भुजाएँ: 4 सेमी, 4 सेमी, 4 सेमी, 4 सेमी  ⇒ समचतुर्भुज

जोड़ के दोनों सिरों पर दो 60° के कोण मिलते हैं:
60° + 60° = 120°  (दो बार)
दोनों दूरस्थ शीर्षों पर अकेला 60° का कोण रहता है: 60°  (दो बार)

जाँच: 60 + 120 + 60 + 120 = 360°
यह वर्ग क्यों नहीं है: वर्ग के लिए 90° के कोण चाहिए। यहाँ कोण समबाहु त्रिभुजों से तय होते हैं, जो केवल 60° ही दे सकते हैं। चार समान भुजाएँ इसे समचतुर्भुज बनाती हैं, पर कोण इसे वर्ग बनने नहीं देते।
संकेत: छोटा विकर्ण 4 सेंटीमीटर (जोड़) है। बड़ा विकर्ण 2 × (4 × √3 ∕ 2) = 4√3 ≈ 6.93 सेंटीमीटर होगा, क्योंकि प्रत्येक समबाहु त्रिभुज की ऊँचाई (√3∕2) × 4 है।
प्र2.
एक पतंग की रचना कीजिए जिसके विकर्णों की लंबाई 6 सेंटीमीटर और 8 सेंटीमीटर हो।
उत्तर

पृष्ठ 105 पर सिद्ध किए गए पतंग के विकर्ण-गुण का उपयोग कीजिए — एक विकर्ण दूसरे का लंब समद्विभाजक होता है

  1. PQ = 6 सेंटीमीटर खींचिए — यही वह विकर्ण होगा जो समद्विभाजित होगा।
  2. परकार से PQ का लंब समद्विभाजक बनाइए; वह PQ को T पर मिले, अत: PT = TQ = 3 सेंटीमीटर।
  3. उस लंब पर PQ के दोनों ओर R तथा S इस प्रकार अंकित कीजिए कि RS = 8 सेंटीमीटर हो — परंतु T उसका मध्यबिंदु हो। जैसे TR = 2 सेंटीमीटर तथा TS = 6 सेंटीमीटर लीजिए।
  4. PR, RQ, QS तथा SP मिलाइए।

PRQS अपेक्षित पतंग है।

PR = QR = √(3² + 2²) = √13 ≈ 3.6 सेंटीमीटर
PS = QS = √(3² + 6²) = √45 ≈ 6.7 सेंटीमीटर
आसन्न भुजाओं के दो समान युग्म ⇒ पतंग ✓
R तथा S असमान दूरी पर क्यों रखने हैं: यदि TR = TS = 4 सेंटीमीटर लें तो दूसरा विकर्ण भी समद्विभाजित हो जाएगा और समचतुर्भुज मिलेगा — जो एक विशेष पतंग है। TR ≠ TS रखने से भुजाओं के दोनों युग्म भिन्न रहते हैं और साधारण पतंग बनती है। 6 सेंटीमीटर व 8 सेंटीमीटर विकर्णों वाली अनेक भिन्न पतंगें संभव हैं; TR का प्रत्येक चुनाव एक नई पतंग देता है।
प्र3.
निम्नलिखित समलंब चतुर्भुज के शेष कोणों का मान ज्ञात कीजिए —
उत्तर

समलंब चतुर्भुज (i)। ऊपरी तथा निचली भुजाओं पर तीर के चिह्न हैं, अत: वे समांतर हैं। अंकित कोण 135° तथा 105° छोटी (निचली) भुजा के सिरों पर हैं। प्रत्येक तिरछी भुजा तिर्यक रेखा है, अत: उसके दोनों सिरों के कोणों का योग 180° होगा।

135° वाले कोने के ऊपर:  180 – 135 = 45°
105° वाले कोने के ऊपर:  180 – 105 = 75°
जाँच: 135 + 105 + 45 + 75 = 360°

समलंब चतुर्भुज (ii)। यहाँ दोनों तिरछी भुजाओं पर चिह्न हैं, अत: वे समान हैं — यह समद्विबाहु समलंब चतुर्भुज है। 100° का कोण एक समान भुजा तथा छोटी समांतर भुजा के बीच है।

