गणित प्रकाश अध्याय 5 आइए, पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
यदि 31z5, 9 का गुणज है जहाँ z एक अंक है तब z का मान क्या होगा? व्याख्या कीजिए कि यहाँ इस प्रश्न के दो उत्तर क्यों हैं?
उत्तर

z = 0 अथवा z = 9, जिनसे 3105 और 3195 प्राप्त होते हैं।

अंकों का योगफल = 3 + 1 + z + 5 = 9 + z
z एक अंक है, अत: 9 + z का मान 9 से 18 तक है
इस परास में 9 के गुणज: 9 और 18
9 + z = 9 → z = 0   9 + z = 18 → z = 9

जाँच: 3105 = 9 × 345 ✓ तथा 3195 = 9 × 355 ✓

दो उत्तर क्यों: z के बिना अंकों का योगफल पहले से ही 9 है — 9 का एक गुणज। 0 जोड़ने पर वह 9 का गुणज बना रहता है और 9 जोड़ने पर अगले गुणज पर पहुँच जाता है। चूँकि एक अंक योगफल को अधिक-से-अधिक 9 ही बढ़ा सकता है, 9 से 18 के बीच 9 के ठीक दो गुणज आते हैं, अत: ठीक दो उत्तर हैं।
प्र2.
स्नेहल पुष्टि करता है— “मैं एक संख्या लेता हूँ जिसे 12 से विभाजित करने पर शेषफल 8 प्राप्त होता है। मैं एक और संख्या लेता हूँ जो 12 के गुणज से 4 कम है। इनका योगफल सदैव 8 का गुणज होगा।” उसकी पुष्टि की जाँच कीजिए और अपने निष्कर्ष का सत्यापन कीजिए।
उत्तर

स्नेहल की पुष्टि सही नहीं है। योग कभी 8 का गुणज होता है और कभी नहीं।

पहली संख्या: a = 12n + 8
दूसरी संख्या: b = 12m – 4
a + b = 12n + 12m + 4 = 12(n + m) + 4 = 4(3(n + m) + 1)

अत: योग सदैव 4 का गुणज है, किंतु 8 का गुणज होने के लिए कोष्ठक 3(n + m) + 1 का सम होना आवश्यक है — अर्थात n + m विषम होना चाहिए।

abयोग8 का गुणज?
8 (n = 0)8 (m = 1)16हाँ
20 (n = 1)8 (m = 1)28नहीं
8 (n = 0)20 (m = 2)28नहीं
20 (n = 1)20 (m = 2)40हाँ
निष्कर्ष: प्रति-उदाहरण 20 + 8 = 28 ही पुष्टि को गलत सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है। स्नेहल सत्य रूप में यह कह सकता था कि योग सदैव 4 का गुणज होगा और 12 से भाग देने पर सदैव शेषफल 4 देगा।
प्र3.
3 के दो गुणजों का योग कब 6 का गुणज होता है और कब नहीं? विभिन्न संभावित स्थितियों की व्याख्या कीजिए और प्रतिरूप का सामान्यीकरण कीजिए।
उत्तर

3 के दो गुणजों का योग 6 का गुणज ठीक तभी होता है जब दोनों संख्याओं की समता समान हो — या तो दोनों सम हों या दोनों विषम।

3m + 3n = 3(m + n)
यह 6 = 3 × 2 का गुणज तभी होगा जब m + n सम हो
m + n सम ⇔ m और n की समता समान
स्थितिउदाहरणयोग6 का गुणज?
दोनों सम गुणज (अर्थात 6 के गुणज)6 + 1218हाँ
दोनों विषम गुणज9 + 1524हाँ
एक सम, एक विषम6 + 915नहीं
एक सम, एक विषम12 + 2133नहीं
सामान्यीकरण: यह अध्याय के आरंभ वाला समता का तर्क ही है, बस 3 का आवरण ओढ़े हुए। 3 का प्रत्येक गुणज या तो 6 का गुणज है (6 से भाग पर शेषफल 0) या 6 के गुणज से 3 अधिक (शेषफल 3)। एक ही प्रकार की दो संख्याओं का योग 6 का गुणज होता है; भिन्न प्रकार की दो संख्याओं का योग 3 शेष छोड़ता है — ठीक वही संरचना जो 4 के गुणजों के साथ मिली थी।
प्र4.
श्रीलथा कहती हैं, “मेरे पास एक संख्या है जो 9 से विभाज्य है। यदि मैं इस संख्या के अंकों को उल्टे क्रम में लिखूँ तब भी वह 9 से विभाज्य है।” (i) जाँच कीजिए कि क्या उसका अनुमान 9 के किसी भी गुणज के लिए सत्य है। (ii) क्या कोई अन्य अंक में परिवर्तन संभव है जिससे कि प्राप्त संख्या अभी भी 9 का गुणज है?
उत्तर

