दो स्पष्ट परिवार बनते हैं।
तीनों आधे-घुमाव वाले जोड़ समांतर चतुर्भुज देते हैं। उभयनिष्ठ किनारे के मध्यबिंदु के परित: आधा घुमाव सभी दिशाएँ उलट देता है, अत: प्रत्येक शेष भुजा अपनी जोड़ीदार के समांतर हो जाती है —
6 सेंटीमीटर पर जोड़ ⇒ 9 सेंटीमीटर तथा 12 सेंटीमीटर भुजाओं वाला समांतर चतुर्भुज
9 सेंटीमीटर पर जोड़ ⇒ 6 सेंटीमीटर तथा 12 सेंटीमीटर भुजाओं वाला समांतर चतुर्भुज
12 सेंटीमीटर पर जोड़ ⇒ 6 सेंटीमीटर तथा 9 सेंटीमीटर भुजाओं वाला समांतर चतुर्भुज
तीनों दर्पण वाले जोड़ पतंग देते हैं (जब रूपरेखा उत्तल बनी रहे), क्योंकि प्रतिबिंब से आसन्न भुजाओं के दो समान युग्म बन जाते हैं —
12 सेंटीमीटर पर जोड़ ⇒ भुजाएँ 6, 9, 9, 6 ⇒ 12 सेंटीमीटर विकर्ण वाली पतंग
यही अंतिम आकृति पुस्तक पृष्ठ 105 पर पतंग का परिचय देने के लिए प्रयोग करती है। इसकी आसन्न भुजाएँ युग्मों में समान हैं — ऊपर 6 के साथ 6, नीचे 9 के साथ 9।
प्रतिबिंब पतंग और घुमाव समांतर चतुर्भुज क्यों देता है: प्रतिबिंब में उभयनिष्ठ किनारा सममिति रेखा बना रहता है, अत: उसके दोनों ओर की भुजाएँ दर्पण-जोड़ी होती हैं — आसन्न समान युग्म, अर्थात पतंग। आधा घुमाव प्रत्येक भुजा को सम्मुख कोने पर भेज देता है, अत: समान युग्म आमने-सामने आ जाते हैं — अर्थात समांतर चतुर्भुज।
स्वयं जाँचिए: जोड़ने का तरीका कोई भी हो, चारों कोणों का योग 360° ही होगा, क्योंकि दोनों त्रिभुज 180°-180° देते हैं।