केंद्र वाले कोने पर त्रिकोणीय मोड़ को 45° का मोड़ बनाइए — अर्थात ऐसा मोड़ जो केंद्र पर मिलने वाले दोनों किनारों से समान लंबाई काटे।
दोनों लंबवत मोड़ों पर d लंबाई काटिए
चारों मोड़-रेखाखंड √(d² + d²) = d√2 के होंगे ⇒ सभी भुजाएँ समान
आकृति के दोनों विकर्ण 2d होंगे ⇒ विकर्ण समान
वे 90° पर एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं (पहले बने दोनों मोड़)
⇒ समान विकर्ण, 90° पर परस्पर समद्विभाजित ⇒ वर्ग
सटीक होने का सरलतम उपाय: केंद्र वाले कोने पर एक मोड़-रेखा को ठीक दूसरी मोड़-रेखा पर ले आइए। यह मोड़ समकोण को समद्विभाजित करता है, अत: प्रत्येक के साथ 45° बनाता है — और स्वत: ही समान लंबाइयाँ काटता है।
असमान कटाव क्यों विफल रहता है: यदि एक मोड़-रेखा पर d और दूसरी पर भिन्न लंबाई e काटें तो विकर्ण 2d तथा 2e हो जाएँगे। वे अब भी 90° पर एक-दूसरे को समद्विभाजित करेंगे, अत: समचतुर्भुज तो मिलेगा, पर असमान विकर्णों का अर्थ है असमान कोण — समकोण नहीं। केवल d = e ही विकर्णों को समान बनाता है, और तभी वह समचतुर्भुज वर्ग होता है।