(i) उनका अनुमान 9 के प्रत्येक गुणज के लिए सत्य है।

ऐसा क्यों होता है: अंकों को उल्टा करने से वे भिन्न स्थानों पर चले जाते हैं, किंतु अंक स्वयं वही रहते हैं — अत: अंकों का योगफल अपरिवर्तित रहता है। 9 से विभाज्यता केवल अंकों के योगफल पर निर्भर है, इसलिए वह उलटने के बाद भी बनी रहती है।
189 → अंक-योग 18 → 189 = 9 × 21 ✓
981 → अंक-योग 18 → 981 = 9 × 109 ✓

5238 → अंक-योग 18 → 5238 = 9 × 582 ✓
8325 → अंक-योग 18 → 8325 = 9 × 925 ✓

(ii) हाँ — अंकों का कोई भी क्रम-परिवर्तन चलेगा, केवल उलटना ही नहीं।

189 लीजिए और उसके सभी क्रम लिखिए—

189 = 9 × 21   198 = 9 × 22   819 = 9 × 91
891 = 9 × 99   918 = 9 × 102   981 = 9 × 109

छहों 9 के गुणज हैं, कारण वही: अंकों का क्रम बदलने से उनका योगफल कभी नहीं बदलता।

संकेत: एक ही बात का ध्यान रखिए — 0 का। 405 के अंकों को इधर-उधर करने पर 0 आगे आ सकता है और तब 045 तीन अंकों की संख्या नहीं रह जाती, यद्यपि उसका मान 45 अब भी 9 का गुणज है। यही तर्क 3 के लिए भी लागू होता है, क्योंकि 3 से विभाज्यता भी केवल अंक-योग पर निर्भर है।
प्र5.
यदि 48a23b, 18 का एक गुणज है तो a और b के सभी संभव मानों के युग्मों की सूची बनाइए।
उत्तर

युग्म हैं (a, b) = (1, 0), (8, 2), (6, 4), (4, 6) तथा (2, 8)

18 = 2 × 9, और 2 व 9 सहअभाज्य हैं
अत: 48a23b को 2 से और 9 से विभाज्य होना चाहिए

2 से विभाज्य: इकाई अंक b सम होना चाहिए → b = 0, 2, 4, 6 या 8।

9 से विभाज्य: अंकों का योगफल 9 का गुणज होना चाहिए।

4 + 8 + a + 2 + 3 + b = 17 + a + b
a + b ≤ 18, अत: 17 + a + b का मान 17 से 35 के बीच है
इस परास में 9 के गुणज 18 व 27 हैं → a + b = 1 अथवा a + b = 10
ba + b = 1 से aa + b = 10 से aमान्य युग्म
0a = 1 ✓a = 10 ✗(1, 0) → 481230
2a = – 1 ✗a = 8 ✓(8, 2) → 488232
4a = 6 ✓(6, 4) → 486234
6a = 4 ✓(4, 6) → 484236
8a = 2 ✓(2, 8) → 482238

एक की जाँच: 481230 → अंक-योग 18 ✓, अंत 0 पर ✓, और 481230 = 18 × 26735 ✓

प्र6.
यदि 3p7q8, 44 से विभाज्य है तो p और q के सभी संभव मानों के युग्मों की सूची बनाइए।
उत्तर

युग्म हैं (p, q) = (7, 0), (5, 2), (3, 4) तथा (1, 6)