उसी भुजा के दूसरे सिरे पर:  180 – 100 = 80°
गुण 2: प्रत्येक समांतर भुजा पर बने कोण समान होते हैं, अत:
छोटी समांतर भुजा पर दूसरा कोण = 100°
बड़ी समांतर भुजा पर दूसरा कोण = 80°
जाँच: 100 + 100 + 80 + 80 = 360°
45° 75° 135° 105° (i) 100° 100° 80° 80° (ii)
दिए गए कोण लाल/नीले रंग में, ज्ञात किए गए कोण हरे रंग में। दोनों आकृतियों में योग 360° है।
(ii) में चिह्नों की आवश्यकता क्यों है: साधारण समलंब चतुर्भुज में दोनों दिए गए कोण कुछ भी हो सकते हैं, और अकेला 100° केवल उसी भुजा के दूसरे सिरे का कोण तय करता। समान भुजाएँ दूसरा संबंध — गुण 2 — देती हैं, जिससे एक ही मापन चारों कोण निर्धारित कर देता है।
प्र4.
एक वेन आरेख बनाइए जिसमें समांतर चतुर्भुज, पतंग, समलंब चतुर्भुज आयत और वर्गों के समूह को दर्शाया गया हो। तत्पश्चात निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए— (i) वह कौन-सा चतुर्भुज है जो पतंग और समांतर चतुर्भुज दोनों है? (ii) क्या ऐसा कोई चतुर्भुज हो सकता है जो एक पतंग और एक आयत दोनों हों? (iii) क्या प्रत्येक पतंग एक समचतुर्भुज है? यदि नहीं, तो इन दो प्रकार के चतुर्भुजों के मध्य का संबंध क्या है?
उत्तर
समांतर चतुर्भुज पतंग आयत समचतुर्भुज वर्ग
आयत तथा समचतुर्भुज दोनों समांतर चतुर्भुज के भीतर हैं; उनका उभयनिष्ठ भाग वर्गों का है। समचतुर्भुज पूरी तरह पतंगों के भीतर भी हैं, और पतंग का समूह समांतर चतुर्भुजों से बाहर तक फैला है।

(i) समचतुर्भुज। जो चतुर्भुज पतंग भी हो और समांतर चतुर्भुज भी, उसमें आसन्न भुजाओं के दो समान युग्म (पतंग) तथा समान सम्मुख भुजाएँ (समांतर चतुर्भुज) होंगी — और इससे चारों भुजाएँ समान हो जाती हैं।

पतंग: AB = BC तथा CD = DA
समांतर चतुर्भुज: AB = CD तथा BC = DA
दोनों मिलकर: AB = BC = CD = DA ⇒ समचतुर्भुज  (वर्ग इसकी विशेष स्थिति है)

(ii) हाँ — वर्ग। वर्ग में AB = BC तथा CD = DA होता है, अत: वह पुस्तक की पतंग की परिभाषा (पृष्ठ 105) पर खरा उतरता है, और उसके सभी कोण 90° के होने से वह आयत भी है।

उत्तर-कुंजी के विषय में एक टिप्पणी: अध्याय के अंत में दी गई उत्तर-कुंजी यहाँ 'नहीं' कहती है। वह तभी सही होता जब पतंग के लिए यह अनिवार्य होता कि उसके दोनों युग्म भिन्न लंबाई के हों। परंतु इसी प्रश्न का भाग (i) समचतुर्भुज को पतंग मानकर चलता है, अत: उसी दृष्टि से वर्ग को भी पतंग मानना ही होगा — और वर्ग निश्चित ही आयत है। संगत उत्तर है हाँ, वर्ग

(iii) नहीं। प्रत्येक समचतुर्भुज पतंग है, परंतु प्रत्येक पतंग समचतुर्भुज नहीं।

समचतुर्भुज: AB = BC = CD = DA  ⇒ निश्चित ही AB = BC तथा CD = DA ⇒ पतंग ✓
AB = BC = 6 सेमी तथा CD = DA = 9 सेमी वाली पतंग ⇒ समचतुर्भुज नहीं

अत: सही संबंध है समचतुर्भुज ⊂ पतंग — समचतुर्भुजों का समूह पूरी तरह पतंगों के समूह के भीतर है।

प्र5.
यदि PAIR और RODS दो आयत हों तो ∠IOD ज्ञात कीजिए।
उत्तर

∠IOD = 30°

आकृति में PAIR एक आयत है जिसमें R नीचे-बाएँ तथा I नीचे-दाएँ है, O भुजा AI पर स्थित है, और RO से दूसरा आयत RODS लटका हुआ है। अंकित 30° वास्तव में ∠ORI है, अर्थात रेखाखंड RO का भुजा RI के साथ बना कोण।

