गणित प्रकाश अध्याय 5 आइए, पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
चार क्रमागत संख्याओं का योग 34 है। ये कौन-सी संख्याएँ हैं?
उत्तर

ये संख्याएँ हैं 7, 8, 9 और 10

मान लीजिए संख्याएँ n, n + 1, n + 2, n + 3 हैं
n + (n + 1) + (n + 2) + (n + 3) = 34
4n + 6 = 34
4n = 28
n = 7

जाँच: 7 + 8 + 9 + 10 = 34 ✓

संकेत: 4n + 6 सदैव सम होता है, अत: चार क्रमागत संख्याओं का योग कभी विषम नहीं हो सकता। 35 लेकर देखिए — कोई उत्तर ही नहीं मिलेगा।
प्र2.
मान लीजिए पाँच क्रमागत संख्याओं में p सबसे बड़ा है। अन्य चार संख्याओं को p के पदों में व्यक्त कीजिए।
उत्तर

अन्य चार संख्याएँ हैं p – 1, p – 2, p – 3 और p – 4

बढ़ते क्रम में पाँचों संख्याएँ हैं
p – 4, p – 3, p – 2, p – 1, p

इनका योग (p – 4) + (p – 3) + (p – 2) + (p – 1) + p = 5p – 10 = 5(p – 2) है, अत: किन्हीं भी पाँच क्रमागत संख्याओं का योग 5 का गुणज होता है।

स्वयं जाँचिए: p = 20 लीजिए। संख्याएँ 16, 17, 18, 19, 20 हैं और इनका योग 90 = 5 × 18 = 5(20 – 2) ✓
प्र3.
नीचे दिए गए प्रत्येक कथन के लिए निर्धारित कीजिए कि ‘यह सदैव सत्य है’, ‘कभी-कभी सत्य है’, या ‘कभी सत्य नहीं है’। अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए। उपयुक्तता के आधार पर जो उदाहरण हैं तथा जो उदाहरण नहीं हैं उनका उल्लेख कीजिए। बीजगणित का उपयोग करके अपने तर्क की पुष्टि कीजिए। (i) दो सम संख्याओं का योगफल 3 का एक गुणज है। (ii) यदि कोई संख्या 18 से विभाज्य नहीं है तो यह 9 से भी विभाज्य नहीं होगी। (iii) यदि दो संख्याएँ 6 से विभाज्य नहीं हैं तो उनका योगफल 6 से विभाज्य नहीं होगा। (iv) 6 के एक गुणज और 9 के एक गुणज का योगफल 3 का एक गुणज होता है। (v) 6 के एक गुणज और 3 के एक गुणज का योगफल 9 का एक गुणज होता है।
उत्तर

(i) कभी-कभी सत्य।

2m + 2n = 2(m + n) — 3 का गुणज तभी जब 3, m + n को विभाजित करे

उदाहरण: 2 + 4 = 6 ✓ तथा 4 + 8 = 12 ✓। प्रति-उदाहरण: 2 + 6 = 8 ✗ तथा 6 + 8 = 14 ✗।

(ii) कभी-कभी सत्य।

उदाहरण: 20, 18 से विभाज्य नहीं है और 9 से भी विभाज्य नहीं है ✓। प्रति-उदाहरण: 27, 18 से विभाज्य नहीं है, फिर भी 27 = 9 × 3 अर्थात 9 से विभाज्य है ✗।

ऐसा क्यों होता है: 18 के गुणज 9 के हर दूसरे गुणज हैं (9, 18, 27, 36, 45, 54 …)। अत: 9 के सभी विषम गुणज — 9, 27, 45, 63 — इस कथन को तोड़ देते हैं। जो सदैव सत्य है वह उलटा कथन है: यदि कोई संख्या 9 से विभाज्य नहीं है तो वह 18 से भी विभाज्य नहीं हो सकती।

(iii) कभी-कभी सत्य।

प्रति-उदाहरण: 8 और 10, 6 से विभाज्य नहीं हैं, किंतु 8 + 10 = 18, 6 से विभाज्य है — यहाँ कथन असफल है। उदाहरण (जहाँ कथन सत्य है): 8 और 9, 6 से विभाज्य नहीं हैं और 8 + 9 = 17 भी 6 से विभाज्य नहीं है।

दोनों संख्याओं को 6a + r और 6b + s लिखिए, जहाँ r, s ≠ 0
योग = 6(a + b) + (r + s)
6 से विभाज्य तभी जब r + s = 6 (या 12)

अत: 5 और 7 (शेषफल 5 व 1) से 12 ✓, जबकि 5 और 8 (शेषफल 5 व 2) से 13 ✗।

(iv) सदैव सत्य।

6x + 9y = 3(2x + 3y) — 3 पूरे योग का गुणनखंड है

उदाहरण: 12 + 9 = 21 = 3 × 7 ✓; 18 + 27 = 45 = 3 × 15 ✓; 6 + 90 = 96 = 3 × 32 ✓।

ऐसा क्यों होता है: 3, 6 को भी विभाजित करता है और 9 को भी, अत: वह दोनों संख्याओं को विभाजित करता है — और जो दो संख्याओं को विभाजित करता है वह उनके योग को भी विभाजित करता है।