44 = 4 × 11, और 4 व 11 सहअभाज्य हैं
अत: 3p7q8 को 4 से और 11 से विभाज्य होना चाहिए

4 से विभाज्य: अंतिम दो अंक q8, 4 का गुणज बनाएँ → 08, 28, 48, 68, 88, अर्थात q = 0, 2, 4, 6 या 8।

11 से विभाज्य: इकाई अंक से एकांतर योग लीजिए।

8 – q + 7 – p + 3 = 18 – (p + q)
यह 0 या 11 का गुणज होना चाहिए
18 – (p + q) = 0 → p + q = 18 → p = q = 9, किंतु q सम होना चाहिए ✗
18 – (p + q) = 11 → p + q = 7
18 – (p + q) = – 11 → p + q = 29, असंभव ✗
qp = 7 – qसंख्या÷ 44
0737708857 ✓
2535728812 ✓
4333748767 ✓
6131768722 ✓
8– 1 ✗
प्र7.
तीन क्रमागत संख्याएँ ज्ञात कीजिए जिनमें पहली संख्या 2 का गुणज है, दूसरी संख्या 3 का गुणज है और तीसरी संख्या 4 का गुणज है। क्या ऐसी और भी संख्याएँ हैं? ये कितनी बार आती हैं?
उत्तर

ऐसा एक समूह है 2, 3, 4। ऐसे अनंत समूह हैं और वे प्रत्येक 12 संख्याओं में एक बार आते हैं।

मान लीजिए संख्याएँ n, n + 1, n + 2 हैं
n + 2, 4 का गुणज है → n को 4 से भाग देने पर शेषफल 2
(इससे n स्वयं सम हो जाता है, अत: पहली शर्त मुफ़्त में पूरी हो गई)
n + 1, 3 का गुणज है → n को 3 से भाग देने पर शेषफल 2

n – 2, 4 का भी गुणज है और 3 का भी → LCM (3, 4) = 12 का गुणज
n = 12k + 2
nतीनों संख्याएँजाँच
22, 3, 42 = 2 × 1, 3 = 3 × 1, 4 = 4 × 1 ✓
1414, 15, 1614 = 2 × 7, 15 = 3 × 5, 16 = 4 × 4 ✓
2626, 27, 2826 = 2 × 13, 27 = 3 × 9, 28 = 4 × 7 ✓
3838, 39, 4038 = 2 × 19, 39 = 3 × 13, 40 = 4 × 10 ✓
प्रत्येक 12 पर क्यों: दोनों शर्तें n का 4 से भाग वाला शेषफल और 3 से भाग वाला शेषफल निश्चित कर देती हैं। ये दोनों शेषफल मिलकर LCM (3, 4) = 12 के आवर्तकाल पर दोहराते हैं, अत: पूरा प्रतिरूप हर बार 12 आगे खिसक जाता है।
प्र8.
45,000 और 47,000 के बीच 36 के पाँच गुणज लिखिए। अपनी विधि को अपनी कक्षा में साझा कीजिए।
उत्तर

पाँच गुणज: 45036, 45072, 45108, 45144, 45180

विधि। परास में 36 का कोई एक गुणज ज्ञात कीजिए और फिर बार-बार 36 जोड़ते जाइए — प्रत्येक चरण अगले गुणज पर पहुँचता है।

45000 ÷ 36 = 1250 ठीक-ठीक, अत: 45000 = 36 × 1250
अगला: 36 × 1251 = 45036
फिर 36 जोड़ते जाइए: 45072, 45108, 45144, 45180

बिना भाग दिए जाँच। 36 = 4 × 9 और 4 व 9 सहअभाज्य हैं, अत: 36 के गुणज को दोनों जाँचें पास करनी चाहिए—

संख्याअंतिम दो अंक ÷ 4अंक-योग ÷ 9÷ 36
4503636 = 4 × 9 ✓18 ✓1251
4507272 = 4 × 18 ✓18 ✓1252
4510808 = 4 × 2 ✓18 ✓1253
4514444 = 4 × 11 ✓18 ✓1254
4518080 = 4 × 20 ✓18 ✓1255
संकेत: 45000 स्वयं 36 का गुणज है, किंतु प्रश्न 45,000 और 47,000 के बीच के गुणज माँगता है, अत: सूची 45036 से आरंभ होती है।
प्र9.
पाँच क्रमागत सम संख्याओं के अनुक्रम में मध्य की संख्या 5p है। अनुक्रम में अन्य चार संख्याओं को p के पदों में व्यक्त कीजिए।
उत्तर