∆ORI में:  ∠RIO = 90°  (आयत PAIR का I पर कोण, क्योंकि O, AI पर है)
∠IRO = 30°  (दिया है)
⇒ ∠ROI = 180 – 90 – 30 = 60°

RODS एक आयत है, अत: ∠ROD = 90°
I तथा D, RO के एक ही ओर हैं, अत: ∠ROI + ∠IOD = ∠ROD
⇒ ∠IOD = 90 – 60 = 30°
30° P A O R I D S 5 cm 5 cm
आयत PAIR धूसर रंग में, आयत RODS हरे रंग में; RO दोनों तर्कों में उभयनिष्ठ है।
उत्तर दिए गए कोण के बराबर क्यों निकलता है: ∠IRO तथा ∠IOD दोनों ही एक ही रेखा RO से नापे गए समकोणों के 'बचे हुए' भाग हैं — एक R पर ∆ORI के भीतर, दूसरा O पर RODS के कोने के भीतर। चूँकि ∠ROI = 90 – 30 है, दूसरा बचा हुआ भाग भी 30 ही होगा। इसीलिए इस कोण के लिए 5 सेंटीमीटर वाले दोनों चिह्नों की आवश्यकता नहीं पड़ती; वे केवल आकृति का आकार तय करते हैं।
प्र6.
चाँदे (प्रोट्रेक्टर) का प्रयोग किए बिना 6 सेंटीमीटर विकर्ण वाले एक वर्ग की रचना कीजिए।
उत्तर

वर्ग के विकर्ण-गुण का उपयोग कीजिए — समान विकर्ण जो एक-दूसरे को 90° पर समद्विभाजित करें। समकोण परकार से मिल जाता है, अत: चाँदे की आवश्यकता नहीं।

  1. AB = 6 सेंटीमीटर खींचिए।
  2. केंद्र A लेकर AB के आधे से अधिक कोई त्रिज्या लेकर AB के ऊपर तथा नीचे चाप लगाइए। यही केंद्र B से भी उसी त्रिज्या से कीजिए। दोनों कटान बिंदुओं को मिलाइए — यह रेखा AB का लंब समद्विभाजक है और AB को उसके मध्यबिंदु O पर काटती है।
  3. इस लंब पर C तथा D इस प्रकार अंकित कीजिए कि OC = OD = 3 सेंटीमीटर, एक-एक दोनों ओर।
  4. AC, CB, BD तथा DA मिलाइए।

ACBD अपेक्षित वर्ग है।

AB = CD = 6 सेंटीमीटर  (समान विकर्ण)
OA = OB = OC = OD = 3 सेंटीमीटर  (एक-दूसरे को समद्विभाजित)
∠AOC = 90°  (रचना से)
प्रत्येक भुजा = √(3² + 3²) = 3√2 ≈ 4.24 सेंटीमीटर
चाप वाली रचना सच्चा लंब क्यों देती है: दोनों कटान बिंदु A तथा B से समान दूरी पर हैं, अत: दोनों AB के लंब समद्विभाजक पर स्थित हैं। दो बिंदु उस रेखा को निर्धारित कर देते हैं — और लंब समद्विभाजक का अर्थ ही है '90° पर तथा मध्यबिंदु से होकर', जो ठीक वही दो शर्तें हैं जो वर्ग के विकर्णों को चाहिए।
प्र7.
CASE एक वर्ग है। बिंदु U, V, W और X वर्ग की भुजाओं के मध्य बिंदु हैं। UVWX किस प्रकार का चतुर्भुज है? इसे ज्यामितीय तर्क, रचना और मापन के उपयोग द्वारा ज्ञात कीजिए। एक वर्ग के अंतर्गत एक अन्य वर्ग की रचना करने की विधियाँ ज्ञात कीजिए ध्यान रखिए कि आंतरिक वर्ग के शीर्ष बाहरी वर्ग की भुजाओं पर स्थित हों जैसा कि आकृति (b) में दर्शाया गया है।
उत्तर

UVWX एक वर्ग है, जिसकी भुजा CASE की भुजा की 1√2 गुनी है — अत: उसका क्षेत्रफल ठीक आधा है।

ज्यामितीय तर्क। माना CASE की भुजा x है, अत: प्रत्येक अर्ध-भुजा x2 है। UVWX द्वारा काटे गए चारों कोने के त्रिभुज देखिए। कोने C पर त्रिभुज की भुजाएँ CU = CV = x2 हैं और उनके बीच समकोण है; यही A, S तथा E पर भी सत्य है।

