गणित प्रकाश अध्याय 7 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
गतिविधि 3— एक युग्म बनाइए। गणना योग्य 12 वस्तुएँ या गणक लीजिए। ये काउंटर्स, ये सिक्के, बीज या कंकड़ भी हो सकते हैं। अब आप दोनों इन्हें आपस में भिन्न प्रकार से बाँट लीजिए। यदि आप इन्हें समान रूप में बाँट लेते हैं तो आप में से प्रत्येक के पास उपलब्ध गणना योग्य वस्तुओं की संख्या का अनुपात क्या होगा?
उत्तर

6 : 6, जिसका सरलतम रूप 1 : 1 है।

12 ÷ 2 = प्रत्येक को 6 गणक
6 : 6, म.स.प. = 6 → 1 : 1
“समान रूप से” का अर्थ 1 : 1 ही क्यों है: सरलतम रूप कुल संख्या को हटा देता है और केवल तुलना रखता है। 12 गणक समान रूप से बाँटिए, या 50, या 400 — सदैव 1 : 1 ही मिलेगा, अर्थात आपके प्रत्येक एक गणक पर साथी को भी एक। “समान रूप से” शब्द यही सूचना देता है।
प्र2.
यदि आपके साथी को 5 गणक मिलते हैं तो आपको कितने गणक प्राप्त होंगे? बताइए कि गणक प्राप्ति का क्या अनुपात होगा?
उत्तर

आपको 7 गणक मिलेंगे, और साथी के गणकों का आपके गणकों से अनुपात 5 : 7 होगा।

12 − 5 = 7
साथी : आप = 5 : 7, और 5 तथा 7 का म.स.प. 1 है, अत: यह पहले से ही सरलतम है
संकेत: क्रम महत्त्वपूर्ण है। आपके गणकों का साथी के गणकों से अनुपात 7 : 5 होगा, जो 5 : 7 से भिन्न है। सदैव बताइए कि पहले कौन-सी राशि रखी गई है।
प्र3.
अब यदि आप दोनों आपस में 3 : 1 के अनुपात में गणक बाँटना चाहते हैं तो आप में से प्रत्येक को कितने गणक प्राप्त होंगे?
उत्तर

आपके साथी को 9 और आपको 3 गणक मिलेंगे।

3 और 1 करके बाँटते जाइए और देखिए कहाँ पहुँचते हैं —

चरणसाथी लेता हैआप लेते हैंशेष गणक
आरंभ12
1318
2314
3310
कुल93
अथवा एक ही चरण में: 3 + 1 = 4 समूह, प्रत्येक समूह = 12 ÷ 4 = 3 गणक
साथी: 3 × 3 = 9 आप: 1 × 3 = 3
जाँच: 9 : 3 = 3 : 1 ✓ तथा 9 + 3 = 12 ✓
संपूर्ण 4 क्यों बनता है, 3 या 1 क्यों नहीं: अनुपात 3 : 1 गणकों को चार समान समूहों के रूप में देखता है — तीन एक व्यक्ति के और एक दूसरे का। संख्या 12, 4 का 3 गुना है, अत: अनुपात 3 : 1 को 3 से बढ़ाकर 9 : 3 मिलता है। पदों के योग से भाग देना ही वह क्रिया है जो तुलना को वास्तविक मात्राओं में बदलती है।
प्र4.
अब यदि आप दोनों व्यक्तियों में 42 गणकों को 4 : 3 के अनुपात में बाँटना चाहते हैं तो आप इसे किस प्रकार बाँटेंगे?
उत्तर

आपके साथी को 24 और आपको 18 गणक मिलेंगे।

कुल समूह = 4 + 3 = 7
प्रत्येक समूह का आकार = 42 ÷ 7 = 6
साथी: 4 × 6 = 24 आप: 3 × 6 = 18
जाँच: 24 + 18 = 42 ✓ तथा 24 : 18 = 4 : 3 ✓
बार-बार बाँटते जाना अच्छी युक्ति क्यों नहीं है: 4 और 3 करके बाँटना चलता तो है, पर उसमें छह चरण लगते हैं और यह अंत में ही पता चलता है कि गणक ठीक-ठीक बँटे या नहीं। 7 समान समूहों में बाँटना एक ही भाग में उत्तर दे देता है, और यह भी तुरंत बता देता है कि बँटवारा कब असंभव है — 40 गणकों को 4 : 3 में बाँटने के लिए समूह 40⁄7 का होता, जो पूरा गणक नहीं है।
संकेत: सामान्यत: x को m : n में बाँटने पर भाग m × x⁄(m+n) तथा n × x⁄(m+n) होते हैं। यहाँ 4 × 42⁄7 = 24 और 3 × 42⁄7 = 18।
प्र5.
प्रत्येक समूह का आकार क्या है?
उत्तर

6 गणक।

समूहों की संख्या = 4 + 3 = 7
प्रत्येक समूह का आकार = 42 ÷ 7 = 6

सातों समूहों में 6-6 गणक हैं; इनमें से चार समूह आपके साथी को और तीन आपको मिलते हैं।

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