अन्य चार संख्याएँ हैं 5p – 4, 5p – 2, 5p + 2 तथा 5p + 4

पूरा अनुक्रम क्रम में है
5p – 4, 5p – 2, 5p, 5p + 2, 5p + 4

क्रमागत सम संख्याओं में अंतर 2 होता है, 1 नहीं — यहाँ केवल इसी बात का ध्यान रखना है।

संख्याओं से जाँच: यदि 5p = 20 हो (अर्थात p = 4), तो पाँचों संख्याएँ 16, 18, 20, 22, 24 हैं ✓। इनका योग 25p = 100 है, अर्थात मध्य संख्या का पाँच गुना — वही सुंदर तथ्य जो समान अंतर वाले किन्हीं भी पाँच क्रमागत पदों के लिए सत्य है।
प्र10.
एक 6 अंकों की संख्या लिखिए जो 15 से विभाज्य है तथा अंकों को उल्टे क्रम में लिखने पर प्राप्त संख्या 6 से विभाज्य है।
उत्तर

एक उत्तर है 210045। ऐसी संख्या खोजने के बजाय उसे बनाने का तरीका यह है—

चरण 1 — 15 से विभाज्य। 15 = 3 × 5, अत: संख्या का अंत 0 या 5 पर होना चाहिए और अंकों का योगफल 3 का गुणज होना चाहिए।

चरण 2 — अंतिम अंक 5 होना चाहिए, 0 नहीं। यदि अंत 0 पर होता तो उल्टी संख्या 0 से आरंभ होती और वह 6 अंकों की संख्या ही न रहती।

चरण 3 — उल्टी संख्या 6 से विभाज्य हो। 6 = 2 × 3। 3 से विभाज्यता स्वत: मिल जाती है, क्योंकि उलटने से अंक-योग नहीं बदलता। 2 से विभाज्यता के लिए उल्टी संख्या का अंत सम अंक पर होना चाहिए — अर्थात मूल संख्या का पहला अंक सम होना चाहिए

विधि: पहला अंक सम, अंतिम अंक 5, अंकों का योगफल 3 का गुणज

210045 → अंक-योग 12 ✓, अंत 5 पर ✓ → 210045 = 15 × 14003 ✓
उल्टी संख्या: 540012 → सम ✓, अंक-योग 12 ✓ → 540012 = 6 × 90002 ✓
और उत्तर: 200025 (उल्टी 520002), 402015 (उल्टी 510204), 810345 (उल्टी 543018) — सभी इसी विधि से बने हैं।
प्र11.
दीपक पुष्टि करता है कि “11 के कुछ गुणज ऐसे हैं जिन्हें दोगुना करने पर भी वह 11 के गुणज रहते हैं परंतु 11 के अन्य गुणज दोगुना करने पर भी 11 के गुणज नहीं रहते हैं।” यदि उसका अनुमान सही है तो जाँच कीजिए तथा अपने निष्कर्ष की व्याख्या कीजिए।
उत्तर

दीपक का अनुमान गलत है। 11 का प्रत्येक गुणज दोगुना करने पर भी 11 का गुणज ही रहता है — कोई अपवाद नहीं।

मान लीजिए संख्या N = 11k है
2N = 2 × 11k = 22k = 11 × (2k)

