आठों व्यंजकों की समता समान होती है — और वह a + b + c + d की समता ही है।
| चार संख्याएँ | a + b + c + d | a + b – c – d | a – b – c – d | आठों की समता |
|---|---|---|---|---|
| 2, 5, 7, 4 | 18 | – 4 | – 14 | सम |
| 1, 2, 3, 5 | 11 | – 5 | – 9 | विषम |
| 10, 4, 6, 8 | 28 | 0 | – 8 | सम |
| 3, 3, 3, 3 | 12 | 0 | – 6 | सम |
चार क्रमागत संख्याओं में दो विषम व दो सम होती हैं, अत: a + b + c + d सदैव सम होता है — यही वह विशेष स्थिति थी जो पिछले पृष्ठ पर मिली। किन्हीं भी चार संख्याओं के लिए यह उभयनिष्ठ समता विषम भी हो सकती है, किंतु वह आठों में समान ही रहती है।