गणित प्रकाश अध्याय 5 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
नीचे दिए गए कथनों में से प्रत्येक की जाँच कीजिए एवं निर्धारित कीजिए कि यह ‘सदैव सत्य है’, ‘कभी-कभी सत्य है’ या ‘कभी सत्य नहीं है’। 6. यदि कोई संख्या 9 और 4 दोनों से विभाज्य है तो यह 36 से अवश्य विभाज्य होगी।
उत्तर

सदैव सत्य।

9 = 3², 4 = 2² — इनमें कोई उभयनिष्ठ अभाज्य नहीं
LCM (9, 4) = 3² × 2² = 36

यदि संख्या 9 से विभाज्य है तो उसके अभाज्य गुणनखंडन में 3 × 3 है। यदि वह 4 से भी विभाज्य है तो उसमें 2 × 2 भी है। ये भिन्न अभाज्य हैं, अत: दोनों समूह साथ-साथ रहते हैं और 3 × 3 × 2 × 2 = 36 उस संख्या को विभाजित करता है।

उदाहरण: 36, 72, 108, 180, 900 — प्रत्येक 9 से, 4 से और 36 से विभाज्य
संकेत: सामान्य नियम है — यदि A, k से विभाज्य है और m से भी, तो A, LCM (k, m) से भी विभाज्य होगा।
प्र2.
7. यदि कोई संख्या 6 और 4 दोनों से विभाज्य है तो यह 24 से अवश्य विभाज्य होगी।
उत्तर

कभी-कभी सत्य। प्रति-उदाहरण छोटा-सा है — 12

12 ÷ 6 = 2 ✓   12 ÷ 4 = 3 ✓   किंतु 12 ÷ 24 ✗
ऐसा क्यों होता है: 6 = 2 × 3 और 4 = 2 × 2 में गुणनखंड 2 उभयनिष्ठ है। नियम केवल LCM (6, 4) = 2² × 3 = 12 तक की गारंटी देता है, 24 तक की नहीं। अत: 6 और 4 दोनों से विभाज्य प्रत्येक संख्या 12 की गुणज तो है, किंतु 12 के गुणज 12, 24, 36, 48, … में से केवल आधे ही 24 के गुणज हैं।

अत: कथन 24, 48, 72 के लिए सत्य है किंतु 12, 36, 60 के लिए असत्य। कथन 6 से तुलना कीजिए, जहाँ 9 और 4 में कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं था और गुणनफल ही LCM था।

प्र3.
8. जब आप एक विषम संख्या में एक सम संख्या जोड़ते हैं तो 6 का गुणज प्राप्त होता है।
उत्तर

कभी सत्य नहीं। एक विषम और एक सम संख्या का योग विषम होता है, जबकि 6 का प्रत्येक गुणज सम होता है।

मान लीजिए (2n) + (2m + 1) = 6j
2n + 2m = 6j – 1
2(n + m) = 6j – 1

बाईं ओर सम संख्या है; दाईं ओर एक सम संख्या से 1 कम, अर्थात विषम संख्या। सम संख्या कभी विषम संख्या के बराबर नहीं हो सकती, अत: n, m, j के ऐसे कोई मान हैं ही नहीं।

क्या आप जानते हैं? हाशिये पर पूछा गया प्रश्न — “क्या मैं एक सम संख्या को 2n और एक विषम संख्या को 2n+1 लिख सकता हूँ?” — का उत्तर यहाँ नहीं है। 2n और 2n + 1 लिखने से दोनों संख्याएँ क्रमागत हो जाएँगी। 2n और 2m + 1 लिखने पर वे स्वतंत्र रहती हैं, और इस कथन के लिए यही आवश्यक है।
प्र4.
एक संख्या ज्ञात कीजिए जिसे 5 से विभाजित करने पर 3 शेषफल प्राप्त हो। ऐसी ही कुछ अन्य संख्याएँ भी लिखिए।
उत्तर

3, 8, 13, 18, 23, 28, 33, 38, … — इनमें से प्रत्येक 5 के किसी गुणज से 3 अधिक है।

k012345
5k + 33813182328
जाँच: 18 = 5 × 3 + 3   28 = 5 × 5 + 3   103 = 5 × 20 + 3

सूची में क्रमागत संख्याओं के बीच अंतर सदैव 5 है, क्योंकि 5 के अगले गुणज पर जाने से शेष 3 अपरिवर्तित रहता है।

प्र5.
कौन-सा बीजीय व्यंजक ऐसी सभी संख्याओं को समाहित करता है? (i) 3k + 5 (ii) 3k – 5 (iii) 3k/5 (iv) 5k + 3 (v) 5k – 2 (vi) 5k – 3
उत्तर

(iv) 5k + 3 तथा (v) 5k – 2. ये दिखने में भिन्न हैं किंतु ठीक एक ही संख्या-समुच्चय बनाते हैं।

5k – 2 = 5k – 5 + 3 = 5(k – 1) + 3
विकल्पआरंभिक कुछ मान5 से भाग पर शेषफल
(i) 3k + 55, 8, 11, 14, 17बदलता रहता है — 0, 3, 1, 4, 2
(ii) 3k – 5– 2, 1, 4, 7, 10बदलता रहता है
(iii) 3k/50.6, 1.2, 1.8, …पूर्ण संख्या ही नहीं
(iv) 5k + 33, 8, 13, 18, 23सदैव 3 ✓
(v) 5k – 23, 8, 13, 18, 23 (k ≥ 1)सदैव 3 ✓
(vi) 5k – 32, 7, 12, 17, 22सदैव 2 ✗
ऐसा क्यों होता है: 5 से भाग देने पर शेषफल 3 पाने के लिए संख्या 5 के किसी गुणज में 3 जोड़कर ही बननी चाहिए। केवल 5k + c रूप के व्यंजक ऐसा कर सकते हैं, जहाँ c स्वयं 5 से भाग देने पर 3 शेष दे। यहाँ (iv) में c = 3 और (v) में c = – 2 है, और – 2 = – 5 + 3।
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