गणित प्रकाश अध्याय 7 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आपको उपर्युक्त चित्रों में से कौन-से चित्र एक समान और कौन-से भिन्न दिखाई दे रहे हैं?
उत्तर

चित्र 'क', 'ग' और 'घ' एक समान दिखाई देते हैं तथा चित्र 'ख' और 'ङ' भिन्न दिखाई देते हैं — जबकि पाँचों में वही एक बाघ है।

'क' → 60 मिमी. × 40 मिमी. → 3 : 2
'ग' → 30 मिमी. × 20 मिमी. → 3 : 2
'घ' → 90 मिमी. × 60 मिमी. → 3 : 2
'ख' → 40 मिमी. × 20 मिमी. → 2 : 1
'ङ' → 60 मिमी. × 60 मिमी. → 1 : 1
90 × 60 3 : 2 60 × 40 3 : 2 60 × 60 1 : 1 40 × 20 2 : 1 30 × 20 3 : 2
चौड़ाई और ऊँचाई मिमी. में, मापानुसार। नीले आयतों का सरलतम रूप 3 : 2 है; लाल आयतों का नहीं।
ऐसा क्यों होता है: एक समान दिखने का अर्थ एक ही आकार का होना नहीं है। 'क', 'ग' और 'घ' तीन भिन्न आकारों के हैं — 'ग' प्रत्येक दिशा में 'क' का आधा है, 'घ' डेढ़ गुना — फिर भी तीनों में एक संख्या साझी है, चौड़ाई से ऊँचाई का अनुपात 3 : 2। यही एक संख्या फ्रेम का आकार तय करती है, और इसी से यह भी तय होता है कि भीतर का बाघ सही खिंचा है या दबा हुआ।
प्र2.
क्या चित्र 'ख' और 'ङ' अन्य तीन चित्रों के समान प्रतीत होते हैं?
उत्तर

नहीं। ये विकृत हैं। चित्र 'ख' में बाघ लंबा दिखाई देता है और 'ङ' में संकुचित एवं मोटा।

'ख' → 40 : 20 = 2 : 1 (अपनी ऊँचाई के अनुपात में अधिक चौड़ा)
'ङ' → 60 : 60 = 1 : 1 (अपनी ऊँचाई के अनुपात में कम चौड़ा)

2 : 1 वाला फ्रेम 3 : 2 वाले फ्रेम से सापेक्ष रूप में अधिक चौड़ा है, अत: उसी बाघ को भरने के लिए उसे बगल में खींचना पड़ता है। 1 : 1 वाला फ्रेम सापेक्ष रूप में अधिक ऊँचा है, अत: बाघ बगल से दब जाता है — वह छोटा और मोटा दिखता है।

प्र3.
ऐसा क्यों?
उत्तर

क्योंकि 'ख' और 'ङ' में चौड़ाई और ऊँचाई में समान गणक से परिवर्तन नहीं हुआ है

'क' → 'ख' : चौड़ाई 60 → 40, गणक 40⁄60 = 2⁄3 ; ऊँचाई 40 → 20, गणक 20⁄40 = 1⁄2
'क' → 'ङ' : चौड़ाई 60 → 60, गणक 1 ; ऊँचाई 40 → 60, गणक 60⁄40 = 3⁄2

दोनों स्थितियों में गणक भिन्न हैं, अत: एक दिशा दूसरी से अधिक खिंच गई।

सरल उत्तर पर्याप्त क्यों नहीं है: यह कहना सरल लगता है कि “'ङ' इसलिए भिन्न दिखता है क्योंकि वह वर्गाकार है और शेष आयताकार।” किंतु 'ख' भी आयताकार है और फिर भी भिन्न दिखता है। अत: आयताकार होना कसौटी नहीं है। कसौटी यह है कि परिवर्तन के दोनों गणक समान हैं या नहीं।
प्र4.
चित्र 'क', 'ग' और 'घ' एक समान क्यों दिखाई देते हैं? साथ ही 'ख' और 'ङ' भिन्न क्यों दिखते हैं?
उत्तर

'क', 'ग' और 'घ' एक-दूसरे से चौड़ाई और ऊँचाई दोनों को समान गणक से गुणा करके प्राप्त होते हैं। 'ख' और 'ङ' इस प्रकार प्राप्त नहीं होते।

'क' सेचौड़ाई का गणकऊँचाई का गणकसमान?
'ग' (30 × 20)30⁄60 = 1⁄220⁄40 = 1⁄2हाँ — एक समान
'घ' (90 × 60)90⁄60 = 3⁄260⁄40 = 3⁄2हाँ — एक समान
'ख' (40 × 20)40⁄60 = 2⁄320⁄40 = 1⁄2नहीं — विकृत
'ङ' (60 × 60)60⁄60 = 160⁄40 = 3⁄2नहीं — विकृत
ऐसा क्यों होता है: देखिए 'ख' वास्तव में कैसे बना — चौड़ाई से 20 मिमी. और ऊँचाई से भी 20 मिमी. घटाए गए। अंतर समान है, फिर भी चित्र विकृत हो गया। कारण यह है कि 20 मिमी., 60 मिमी. चौड़ाई का एक-तिहाई है परंतु 40 मिमी. ऊँचाई का आधा — वही घटाव प्रत्येक भुजा का भिन्न भाग खा जाता है। आकार भागों पर निर्भर है, अत: वह गुणा से सुरक्षित रहता है और जोड़-घटाव से नष्ट हो जाता है। जिन परिवर्तनों में गणक समान हो, उन्हें समानुपातिक कहते हैं।
प्र5.
क्या आप बता सकते हैं कि चित्र 'घ' की चौड़ाई और ऊँचाई में चित्र 'क' की तुलना में किस गणक से परिवर्तन हुआ है? क्या गणक समान हैं?
उत्तर

दोनों गणक 3⁄2 हैं, अत: हाँ, वे समान हैं।

चौड़ाई: 60 × f = 90 ⇒ f = 90⁄60 = 3⁄2
ऊँचाई: 40 × f = 60 ⇒ f = 60⁄40 = 3⁄2

'घ' वस्तुत: 'क' का प्रत्येक दिशा में डेढ़ गुना बड़ा रूप है। इसी कारण 'घ' पाँचों में सबसे बड़ा होते हुए भी ठीक 'क' जैसा ही दिखता है।

स्वयं जाँचिए: उल्टी दिशा में चलिए — 'घ' से 'क' तक गणक दोनों दिशाओं में 2⁄3 है (90 × 2⁄3 = 60 तथा 60 × 2⁄3 = 40)। समानुपातिक परिवर्तन को उलटने पर पुन: समानुपातिक परिवर्तन ही मिलता है।
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