गणित प्रकाश अध्याय 6 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
प्राकृत संख्याओं का एक युग्म लीजिए। इनके वर्गों का योगफल ज्ञात कीजिए। क्या आप इस योग को दो वर्गों के योग के रूप में लिख सकते हैं? इसे अन्य संख्याओं के युग्मों के साथ ज्ञात करने का प्रयास कीजिए। क्या आपने किसी प्रतिरूप का पता लगाया?
उत्तर

हाँ — और वे दोनों नए वर्ग, युग्म के योग और अंतर से बनते हैं।

युग्म a, ba² + b²2(a² + b²)(a + b)² + (a – b)²
2, 15103² + 1² = 10 ✓
3, 110204² + 2² = 20 ✓
5, 334688² + 2² = 68 ✓
6, 56112211² + 1² = 122 ✓
7, 46513011² + 3² = 130 ✓

प्रतिरूप: 2(a² + b²) = (a + b)² + (a – b)²।

प्र2.
क्या नीचे दी गई सर्वसमिकाएँ उपर्युक्त प्रतिरूप को समझाने में सहायक हैं? [(a + b)² = a² + 2ab + b² और (a – b)² = a² – 2ab + b²]
उत्तर

हाँ — इन्हें जोड़ते ही प्रतिरूप एक पंक्ति में सिद्ध हो जाता है।

(a + b)² + (a – b)² = (a² + 2ab + b²) + (a² – 2ab + b²)

समान पदों को जोड़िए: a² + a² = 2a², b² + b² = 2b², और 2ab – 2ab = 0।

2(a² + b²) = (a + b)² + (a – b)²

a = 6, b = 5 पर जाँच: 2(36 + 25) = 122 और 11² + 1² = 122 ✓

ऐसा क्यों होता है: दोनों मध्य पद बराबर हैं पर चिह्न विपरीत, अतः वे एक-दूसरे को समाप्त कर देते हैं। दोनों सर्वसमिकाओं को जोड़ना, दोनों वर्ग-चित्रों को जोड़ने जैसा है — एक की पट्टियाँ दूसरे के रिक्त स्थान ठीक भर देती हैं।
क्या आप जानते हैं? प्रमाण में केवल दो सर्वसमिकाओं का उपयोग हुआ है, इसलिए यह ऋणात्मक संख्याओं और भिन्नों पर भी लागू है। a = 1⁄2, b = 1⁄3 लीजिए: 2(1⁄4 + 1⁄9) = 13⁄18, और (5⁄6)² + (1⁄6)² = 25⁄36 + 1⁄36 = 26⁄36 = 13⁄18 ✓
प्र3.
यहाँ एक संबंधित प्रतिरूप दिया गया है। बीजगणित का उपयोग करके इस प्रतिरूप की व्याख्या करने का प्रयास यह निर्धारित करने के लिए कीजिए कि क्या यह प्रतिरूप सदैव लागू होता है? [9 × 9 – 1 × 1 = 10 × 8; 8 × 8 – 6 × 6 = 14 × 2; 7 × 7 – 2 × 2 = 9 × 5; 10 × 10 – 4 × 4 = 14 × 6]
उत्तर

प्रत्येक पंक्ति को दो वर्गों के अंतर के रूप में पढ़िए और दाईं ओर की संख्याओं को देखिए।

पंक्तिa, ba + ba – b
9² – 1² = 10 × 89, 1108
8² – 6² = 14 × 28, 6142
7² – 2² = 9 × 57, 295
10² – 4² = 14 × 610, 4146

अतः अनुमान है a² – b² = (a + b)(a – b)। प्रसार करने पर बात तय हो जाती है—

(a + b)(a – b) = a² – ab + ba – b²
ab + (–ab) = 0, अतः
सर्वसमिका 1C: (a + b)(a – b) = a² – b²

यह एक सच्ची सर्वसमिका है, इसलिए यह प्रतिरूप सदैव लागू होता है। आप यह सर्वसमिका पूर्व में ही ‘आइए, पता लगाएँ 5 (i)’ में देख चुके थे।

ऐसा क्यों होता है: प्रतिरूप 1 की भाँति यहाँ भी बीच के दोनों गुणनफल बराबर हैं पर चिह्न विपरीत, अतः कट जाते हैं। इसी कारण दो वर्गों का अंतर सदा एक गुणनफल में बदला जा सकता है — और इसी से 397 × 403 या 45 × 55 इतने शीघ्र हो जाते हैं।
प्र4.
सर्वसमिका 1C का उपयोग करके 98 × 102 और 45 × 55 की गणना कीजिए।
उत्तर

दोनों संख्याओं के ठीक बीच वाली संख्या खोजिए।

98 × 102 = (100 – 2)(100 + 2)
= 100² – 2²
= 10000 – 4 = 9996
45 × 55 = (50 – 5)(50 + 5)
= 50² – 5²
= 2500 – 25 = 2475
संकेत: यह विधि तब चलती है जब दोनों संख्याएँ किसी गोल संख्या से बराबर दूरी पर हों। वह मध्य संख्या a है और उनके अंतर का आधा b।
प्र5.
ज्यामितीय रूप से दर्शाइए कि (a + b) × (a – b) = a² – b² है।
उत्तर

a भुजा के वर्ग से आरंभ कीजिए और एक कोने से b भुजा का वर्ग काट दीजिए। बचा हुआ क्षेत्रफल a² – b² है और उसका आकार अंग्रेज़ी के L जैसा है।

इस L को दो आयतों में काटिए और एक को खिसकाकर दूसरे के साथ लगाइए—

  • आयत 1: चौड़ाई a, ऊँचाई (a – b)
  • आयत 2: चौड़ाई b, ऊँचाई (a – b)

आयत 2 को आयत 1 के बगल में रखने पर (a + b) चौड़ा और (a – b) ऊँचा एक ही आयत बन जाता है।

a × (a – b) (a–b) × b कटा हुआ a a × (a – b) a + b a – b
a² – b² क्षेत्रफल वाले L आकार के भाग को काटकर (a + b) × (a – b) का एक आयत बनाया गया है।
a² – b² = L का क्षेत्रफल = (a + b)(a – b)
ऐसा क्यों होता है: काटने और खिसकाने से क्षेत्रफल कभी नहीं बदलता। दोनों आयतों की ऊँचाई एक ही (a – b) है, अतः वे ठीक-ठीक साथ बैठ जाते हैं और उनकी चौड़ाइयाँ a तथा b मिलकर a + b बनाती हैं।
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