11 अब भी गुणनखंड है, अत: k कुछ भी हो, 2N, 11 का गुणज रहेगा।

11 का गुणजदोगुना÷ 11
11222 ✓
5511010 ✓
14328626 ✓
9021804164 ✓
क्यों: यह पृष्ठ 119 का नियम ही है — यदि A, k से विभाज्य है तो A के सभी गुणज k से विभाज्य होंगे। दोगुना करना A का एक गुणज ही बनाता है, अत: भाजक 11 खो नहीं सकता। न 11 में कुछ विशेष है, न दोगुना करने में; तिगुना करने या 100 से गुणा करने पर भी यही होगा।
प्र12.
निर्धारित कीजिए कि नीचे दिए गए कथन ‘सदैव सत्य’, ‘कभी-कभी सत्य’ अथवा ‘कभी सत्य नहीं’ हैं। अपने तर्क को स्पष्ट कीजिए। (i) 6 के गुणज और 3 के गुणज का गुणनफल 9 का गुणज होता है। (ii) तीन क्रमागत सम संख्याओं का योग 6 से विभाज्य होगा। (iii) यदि abcdef, 6 का एक गुणज है तो badcef भी 6 का एक गुणज होगा। (iv) 8 (7b – 3) – 4 (11b + 1), 12 का एक गुणज है।
उत्तर

(i) सदैव सत्य।

6m × 3n = 18mn = 9 × (2mn)

m और n के प्रत्येक मान के लिए 9 गुणनफल का गुणनखंड है। उदाहरण: 6 × 3 = 18 = 9 × 2 ✓; 12 × 9 = 108 = 9 × 12 ✓; 30 × 21 = 630 = 9 × 70 ✓।

(ii) सदैव सत्य।

2n + (2n + 2) + (2n + 4) = 6n + 6 = 6(n + 1)

उदाहरण: 4 + 6 + 8 = 18 = 6 × 3 ✓; 10 + 12 + 14 = 36 = 6 × 6 ✓; – 2 + 0 + 2 = 0 = 6 × 0 ✓।

संकेत: योग मध्य की संख्या का तीन गुना है और मध्य की संख्या सम है — अत: वह 3 × 2 = 6 का गुणज है।

(iii) सदैव सत्य।

abcdef से badcef बनाने में ab तथा cd आपस में बदल जाते हैं, जबकि ef अपने स्थान पर बने रहते हैं। 6 से विभाज्यता के दोनों भागों को अलग-अलग जाँचिए—

  • 2 से: इकाई अंक अब भी f ही है, अत: कुछ नहीं बदलता।
  • 3 से: अंक वही हैं, केवल स्थान बदले हैं — अंकों का योगफल अपरिवर्तित है।

दोनों जाँचें बनी रहती हैं, अत: नई संख्या 6 की गुणज है।

उदाहरण: 123456 = 6 × 20576
badcef = 214356 = 6 × 35726 ✓
एक सावधानी: यदि b = 0 हो तो नई संख्या 0 से आरंभ होगी और वह 6 अंकों की संख्या नहीं रहेगी — यद्यपि उसका मान अब भी 6 का गुणज है।

(iv) कभी सत्य नहीं।

8(7b – 3) – 4(11b + 1)
= 56b – 24 – 44b – 4
= 12b – 28
= 12(b – 2) – 4

b कुछ भी हो, व्यंजक 12 के किसी गुणज से 4 कम रहता है, अत: वह कभी 12 का गुणज नहीं हो सकता।

b = 1 → – 16   b = 2 → – 4   b = 3 → 8   b = 5 → 32
देखने का दूसरा तरीका: 12b – 28 = 4(3b – 7)। गुणनखंड 4 सदैव उपस्थित है, किंतु 3b – 7 को 3 से भाग देने पर सदैव शेषफल 2 आता है, अत: 12 के लिए आवश्यक 3 का तीसरा गुणनखंड कभी नहीं मिलता।
प्र13.
किन्हीं 3 संख्याओं का चयन कीजिए। इनका योग कब 3 से विभाज्य होगा? सभी संभावित स्थितियों का अन्वेषण कीजिए और व्यापकीकरण कीजिए।
उत्तर

प्रत्येक संख्या को 3 से भाग देकर केवल उसका शेषफल — 0, 1 या 2 — रखिए। योग 3 से विभाज्य ठीक तभी होगा जब तीनों शेषफलों का योग 0, 3 या 6 हो

n₁ = 3a + r₁, n₂ = 3b + r₂, n₃ = 3c + r₃
n₁ + n₂ + n₃ = 3(a + b + c) + (r₁ + r₂ + r₃)
3(a + b + c) वाला भाग 3 से विभाज्यता पर कोई प्रभाव नहीं डालता