UV² = CU² + CV² = 4 + 4 = 2
⇒ UV = x√2
चारों कोने के त्रिभुज सर्वांगसम हैं (SAS), अत:
UV = VW = WX = XU = x√2

कोण। प्रत्येक कोने का त्रिभुज समद्विबाहु समकोण त्रिभुज है, अत: उसके दोनों आधार कोण 45° के हैं। भुजा CA पर स्थित बिंदु U पर तीन कोण एक सरल रेखा पर हैं —

45° + ∠XUV + 45° = 180°  ⇒ ∠XUV = 90°
V, W तथा X पर भी यही ⇒ चारों कोण 90° के

चार समान भुजाएँ तथा चार समकोण ⇒ वर्ग

C U A X S W E V 45° 45° 45° 45°
वर्ग की भुजाओं के मध्यबिंदुओं को मिलाने पर आधे क्षेत्रफल वाला, 45° घुमा हुआ वर्ग बनता है।

रचना एवं मापन से। 6 सेंटीमीटर भुजा वाला वर्ग बनाइए, चारों मध्यबिंदु अंकित कीजिए और उन्हें मिलाइए। मापिए — भीतरी प्रत्येक भुजा लगभग 4.2 सेंटीमीटर मिलेगी (क्योंकि 6 ∕ √2 ≈ 4.24) तथा प्रत्येक कोण 90°।

अन्य आंतरिक वर्ग (आकृति b)। मध्यबिंदु ही एकमात्र विकल्प नहीं हैं। कोई भी दूरी d लीजिए और बाहरी वर्ग के चारों ओर एक ही घूर्णन दिशा में चलते हुए प्रत्येक भुजा पर उस कोने से d दूरी पर एक बिंदु अंकित कीजिए जिसे आप छोड़ रहे हैं। चारों बिंदुओं को मिला दीजिए।

तब प्रत्येक कोने के त्रिभुज की भुजाएँ d तथा (x – d) होंगी, चारों SAS से सर्वांगसम
⇒ भीतरी चारों भुजाएँ समान, प्रत्येक √(d² + (x – d)²)
⇒ और पहले की तरह कोण 90° निकलते हैं — प्रत्येक d के लिए वर्ग
एक ही दिशा में घूमना क्यों आवश्यक है: इससे चारों कोने के त्रिभुज पूरी आकृति के केंद्र के परित: चौथाई घुमाव द्वारा सर्वांगसम बन जाते हैं। चौथाई घुमाव भीतरी चतुर्भुज को स्वयं पर मानचित्रित करता है, अत: उसकी चारों भुजाएँ तथा चारों कोण समान होने ही चाहिए — और यही उसे वर्ग बनाता है। मध्यबिंदु वाली स्थिति तो d = x2 मात्र है, जो सबसे छोटा भीतरी वर्ग देती है।
प्र8.
यदि एक चतुर्भुज की चारों भुजाएँ समान हों और एक कोण 90° का हो तो क्या यह एक वर्ग होगा? ज्यामितीय तर्क, रचना और मापन के उपयोग द्वारा उत्तर ज्ञात कीजिए।
उत्तर

हाँ, वह वर्ग ही होगा।

चारों भुजाएँ समान ⇒ चतुर्भुज एक समचतुर्भुज है
प्रत्येक समचतुर्भुज एक समांतर चतुर्भुज है, अत:
  आसन्न कोणों का योग 180°  तथा  सम्मुख कोण समान

माना ∠A = 90°। तब
∠B = 180 – 90 = 90°  (आसन्न)
∠C = ∠A = 90°  (सम्मुख)
∠D = ∠B = 90°

सभी कोण 90° तथा सभी भुजाएँ समान ⇒ वर्ग

रचना से। AB = 5 सेंटीमीटर खींचिए और A पर परकार के चापों से लंब AD = 5 सेंटीमीटर बनाइए। केंद्र B तथा केंद्र D से 5 सेंटीमीटर त्रिज्या के चाप लगाइए; वे C पर मिलते हैं। ∠B, ∠C तथा ∠D मापिए — प्रत्येक 90° मिलेगा, और BC = CD = 5 सेंटीमीटर।