(v) कभी-कभी सत्य।

6x + 3y = 3(2x + y) — 9 का गुणज तभी जब 3, 2x + y को विभाजित करे

उदाहरण: 18 + 9 = 27 = 9 × 3 ✓। प्रति-उदाहरण: 12 + 9 = 21 ✗ तथा 6 + 6 = 12 ✗।

प्र4.
ऐसी कुछ संख्याएँ ज्ञात कीजिए जिन्हें 3 से विभाजित करने पर शेषफल 2 प्राप्त हो और 4 से विभाजित करने पर शेषफल 2 प्राप्त हो। ऐसी सभी संख्याओं को व्यक्त करने के लिए एक बीजगणितीय व्यंजक लिखिए।
उत्तर

ऐसी संख्याएँ हैं 2, 14, 26, 38, 50, 62, … और ये ठीक 12n + 2 रूप की संख्याएँ हैं।

N को 3 से भाग देने पर शेषफल 2 → N – 2, 3 का गुणज है
N को 4 से भाग देने पर शेषफल 2 → N – 2, 4 का गुणज है
अत: N – 2, 3 और 4 का उभयनिष्ठ गुणज है
LCM (3, 4) = 12
N – 2 = 12n → N = 12n + 2
NN ÷ 3N ÷ 4
144, शेषफल 2 ✓3, शेषफल 2 ✓
268, शेषफल 2 ✓6, शेषफल 2 ✓
3812, शेषफल 2 ✓9, शेषफल 2 ✓
ऐसा क्यों होता है: दोनों शर्तें N – 2 के विषय में एक ही बात कहती हैं — वह 3 का गुणज भी हो और 4 का भी। पृष्ठ 121 पर सिद्ध नियम से वह LCM (3, 4) = 12 का गुणज होना चाहिए। इसीलिए सूची 12-12 की छलाँग लगाती है।
प्र5.
“मुझमें हैं कुछ कंकड़, बहुत अधिक तो नहीं, मैं बाँटता जब उन्हें 3 के समूहों में तो एक बच ही जाता यहीं; यदि मैं चाहूँ उन्हें युग्मों में बाँटना, मुझसे तो हो पाता नहीं, क्योंकि एक कंकड़ अकेला, अक्खड़, रह ही जाता वहीं; 5 के समूहों में बाँटने पर, फिर भी एक बचा है यहीं कहीं, किंतु 7 के समूहों में बाँटने पर, पूर्णता मिलती है सही। 100 से अधिक रखना, नहीं है मेरे लिए आसान, कहलाओगे तुम चतुर, यदि कंकड़ों की संख्या गए जान।”
उत्तर

कंकड़ों की संख्या 91 है।

पहले पहेली की प्रत्येक पंक्ति को एक शर्त में बदलिए—

पहेली की पंक्तिशर्त
3 के समूहों में एक बचता है3 से भाग पर शेषफल 1
युग्मों में नहीं बँटते, एक विषम कंकड़ बचता है2 से भाग पर शेषफल 1
5 के समूहों में भी एक बचता है5 से भाग पर शेषफल 1
7 के समूहों में पूर्णता7 से भाग पर शेषफल 0
100 से अधिक नहींसंख्या 100 से कम
2, 3 और 5 से भाग पर शेषफल 1
→ N – 1, 2, 3 व 5 का उभयनिष्ठ गुणज है
LCM (2, 3, 5) = 30
N = 30k + 1 → 1, 31, 61, 91, 121, …
100 से कम और 7 से विभाज्य: 91 = 7 × 13 ✓

91 पर पाँचों पंक्तियाँ जाँचिए: 91 = 3 × 30 + 1 ✓; 91 विषम है ✓; 91 = 5 × 18 + 1 ✓; 91 = 7 × 13 पूर्णत: ✓; 91 < 100 ✓।

यह संक्षिप्त विधि क्यों काम करती है: 100 से कम प्रत्येक संख्या जाँचने के बजाय ध्यान दीजिए कि पहली तीन पंक्तियाँ N – 1 के विषय में एक ही बात कहती हैं। इससे तीन शर्तें एक में बदल जाती हैं — और केवल चार संभावनाएँ शेष रह जाती हैं।
प्र6.
तथागत ने ऐसी अनेक संख्याएँ लिखी हैं जिन्हें 6 से विभाजित करने पर शेषफल 2 प्राप्त होता है। वह पुष्टि करता है “यदि आप ऐसी किन्हीं तीन संख्याओं का योग करें तो योगफल सदैव 6 का एक गुणज होगा।” क्या तथागत की पुष्टि सही है?
उत्तर

