गणित प्रकाश अध्याय 5 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
प्रत्येक व्यंजक की गणना कीजिए एवं परिणाम को इनके सामने लिखिए। क्या आपको इसमें कुछ रोचक दिखाई देता है?
उत्तर

3, 4, 5, 6 के लिए आठों मान हैं — 18, 6, 8, – 4, 10, – 2, 0, – 12 — और रोचक बात यह है कि इनमें से प्रत्येक सम संख्या है

व्यंजकमानव्यंजकमान
3 + 4 + 5 + 6183 – 4 + 5 + 610
3 + 4 + 5 – 663 – 4 + 5 – 6– 2
3 + 4 – 5 + 683 – 4 – 5 + 60
3 + 4 – 5 – 6– 43 – 4 – 5 – 6– 12

दूसरी ध्यान देने योग्य बात — कोई भी मान विषम नहीं है और कोई मान दोहराया नहीं गया है।

प्र2.
अब चार अन्य क्रमागत संख्याएँ लीजिए। पूर्वानुसार ‘+’ एवं ‘–’ चिह्न लगाइए। प्रत्येक व्यंजक का मान ज्ञात कीजिए। आपने क्या अवलोकन किया?
उत्तर

5, 6, 7, 8 लेने पर—

व्यंजकमानव्यंजकमान
5 + 6 + 7 + 8265 – 6 + 7 + 814
5 + 6 + 7 – 8105 – 6 + 7 – 8– 2
5 + 6 – 7 + 8125 – 6 – 7 + 80
5 + 6 – 7 – 8– 45 – 6 – 7 – 8– 16

अवलोकन: आठों मान पुन: सम हैं। और इनमें से तीन — 0, – 2 व – 4 — ठीक वही हैं जो पहले प्राप्त हुए थे।

प्र3.
अब आप उपर्युक्त क्रियाकलाप को 4 क्रमागत संख्याओं के एक अन्य समूह (सेट) के साथ दोहराइए। अपने परिणामों को साझा कीजिए।
उत्तर

7, 8, 9, 10 लेने पर—

व्यंजकमानव्यंजकमान
7 + 8 + 9 + 10347 – 8 + 9 + 1018
7 + 8 + 9 – 10147 – 8 + 9 – 10– 2
7 + 8 – 9 + 10167 – 8 – 9 + 100
7 + 8 – 9 – 10– 47 – 8 – 9 – 10– 20

वही तीन अचर उत्तर पुन: प्राप्त हुए। संख्याओं को n, n + 1, n + 2, n + 3 लिखने पर स्पष्ट हो जाता है कि ऐसा होना ही था—

n – (n + 1) – (n + 2) + (n + 3) = 0
n – (n + 1) + (n + 2) – (n + 3) = – 2
n + (n + 1) – (n + 2) – (n + 3) = – 4
ऐसा क्यों होता है: इन तीनों में दो n जोड़े जाते हैं और दो घटाए जाते हैं, अत: सभी n कट जाते हैं। जो शेष रहता है वह एक निश्चित संख्या है जो इस बात पर निर्भर नहीं करती कि कौन-सी चार क्रमागत संख्याएँ ली गई थीं।
प्र4.
क्या यह प्रतिरूप तब भी बनता है जब किन्हीं भी 4 क्रमागत संख्याओं का चयन किया जाता है? क्या तर्कशक्ति द्वारा इसका उत्तर प्राप्त किया जा सकता है? संकेत— बीजगणित का उपयोग कीजिए और इन 8 व्यंजकों को सामान्य रूप में लिखिए।
उत्तर

हाँ — और बीजगणित इसे एक ही चरण में सिद्ध कर देता है, अधिक समूहों की जाँच किए बिना।

सामान्य व्यंजक है
n ± (n + 1) ± (n + 2) ± (n + 3)
= n(1 ± 1 ± 1 ± 1) + (0 ± 1 ± 2 ± 3)

दोनों कोष्ठकों को अलग-अलग देखिए।

  • 1 ± 1 ± 1 ± 1 का मान 4, 2, 0 या – 2 होता है — सदैव सम। अत: पहला भाग n का एक सम गुणज है।
  • 0 ± 1 ± 2 ± 3 का आरंभ 1 + 2 + 3 = 6 से होता है जो सम है, और किसी चिह्न को बदलने पर इसमें उस संख्या का दुगुना अंतर आता है — पुन: सम। अत: दूसरा भाग भी सदैव सम है।
सम + सम = सम
ऐसा क्यों होता है: मान में केवल सम अंतर ही आ सकता है, अत: वह सम से विषम की ओर कभी नहीं जा सकता। इसीलिए किसी भी चार क्रमागत संख्याओं के लिए उत्तर सम ही रहेगा — तीनों अचर मान 0, – 2, – 4 हर बार आएँगे और कक्षा में किसी को भी विषम संख्या प्राप्त नहीं होगी।
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