एक ही समकोण पर्याप्त क्यों है: भुजाएँ निश्चित हो जाने के बाद समचतुर्भुज में केवल एक स्वतंत्रता शेष रहती है — कोण। उस अकेले कोण को 90° पर बाँध देने से अंतिम स्वतंत्रता भी समाप्त हो जाती है और आकृति के पास वर्ग बनने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं बचता। इसकी तुलना सामान्य चतुर्भुज से कीजिए, जहाँ चार समान भुजाएँ और एक 90° का कोण कहीं भी पर्याप्त सूचना नहीं होती।
प्र9.
वह चतुर्भुज किस प्रकार का है जिसमें सम्मुख भुजाएँ समान हों? अपने उत्तर का सत्यापन कीजिए। संकेत — एक विकर्ण बनाइए और सर्वांगसम त्रिभुजों की जाँच कीजिए।
उत्तर

वह एक समांतर चतुर्भुज है।

माना ABCD में AB = CD तथा BC = AD है। विकर्ण AC खींचिए।

∆ABC तथा ∆CDA में:
AB = CD  (दिया है)
BC = DA  (दिया है)
AC = CA  (उभयनिष्ठ)
SSS नियम से ∆ABC ≅ ∆CDA

अत: ∠BAC = ∠DCA  तथा  ∠BCA = ∠DAC  (CPCT)

अब इन समान कोणों को तिर्यक रेखा AC के एकांतर कोणों के रूप में पढ़िए —

∠BAC = ∠DCA  ⇒ AB ∥ DC
∠BCA = ∠DAC  ⇒ BC ∥ AD

सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म समांतर हैं, अत: परिभाषा से ABCD एक समांतर चतुर्भुज है।

यह निगमन 7 का विलोम क्यों है: निगमन 7 'सम्मुख भुजाएँ समांतर' से आरंभ होकर 'सम्मुख भुजाएँ समान' पर पहुँचा था। यहाँ हम उसी निष्कर्ष को उल्टी दिशा में चलाते हैं। दोनों दिशाएँ सत्य होने के कारण 'सम्मुख भुजाएँ समान' समांतर चतुर्भुज की एक समान रूप से वैध कसौटी है — इसीलिए दो सर्वांगसम त्रिभुजों को आधा घुमाकर जोड़ने (पृष्ठ 104) से सदैव समांतर चतुर्भुज बनता है।
प्र10.
क्या आकृति में दिए गए चतुर्भुज के सभी कोणों का योगफल 360° होगा? ज्यामितीय तर्क के साथ ही इस आकृति की रचना करके और मापन के उपयोग द्वारा अपना उत्तर ज्ञात कीजिए।
उत्तर

हाँ — 360°, बशर्ते भीतर धँसे शीर्ष D पर कोण को प्रतिवर्ती (रिफ्लेक्स) कोण के रूप में लिया जाए, अर्थात वह कोण जो आकृति के भीतर की ओर है।

यहाँ ABCD एक अवतल चतुर्भुज है — D को त्रिभुज ABC के भीतर धकेल दिया गया है, अत: D पर आंतरिक कोण 180° से अधिक है।

अब विकर्ण AC आकृति के बाहर पड़ता है, अत: दूसरे विकर्ण BD का उपयोग कीजिए, जो भीतर ही है।

BD, ABCD को ∆ABD तथा ∆BCD में बाँटता है
∆ABD के कोणों का योग = 180°
∆BCD के कोणों का योग = 180°
कुल = 360°

पुनर्व्यवस्थित करने पर: ∠A + (∠ABD + ∠DBC) + ∠C + (∠ADB + ∠BDC) = 360°
अर्थात ∠A + ∠B + ∠C + D पर प्रतिवर्ती कोण = 360°
A B C D विकर्ण BD D पर प्रतिवर्ती कोण ही आंतरिक कोण है
अवतल चतुर्भुज में एक विकर्ण बाहर पड़ जाता है; दूसरा फिर भी उसे दो त्रिभुजों में बाँट देता है।

रचना एवं मापन से। आकृति बनाइए, फिर ∠A, ∠B, ∠C तथा D पर प्रतिवर्ती कोण मापिए। प्रतिवर्ती कोण मापने के लिए साधारण कोण ∠ADC मापकर उसे 360° में से घटा दीजिए। चारों मानों का योग 360° आएगा।