हाँ, तथागत की पुष्टि सही है।

तीनों संख्याएँ हैं 6a + 2, 6b + 2 और 6c + 2
योग = 6a + 6b + 6c + 6
= 6(a + b + c + 1) — 6 का गुणज
ऐसा क्यों होता है: प्रत्येक संख्या में 2 शेष रहता है और तीनों शेषफल मिलकर 6 बनाते हैं — ठीक एक और पूरा समूह। अत: कोई शेषफल बचता ही नहीं।
तीन संख्याएँयोग÷ 6
2 + 8 + 14244 ✓
8 + 20 + 326010 ✓
2 + 2 + 261 ✓
प्रयास कीजिए: केवल दो ऐसी संख्याओं को जोड़ने पर क्या होगा? (6a + 2) + (6b + 2) = 6(a + b) + 4 — कभी 6 का गुणज नहीं। तीन ही ठीक संख्या है।
प्र7.
7 से विभाजित करने पर संख्या 661 में शेषफल 3 प्राप्त होता है और संख्या 4779 में शेषफल 5 प्राप्त होता है। गणना किए बिना क्या आप बता सकते हैं कि 7 से विभाजित करने पर नीचे दिए गए व्यंजकों में शेषफल कितना होगा? हल को बीजगणितीय एवं दृश्यांकन रूप में दर्शाइए। (i) 4779 + 661 (ii) 4779 – 661
उत्तर

(i) शेषफल 1   (ii) शेषफल 2.

बीजगणितीय रूप से। प्रत्येक संख्या को 7 के गुणज व उसके शेषफल के रूप में लिखिए—

4779 = 7p + 5   661 = 7q + 3

(i) 4779 + 661 = 7p + 7q + 8
= 7(p + q) + 7 + 1
= 7(p + q + 1) + 1 → शेषफल 1

(ii) 4779 – 661 = 7p + 5 – 7q – 3
= 7(p – q) + 2 → शेषफल 2

दृश्यांकन रूप से। प्रत्येक संख्या को 7-7 की पंक्तियों में रखिए और शेष टोकनों को नीचे छोड़ दीजिए।

4779 = पूरी पंक्तियाँ, फिर 5 शेष 7-7 की 682 पंक्तियाँ 661 = पूरी पंक्तियाँ, फिर 3 शेष 7-7 की 94 पंक्तियाँ जोड़ने पर: 5 और 3 शेष मिलकर 8 होते हैं — 7 की एक और पंक्ति, और 1 शेष। 1 घटाने पर: 5 शेष में से 3 शेष निकालिए — 2 बचते हैं।
शेषफल केवल बचे हुए टोकनों से तय होता है; पूरी पंक्तियाँ कट जाती हैं।
स्वयं जाँचिए: 4779 + 661 = 5440 = 7 × 777 + 1 ✓ तथा 4779 – 661 = 4118 = 7 × 588 + 2 ✓ — किंतु यह कहने के लिए भाग देने की आवश्यकता नहीं पड़ी।
प्र8.
वह संख्या ज्ञात कीजिए जिसे 3 से विभाजित करने पर शेषफल 2 प्राप्त होता है एवं 4 से विभाजित करने पर शेषफल 3 प्राप्त होता है एवं 5 से विभाजित करने पर शेषफल 4 प्राप्त होता है। ऐसी सबसे छोटी संख्या कौन-सी है? क्या आप यह बता सकते हैं कि यह संख्या सबसे छोटी क्यों है?
उत्तर

ऐसी सबसे छोटी संख्या 59 है।

तीनों शर्तों को साथ-साथ देखिए: प्रत्येक शेषफल अपने भाजक से ठीक 1 कम है।

भाजकशेषफलअर्थ
323 के किसी गुणज से 1 कम
434 के किसी गुणज से 1 कम
545 के किसी गुणज से 1 कम
अत: N + 1, 3 का, 4 का और 5 का गुणज है
N + 1, LCM (3, 4, 5) = 3 × 4 × 5 = 60 का गुणज है
सबसे छोटा ऐसा N + 1 है 60 → N = 59

जाँच: 59 = 3 × 19 + 2 ✓, 59 = 4 × 14 + 3 ✓, 59 = 5 × 11 + 4 ✓।

59 सबसे छोटी क्यों है: N + 1 को 3, 4 व 5 का उभयनिष्ठ गुणज होना ही है और 60 उनका सबसे छोटा धनात्मक उभयनिष्ठ गुणज है। इससे छोटी कोई संख्या लेने पर N + 1 को इससे छोटा उभयनिष्ठ गुणज होना पड़ेगा, जो है ही नहीं। इस परिवार की अगली संख्याएँ हैं 119, 179, 239 — प्रत्येक पिछली से 60 अधिक।
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