गणित प्रकाश अध्याय 7 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
उदाहरण 6— जब नीलिमा की आयु 3 वर्ष थी तब उसकी माताजी की आयु उससे 10 गुना थी। नीलिमा और उसकी माताजी की आयु का अनुपात क्या था? जब नीलिमा की आयु 12 वर्ष होगी तब उनकी आयु का अनुपात क्या होगा? क्या यह अनुपात एक समान रहेगा?
उत्तर

3 वर्ष की आयु पर अनुपात 1 : 10 है; 12 वर्ष की आयु पर 4 : 13नहीं, यह एक समान नहीं रहता।

नीलिमा 3, माताजी 3 × 10 = 30 → 3 : 30 = 1 : 10
12 − 3 = 9 वर्ष पश्चात माताजी 30 + 9 = 39 वर्ष की
12 : 39, म.स.प. = 3 → 4 : 13
ऐसा क्यों होता है: दोनों आयु में 9 वर्ष जोड़े गए। अनुपात के दोनों पदों में समान संख्या जोड़ने से अनुपात बना नहीं रहता; वह केवल समान गणक से गुणा करने पर बना रहता है। समानुपाती रहने के लिए नीलिमा के 12 वर्ष के होने पर माताजी को 120 वर्ष का होना पड़ता, जो असंभव है। आयु समानुपाती रहती ही नहीं; स्थिर रहता है 27 वर्ष का अंतर।
क्या आप जानते हैं? दोनों आयु बढ़ने के साथ अनुपात धीरे-धीरे 1 : 1 की ओर खिसकता जाता है। 30 और 57 पर वह 10 : 19 है, 60 और 87 पर 20 : 29। इसी कारण आयु का अंतर बालक और अभिभावक के बीच बहुत बड़ा लगता है और दो वयस्कों के बीच लगभग नगण्य।
प्र2.
उदाहरण 7— निम्नलिखित अनुपातों के लिए लुप्त संख्याएँ लिखिए जो 14 : 21 के समानुपाती हों। ______ : 42, 6 : ______, 2 : ______
उत्तर

28 : 42, 6 : 9, 2 : 3।

14 : 21 का सरलतम रूप 2 : 3 है (म.स.प. = 7)

___ : 42 → 42 ÷ 21 = 2, अत: प्रथम पद = 14 × 2 = 28
6 : ___ → 6 ÷ 14 = 3⁄7, अत: दूसरा पद = 21 × 3⁄7 = 9
2 : ___ → 14 ÷ 7 = 2, अत: दूसरा पद = 21 ÷ 7 = 3
स्वयं जाँचिए: प्रत्येक उत्तर का सरलतम रूप 2 : 3 होना चाहिए — और 28 : 42, 6 : 9 तथा 2 : 3 तीनों का यही है। वज्र गुणन दूसरी जाँच है: 14 × 42 = 588 = 21 × 28।
प्र3.
दूसरे अनुपात के लिए प्रथम पद 6 है। 14 को किस गणक से गुणा करना चाहिए कि हमें 6 प्राप्त हो जाए? क्या यह एक पूर्णांक हो सकता है या यह एक भिन्न होना चाहिए?
उत्तर

गणक 3⁄7 है — यह भिन्न ही होगा, पूर्णांक नहीं।

14y = 6
y = 6⁄14 = 3⁄7
पूर्णांक क्यों नहीं हो सकता: 6, 14 से छोटा है, अत: गणक 1 से कम होना चाहिए, और 1 से छोटा एकमात्र पूर्णांक 0 है जो यहाँ किसी काम का नहीं। 1 से छोटा गणक राशि को घटाता है — इसमें कुछ असामान्य नहीं। यही 3⁄7 दूसरे पद पर लगाने से 21 × 3⁄7 = 9 मिलता है, अत: अनुपात 6 : 9 है।
प्र4.
यह कॉफी कड़क क्यों है?
उत्तर