परिणाम बना क्यों रहता है: पृष्ठ 95 के प्रमाण को केवल एक ऐसा विकर्ण चाहिए था जो आकृति के भीतर हो। प्रत्येक चतुर्भुज में — उत्तल हो या अवतल — कम से कम एक ऐसा विकर्ण होता ही है; अवतल में ठीक एक। अत: 'दो त्रिभुज' वाला तर्क कभी टूटता नहीं, और 360° का योग हर चतुर्भुज पर लागू रहता है।
प्र11.
बताइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं अथवा असत्य। अपने उत्तर को सत्यापित कीजिए। (i) एक चतुर्भुज जिसके विकर्ण समान लंबाई के हों और एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हों वह निश्चित ही एक वर्ग होगा। (ii) एक चतुर्भुज जिसके तीन कोण समकोण हैं निश्चित ही एक आयत है। (iii) एक चतुर्भुज जिसके विकर्ण परस्पर समद्विभाजित करते हैं निश्चित ही एक समांतर चतुर्भुज है। (iv) एक चतुर्भुज जिसके विकर्ण एक-दूसरे पर लंबवत हों निश्चित ही एक समचतुर्भुज है। (v) एक चतुर्भुज जिसमें सम्मुख कोण समान हैं निश्चित ही एक समांतर चतुर्भुज है। (vi) एक चतुर्भुज एक आयत होगा यदि इसका प्रत्येक कोण समान हैं। (vii) समद्विबाहु समलंब चतुर्भुज, समांतर चतुर्भुज होते हैं।
उत्तर

(i) असत्य। समान विकर्ण जो एक-दूसरे को समद्विभाजित करें, आयत देते हैं (निगमन 3), आवश्यक रूप से वर्ग नहीं। वर्ग के लिए एक शर्त और चाहिए — विकर्ण 90° पर भी मिलें (निगमन 5)। 6 सेमी × 3 सेमी का आयत इसका प्रत्युदाहरण है।

(ii) सत्य। चतुर्भुज के कोणों का योग 360° होता है, अत: चौथा कोण = 360 – 90 × 3 = 90°। तब चारों कोण समकोण हो जाते हैं, जो आयत की परिभाषा है।

(iii) सत्य। माना ABCD के विकर्ण O पर मिलते हैं और OA = OC तथा OB = OD है।

SAS से ∆AOB ≅ ∆COD  (∠AOB = ∠COD, शीर्षाभिमुख)
⇒ AB = CD तथा ∠BAO = ∠DCO ⇒ AB ∥ CD
इसी प्रकार ∆AOD ≅ ∆COB ⇒ AD = CB तथा AD ∥ CB
⇒ समांतर चतुर्भुज

(iv) असत्य। पतंग के भी विकर्ण लंबवत होते हैं, और 6, 6, 9, 9 भुजाओं वाली पतंग समचतुर्भुज नहीं है। केवल लंबवत होना पर्याप्त नहीं — विकर्णों को एक-दूसरे को समद्विभाजित भी करना चाहिए।

(v) सत्य। माना ∠A = ∠C = x तथा ∠B = ∠D = y।

x + y + x + y = 360  ⇒ 2(x + y) = 360  ⇒ x + y = 180°
अत: आसन्न कोणों का प्रत्येक युग्म संपूरक है
⇒ AB ∥ DC तथा AD ∥ BC  (एक ही ओर के अंत:कोण) ⇒ समांतर चतुर्भुज

(vi) सत्य। चार समान कोणों का योग 360° होने का अर्थ है प्रत्येक कोण 360 ∕ 4 = 90° का, जो पुस्तक की आयत की परिभाषा ही है।

(vii) असत्य। समद्विबाहु समलंब चतुर्भुज में समांतर भुजाओं का केवल एक युग्म निश्चित होता है। उसकी दोनों समान भुजाएँ एक-दूसरे की ओर झुकी होती हैं, समांतर नहीं, अत: वह समांतर चतुर्भुज नहीं है। वास्तव में उसमें आधार कोण समान होते हैं (∠U = ∠V), जबकि समांतर चतुर्भुज में आसन्न कोणों का योग 180° होना चाहिए — दोनों शर्तें केवल तभी साथ चल सकती हैं जब सभी कोण 90° के हों।

इन सात कथनों का प्रतिरूप: जो असत्य हैं — (i), (iv) तथा (vii) — उनमें से प्रत्येक किसी सही लक्षण-निरूपण से एक शर्त गिरा देता है: लंबवतता के बिना समान विकर्ण, समद्विभाजन के बिना लंबवतता, समांतर भुजाओं के दो युग्मों के स्थान पर एक। कोई गुण आवश्यक होते हुए भी पर्याप्त नहीं हो सकता, और इन दोनों में अंतर करना ही इस अभ्यास का पूरा कौशल है।
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