प्र1.
यह सर्वसमिका सत्य क्यों है? [a² = (a + b) (a – b) + b²]
उत्तर
यह सर्वसमिका 1C का ही पुनर्व्यवस्थित रूप है। आरंभ कीजिए—
(a + b)(a – b) = a² – b²
दोनों पक्षों में b² जोड़िए—
(a + b)(a – b) + b² = a² – b² + b²
a² = (a + b)(a – b) + b²
a² = (a + b)(a – b) + b²
इससे वर्ग निकालने का काम, दो सरल संख्याओं के गुणा में बदल जाता है।
| वर्ग | b का चयन | हल | उत्तर |
|---|---|---|---|
| 31² | b = 1 | 32 × 30 + 1 | 961 |
| 197² | b = 3 | 200 × 194 + 9 | 38809 |
| 48² | b = 2 | 50 × 46 + 4 | 2304 |
ऐसा क्यों होता है: b ऐसा चुनिए कि a + b (अथवा a – b) 10 का गुणज बन जाए। तब कठिन वर्ग के बदले एक सरल गुणनफल और एक बहुत छोटा वर्ग रह जाता है। श्रीधराचार्य (750 सामान्य संवत्) ने ठीक यही विधि दी थी।