प्रत्येक शेषफल 0, 1 या 2 है, अत: उनका योग 0 से 6 के बीच है। इनमें केवल 0, 3 व 6 चलते हैं और इससे उत्तर के ठीक दो रूप बनते हैं—

स्थितिशेषफलयोगउदाहरण
तीनों शेषफल समान0, 0, 00 ✓3 + 9 + 12 = 24
1, 1, 13 ✓4 + 7 + 10 = 21
2, 2, 26 ✓2 + 5 + 8 = 15
तीनों शेषफल भिन्न0, 1, 23 ✓3 + 7 + 11 = 21
ठीक दो समान1, 2, 25 ✗4 + 5 + 8 = 17
0, 0, 11 ✗3 + 6 + 7 = 16

व्यापकीकरण: तीन संख्याओं का योग 3 से विभाज्य तभी होता है जब 3 से भाग देने पर उनके शेषफल सभी समान हों या सभी भिन्न — अन्य किसी स्थिति में नहीं।

क्या आपने देखा? तीन क्रमागत संख्याओं के शेषफल किसी न किसी क्रम में सदैव 0, 1 और 2 होते हैं, अत: उनका योग सदैव 3 का गुणज होता है। यह n + (n + 1) + (n + 2) = 3(n + 1) से मेल खाता है।
प्र14.
क्या दो क्रमागत पूर्णांकों का गुणनफल सदैव 2 का गुणज होता है? क्यों? तीन क्रमागत पूर्णांकों के गुणनफल के विषय में आपका क्या विचार है? क्या यह सदैव 6 का गुणज है? क्यों अथवा क्यों नहीं? आप चार क्रमागत पूर्णांकों के गुणनफल के विषय में क्या कह सकते हैं? पाँच क्रमागत पूर्णांकों के गुणनफल के विषय में आपका क्या विचार है?
उत्तर

दो क्रमागत पूर्णांक — सदैव 2 का गुणज।

n(n + 1)
किन्हीं भी दो क्रमागत पूर्णांकों में से एक सम होता है, अत: 2 गुणनखंड है

उदाहरण: 3 × 4 = 12, 8 × 9 = 72, 15 × 16 = 240 — सभी सम।

तीन क्रमागत पूर्णांक — सदैव 6 का गुणज।

n(n + 1)(n + 2)
तीनों में से कम-से-कम एक सम है → गुणनखंड 2
किन्हीं तीन क्रमागत पूर्णांकों में ठीक एक 3 का गुणज होता है → गुणनखंड 3
2 और 3 सहअभाज्य हैं → गुणनखंड 6

उदाहरण: 1 × 2 × 3 = 6, 4 × 5 × 6 = 120 = 6 × 20, 9 × 10 × 11 = 990 = 6 × 165।

चार क्रमागत पूर्णांक — सदैव 24 का गुणज।

चार क्रमागत पूर्णांकों में दो सम होते हैं,
और उन दोनों में से एक 4 का गुणज होता है
→ गुणनखंड 4 × 2 = 8
कम-से-कम एक 3 का गुणज होता है → गुणनखंड 3
8 × 3 = 24

उदाहरण: 1 × 2 × 3 × 4 = 24, 2 × 3 × 4 × 5 = 120 = 24 × 5, 5 × 6 × 7 × 8 = 1680 = 24 × 70।

पाँच क्रमागत पूर्णांक — सदैव 120 का गुणज।

चार वाले तर्क से 24 पहले ही मिल जाता है
किन्हीं पाँच क्रमागत पूर्णांकों में ठीक एक 5 का गुणज होता है
24 × 5 = 120

उदाहरण: 1 × 2 × 3 × 4 × 5 = 120, 2 × 3 × 4 × 5 × 6 = 720 = 120 × 6, 6 × 7 × 8 × 9 × 10 = 30240 = 120 × 252।