क्योंकि कप में कॉफी के घोल का भाग अधिक है।

सामान्य: 15 मिली. घोल + 35 मिली. दूध = 50 मिली. कप → घोल 15⁄50 = 30%
कड़क: 20 मिली. घोल + 30 मिली. दूध = 50 मिली. कप → घोल 20⁄50 = 40%

दोनों कप 50 मिली. के ही हैं, पर दूसरे में 5 मिली. घोल अधिक और 5 मिली. दूध कम है। अनुपात की भाषा में 15 : 35 = 3 : 7, अब 20 : 30 = 2 : 3 हो गया, और दूध के प्रत्येक भाग पर 2 : 3 में घोल अधिक है।

संकेत: दो अनुपातों की त्वरित तुलना के लिए एक पद को समान कीजिए। 3 : 7 ज्यों का त्यों है और 2 : 3 वही है जो 4.67 : 7 — उतने ही दूध पर स्पष्टत: अधिक घोल।
प्र5.
यह कॉफी कम कड़क क्यों है?
उत्तर

क्योंकि कप में कॉफी के घोल का भाग कम है।

कम कड़क: 10 मिली. घोल + 40 मिली. दूध = 50 मिली. कप → घोल 10⁄50 = 20%
अनुपात 10 : 40 = 1 : 4, जबकि सामान्य 15 : 35 = 3 : 7

इस कप में दूध के प्रत्येक 4 भागों पर घोल का केवल 1 भाग है, जबकि सामान्य कप में प्रत्येक 2⅓ भाग दूध पर 1 भाग घोल होता है। दूध की तुलना में घोल कम होने का अर्थ है हल्का स्वाद।

मात्रा नहीं, अनुपात क्यों: मंजुनाथ एक जग में 100 मिली. घोल और 400 मिली. दूध डाल सकते हैं। यह सामान्य कप से कहीं अधिक घोल है, फिर भी कॉफी हल्की ही रहेगी — क्योंकि कड़कपन अनुपात 1 : 4 से तय होता है, कुल मात्रा से नहीं।
प्र6.
निम्नलिखित तालिका में मंजुनाथ द्वारा दूध के साथ कॉफी के घोल को मिलाने के विभिन्न अनुपात दर्शाए गए हैं। अंतिम स्तंभ में लिखिए कि कॉफी सामान्य कॉफी से अधिक कड़क है या कम कड़क।
उत्तर

प्रत्येक पंक्ति को सरलतम रूप में लाकर सामान्य मिश्रण 15 : 35 = 3 : 7 से तुलना कीजिए।

कॉफी का घोल (मिली में)दूध (मिली में)सरलतम रूपकप में घोलसामान्य/कड़क/कम कड़क
3006001 : 2300⁄900 = 33.3%कड़क
1505003 : 10150⁄650 = 23.1%कम कड़क
2004001 : 2200⁄600 = 33.3%कड़क
24563 : 724⁄80 = 30%सामान्य
1003001 : 3100⁄400 = 25%कम कड़क
सरलतम रूप से तुलना क्यों चलती है: सामान्य कॉफी में 3 भाग घोल पर 7 भाग दूध होता है, अर्थात 30% घोल। कोई मिश्रण तभी कड़क है जब उसमें घोल का भाग 30% से ऊपर हो। चौथी पंक्ति स्वयं 3 : 7 में सिमट जाती है, अत: 24 मिली. और 56 मिली. वास्तव में साधारण फिल्टर कॉफी का ही छोटा कप है — मात्राएँ भिन्न, पेय वही।
संकेत: पहली और तीसरी पंक्ति की मात्राएँ भिन्न हैं (300 : 600 तथा 200 : 400) पर सरलतम रूप एक ही 1 : 2 है, अत: दोनों का स्वाद ठीक एक जैसा होगा। अनुपात को सरल करने का यही प्रयोजन है — वह मात्रा हटा देता है और विधि छोड़ जाता है।
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