हाँ। अध्याय में दो और विधियाँ मिलती हैं, और यह भी सिद्ध होता है कि तीनों ठीक एक ही श्रेणी के चतुर्भुजों को दर्शाती हैं।
| परिभाषा | यह कहाँ से आई |
|---|---|
| सभी कोण 90° तथा सम्मुख भुजाएँ समान | सबसे पहले दी गई परिचित परिभाषा |
| विकर्ण समान हों तथा एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हों | बढ़ई की समस्या का उत्तर |
| सभी कोण 90° | निगमन 4 — 'सम्मुख भुजाएँ समान' वाला भाग स्वयं ही सिद्ध हो जाता है |
परिभाषा एक कसौटी होती है — कोई आकृति ठीक तभी आयत है जब वह कसौटी पर खरी उतरे। दो भिन्न कसौटियाँ भी समान रूप से सही हो सकती हैं, बशर्ते दोनों एक ही आकृतियों को स्वीकार करें और एक ही आकृतियों को अस्वीकार करें।