गणित प्रकाश अध्याय 4 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या अब हम पहचान सकते हैं कि चतुर्भुज ABCD किस प्रकार का चतुर्भुज है? ध्यान दीजिए कि इसके प्रत्येक शीर्ष कोण का योग 90° (30° + 60°) है।
उत्तर

यह एक आयत है।

प्रत्येक शीर्ष पर विकर्ण कोण को 30° तथा 60° के दो भागों में बाँटता है, और 30° + 60° = 90°। अत: ABCD के चारों कोण 90° के हैं, जो कि आयत की परिभाषा ही है।

∠A = ∠B = ∠C = ∠D = 90°
जाँच: 90 × 4 = 360° ✓  (किसी भी चतुर्भुज के कोणों का योग)
संकेत: यह आकृति आयत के रूप में बनाई नहीं गई थी — यह दो समान रेखाखंडों को मध्यबिंदु पर 60° के कोण पर काटकर बनाई गई थी। आयत होना निष्कर्ष है, प्रारंभिक मान्यता नहीं।
प्र2.
हम इस चतुर्भुज की भुजाओं के विषय में क्या कह सकते हैं?
उत्तर

सम्मुख भुजाएँ समान हैं — AB = CD तथा AD = CB।

∆AOB ≅ ∆COD  ⇒ AB = CD
∆AOD ≅ ∆COB  ⇒ AD = CB

प्रत्येक सर्वांगसमता SAS से मिलती है — OA = OC, OB = OD (विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं), तथा O पर उनके बीच का कोण दोनों त्रिभुजों में समान है क्योंकि शीर्षाभिमुख कोण समान होते हैं।

ऐसा क्यों होता है: एक विकर्ण का आधा भाग, दूसरे विकर्ण का आधा भाग तथा उनके बीच का कोण — ये तीनों मिलकर एक त्रिभुज को पूर्णत: निर्धारित कर देते हैं। O के दोनों ओर के त्रिभुज ठीक इन्हीं तीन भागों से बने हैं, अत: उनकी तीसरी भुजाएँ — जो ABCD की सम्मुख भुजाएँ हैं — समान होनी ही चाहिए।

सभी कोण 90° तथा सम्मुख भुजाएँ समान होने से ABCD पुस्तक की पहली परिभाषा को संतुष्ट करता है।

प्र3.
यदि विकर्णों के मध्य कोणों को परिवर्तित कर दिया जाए तो क्या ABCD एक आयत ही रहेगा? क्या हम इसका व्यापकीकरण कर सकते हैं?
उत्तर

हाँ — प्रत्येक कोण के लिए यह आयत ही रहेगा। निगमन 3 इसी का व्यापकीकरण करता है।

विकर्णों के बीच का एक कोण x मान लीजिए। तब O पर बने चारों कोण x, x, 180 – x, 180 – x होंगे।

समद्विबाहु ∆AOB में (OA = OB), आधार कोण a:
a + a + x = 180  ⇒ 2a = 180 – x  ⇒ a = 90 – x2

समद्विबाहु ∆AOD में (OA = OD), आधार कोण b:
b + b + (180 – x) = 180  ⇒ 2b = x  ⇒ b = x2

ABCD का प्रत्येक कोण = a + b = (90 – x2) + x2 = 90

x कट जाता है। यही पूरी बात है — उत्तर x पर निर्भर ही नहीं करता, अत: विकर्णों के बीच कोई भी कोण हो, चतुर्भुज आयत ही होगा

ऐसा क्यों होता है: प्रत्येक शीर्ष पर एक अर्ध-कोण जितनी तेज़ी से बढ़ता है, दूसरा उतनी ही तेज़ी से घटता है। विकर्णों को थोड़ा खोलिए तो a उसका आधा घट जाता है और b उतना ही बढ़ जाता है। उनका योग 90° से हट ही नहीं सकता।
स्वयं जाँचिए: सूत्रों में x = 60 रखिए — a = 90 – 30 = 60 तथा b = 30, जो पृष्ठ 85 पर हल किए गए उदाहरण से पूर्णत: मेल खाता है।
प्र4.
चूँकि हम जानते हैं कि ∆AOB एक समद्विबाहु त्रिभुज है अत: हम इसके दोनों आधार कोणों के माप को a द्वारा निरूपित कर सकते हैं। x के पदों में a का मान (डिग्री में) क्या है?
उत्तर

a = 90 – x2 डिग्री

a + a + x = 180  (त्रिभुज के अंत:कोणों का योग)
2a = 180 – x
a = (180 – x)2 = 90 – x2
xa = 90 – x/2b = x/2a + b
40°70°20°90°
60°60°30°90°
90°45°45°90°
140°20°70°90°
यहाँ बीजगणित क्यों: x = 60° जैसा कोई एक संख्यात्मक उदाहरण केवल एक आयत की जाँच करता है। उत्तर को x के पदों में लिखने पर सभी आयतों की जाँच एक साथ हो जाती है — यह अक्षर उन सभी कोणों का प्रतिनिधित्व करता है जो दोनों पट्टिकाएँ बना सकती हैं।
प्र5.
AB व CD तथा AD व BC के विषय में हम क्या कह सकते हैं?
उत्तर

AB = CD तथा AD = CB — कोण x कुछ भी हो, सम्मुख भुजाएँ समान रहती हैं।

∆AOB ≅ ∆COD  ⇒ AB = CD
∆AOD ≅ ∆COB  ⇒ AD = CB

प्र.3 के साथ मिलाकर देखिए — यदि दो रेखाखंड समान हों और एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हों, तो उनके अंतबिंदुओं से बने चतुर्भुज के सभी कोण 90° तथा सम्मुख भुजाएँ समान होंगी। अत: वह एक आयत है — और बढ़ई की समस्या पूर्णत: हल हो गई।

संकेत: इसी से दूसरी परिभाषा वैध बनती है — आयत एक चतुर्भुज है जिसके विकर्ण समान होते हैं और एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं। निगमन 1 व 2 सिद्ध करते हैं कि प्रत्येक आयत यह कसौटी पूरी करता है; निगमन 3 सिद्ध करता है कि यह कसौटी पूरी करने वाली प्रत्येक आकृति आयत है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