प्रतिरूप: 2 = 2!, 6 = 3!, 24 = 4!, 120 = 5!। k क्रमागत पूर्णांकों का गुणनफल सदैव k! का गुणज होता है — क्योंकि किन्हीं भी k क्रमागत पूर्णांकों में 1 का, 2 का, 3 का, …, k का गुणज इस प्रकार उपस्थित रहता है कि सभी आवश्यक अभाज्य गुणनखंड मिल जाते हैं।
प्र15.
गूढ़ समीकरण को हल कीजिए। (i) EF × E = GGG (ii) WOW × 5 = MEOW
उत्तर

(i) E = 3, F = 7, G = 1 → 37 × 3 = 111

GGG = 111 × G = 3 × 37 × G
अत: EF × E का मान 111, 222, …, 999 में से कोई होगा

दो अंकों की संख्या EF का दहाई अंक E है और E ही गुणक भी है। गुणनखंडन जाँचिए—

GGG(2 अंक) × (1 अंक) के रूप मेंदहाई अंक = गुणक?
11137 × 33 = 3 ✓
22237 × 63 ≠ 6 ✗
33337 × 93 ≠ 9 ✗
44474 × 67 ≠ 6 ✗
66674 × 97 ≠ 9 ✗

केवल 111 = 37 × 3 बैठता है, अत: E = 3, F = 7, G = 1 — तीनों भिन्न अंक ✓

(ii) W = 5, O = 7, M = 2, E = 8 → 575 × 5 = 2875

इकाई: 5 × W का अंत W पर होना चाहिए → W = 0 या 5
W, WOW का पहला अंक है, अत: W ≠ 0 → W = 5

WOW = 505 + 10O
(505 + 10O) × 5 = 2525 + 50O
MEOW = 1000M + 100E + 10O + 5
2525 + 50O = 1000M + 100E + 10O + 5
2520 + 40O = 1000M + 100E

दाईं ओर 100 का गुणज है, अत: 2520 + 40O का अंत 00 पर होना चाहिए → O = 2 या 7।

O2520 + 40OM, Eमान्य?
22600M = 2, E = 6नहीं — M = 2, O = 2 से टकराता है
72800M = 2, E = 8हाँ
जाँच: 575 × 5 = 2875 = MEOW, जहाँ M = 2, E = 8, O = 7, W = 5 ✓
प्र16.
नीचे दिए गए कौन-से वेन आरेख 4, 8 और 32 के गुणजों के बीच संबंधों को दर्शाते हैं?
उत्तर

आरेख (iv) — वही जिसमें 32 के गुणज, 8 के गुणजों के भीतर और 8 के गुणज, 4 के गुणजों के भीतर दर्शाए गए हैं।

32 = 8 × 4, अत: 32 का प्रत्येक गुणज 8 का गुणज है
8 = 4 × 2, अत: 8 का प्रत्येक गुणज 4 का गुणज है
32 के गुणज ⊂ 8 के गुणज ⊂ 4 के गुणज
4 के गुणज 8 के गुणज 32 के गुणज 4, 12, 20 8, 24, 40 32, 64
प्रत्येक वृत्त पूर्णत: अगले के भीतर है, और तीनों में से कोई भी क्षेत्र रिक्त नहीं है।

प्रत्येक वलय में कोई न कोई संख्या होनी चाहिए, और है भी—

संख्या÷ 4÷ 8÷ 32कहाँ है
4हाँनहींनहींकेवल बाहरी वलय में
8हाँहाँनहींमध्य वलय में
32हाँहाँहाँसबसे भीतरी वृत्त में
शेष तीन क्यों गलत हैं: उनमें या तो अंतर्वेशन उलटा है (4 के गुणज 32 के गुणजों के भीतर, जिसका अर्थ होगा कि 4, 32 का गुणज है) या वृत्त अलग-अलग रखे हैं मानो 8 के कुछ गुणज 4 के गुणज न हों। दोनों ही पाठ 8 = 4 × 2 और 32 = 8 × 4 के विरुद्ध जाते हैं।
ध्यान दीजिए: इस पुनर्मुद्रण की कुछ प्रतियों में चारों वेन आरेखों के वृत्त छपे ही नहीं हैं — केवल नाम और उनके संकेतक तीर दिखाई देते हैं। तीर फिर भी इच्छित अंतर्वेशन दर्शाते हैं, और गणित उत्तर को (iv) पर निश्चित कर देता है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