प्र1.
नीचे दी गई आकृतियों का अवलोकन कीजिए। आकृतियाँ (i), (ii) व (iii) चतुर्भुज हैं तथा अन्य आकृतियाँ चतुर्भुज नहीं हैं। क्यों?
उत्तर
क्योंकि केवल (i), (ii) तथा (iii) ही ऐसी बंद आकृतियाँ हैं जो ठीक चार रेखाखंडों से बनी हैं, जो सिरे से सिरे तक जुड़े हैं, न कोई रेखाखंड दूसरे को काटता है और न ही कोई सिरा खुला है।
प्रत्येक आकृति को दो शर्तों पर परखिए —
- वह बंद हो — उसे बनाते हुए आप प्रारंभिक बिंदु पर लौट आएँ;
- वह चार सरल भुजाओं से बनी हो जो केवल अपने अंतबिंदुओं पर मिलें।
आकृति (iv) तथा (v) इनमें से कोई एक शर्त पूरी नहीं करतीं। एक आकृति बंद नहीं है (एक भुजा खुली रह गई है, अत: चौथा शीर्ष बनता ही नहीं), और दूसरी में भुजाएँ एक-दूसरे को काटती हैं, अत: वे चार रेखाखंड मिलकर एक ही क्षेत्र नहीं घेरते।
यह महत्त्वपूर्ण क्यों है: 'क्वाड्रीलेटेरल' शब्द लैटिन के क्वाड्री (चार) तथा लैटस (भुजा) से बना है। यही परिभाषा हमें 'आकृति के चार कोण' कहने का अधिकार देती है — (i), (ii) व (iii) में किसी शीर्ष पर मिलने वाली भुजाओं का युग्म ठीक एक आंतरिक कोण बनाता है, अत: आकृति के चार सुनिश्चित कोण होते हैं। खुली अथवा कटती हुई आकृति में ऐसे चार कोण होते ही नहीं।