प्र1.
“जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े, पाया जिसमें दाना-पानी। हैं माता-पिता बंधु जिसमें, हम हैं जिसके राजा-रानी॥” इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों को ध्यान से देखिए। ‘दाना-पानी’ और ‘राजा-रानी’ इन शब्दों की अंतिम ध्वनि एक-सी है। इस विशेषता को ‘तुक मिलाना’ कहते हैं। अब नीचे दिए गए प्रश्नों पर पाँच-पाँच के समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए। (क) शब्दों के तुक मिलाने से कविता में क्या विशेष प्रभाव पड़ा है?
उत्तर
तुक मिलने से कविता में लय बनती है — पढ़ते समय कान को हर दूसरी पंक्ति के अंत पर एक जानी-पहचानी ध्वनि सुनाई देती है, इसलिए पंक्तियाँ अलग-अलग नहीं, एक धागे में गुँथी हुई लगती हैं।
इस कविता के तुक —
| पंक्तियों के अंतिम शब्द | एक-सी ध्वनि |
|---|---|
| दाना-पानी / राजा-रानी / लासानी / दीवानी | –आनी |
| पार नहीं / उद्धार नहीं / सार नहीं / भार नहीं / तलवार नहीं / प्यार नहीं | –आर नहीं |
| जाने को / परवानों को | –ओ |
तुक से चार लाभ हुए —
- गेयता — कविता गाई जा सकती है। यह आह्वान गीत है, इसलिए सामूहिक स्वर में गाया जाना इसकी सबसे बड़ी ज़रूरत थी।
- याद रह जाना — तुक कान को अगला शब्द पहले ही बता देता है, इसलिए पंक्ति जल्दी कंठस्थ हो जाती है।
- बल — तुक वाला शब्द पंक्ति के अंत में आकर ठहरता है, इसलिए उसी पर ज़ोर पड़ता है। यहाँ ‘नहीं’ बार-बार तुक बनकर आता है और पूरी कविता का निषेध-भाव उसी एक शब्द पर टिक जाता है।
- बँधाव — दो-दो पंक्तियाँ जुड़कर एक इकाई बन जाती हैं, जिससे भाव टुकड़ों में नहीं बिखरता।