मल्हार अध्याय 1 आपकी कविता

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
देश-प्रेम से जुड़े अपने विचारों को आधार बनाते हुए कविता को आगे बढ़ाइए— “वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।” ______
उत्तर

यह आपकी अपनी रचना है, इसलिए उत्तर हर विद्यार्थी का अलग होगा। पर कविता को आगे बढ़ाते समय तीन बातें कवि जैसी ही रखनी हैं

  1. वाक्य का साँचा — “जो / जिसने / जिसमें … , वह / उसका … नहीं।” पूरी कविता इसी साँचे में चलती है।
  2. तुक — दूसरी और चौथी पंक्ति ‘–आर नहीं’ पर समाप्त हो (पार नहीं, सार नहीं, उद्धार नहीं, भार नहीं, प्यार नहीं)।
  3. अंत में टेक — अपनी पंक्तियों के बाद वही दो पंक्तियाँ लौटाइए जो कवि हर बार लौटाता है।
नमूना उत्तर:
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
जो अपनी भाषा भूल गया,
उसका कोई घर-बार नहीं।

जिसने न बचाई बूँद एक,
उसका जल पर अधिकार नहीं।
जो श्रम से जी चुराता है,
उसके हिस्से त्यौहार नहीं।

जो पेड़ काटकर हँसता है,
उससे बढ़कर बीमार नहीं।
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥
यह नमूना ठीक क्यों बैठता है: हर जोड़े में पहले शर्त है और फिर फ़ैसला — ठीक कवि की तरह। तुक हर बार ‘–आर नहीं’ पर आकर ठहरता है, इसलिए इसे मूल कविता के साथ मिलाकर गाया जा सकता है। और विषय भी वही रहे हैं जो एक विद्यार्थी के अपने जीवन से जुड़ते हैं — भाषा, पानी, श्रम, पेड़।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