मल्हार अध्याय 1 हमारे अस्त्र-शस्त्र

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।” देश की सीमा पर सैनिक सुरक्षा प्रहरी की भाँति खड़े रहते हैं। वे बुरी भावना से अतिक्रमण करने वाले का सामना तोप, तलवार, बंदूक आदि से करते हैं। आप बताइए कि निम्नलिखित स्वदेश प्रेमियों के अस्त्र-शस्त्र क्या होंगे? • विद्यार्थी • अध्यापक • कृषक • चिकित्सक • वैज्ञानिक • श्रमिक • पत्रकार
उत्तर

‘अस्त्र-शस्त्र’ यहाँ रूपक है। हर व्यक्ति का हथियार वही है जिससे वह अपना काम करता है और देश को आगे बढ़ाता है।

स्वदेश प्रेमीउसके अस्त्र-शस्त्रवह किससे लड़ता है
विद्यार्थीपुस्तक, कलम, जिज्ञासा, अनुशासन और परिश्रमअज्ञान और आलस्य से
अध्यापकज्ञान, धैर्य, अपना चरित्र और प्रेरणा देने की शक्तिअंधविश्वास और भेदभाव से
कृषकहल और ट्रैक्टर, बीज, खाद-पानी, मिट्टी की समझ और अथक श्रमभूख से
चिकित्सकचिकित्सा-ज्ञान, औषधि, शल्य-उपकरण और सेवा-भावरोग और महामारी से
वैज्ञानिकप्रयोगशाला, तर्क, निरीक्षण और नए-नए आविष्कारपिछड़ेपन और अंधविश्वास से
श्रमिकअपने हाथ, हुनर, औज़ार और श्रम-निष्ठाअभाव और बेकारी से
पत्रकारकलम, सच्चाई, निर्भीकता और सही प्रश्न पूछने का साहसझूठ, अन्याय और भ्रष्टाचार से
यही तो कविता कह रही है: कवि पूछता है — “क्या तोप नहीं तलवार नहीं।” उसका उत्तर यही है कि हथियार बाहर से नहीं आते। जो काम आपके हिस्से आया है, उसे पूरी निष्ठा से करना ही आपका हथियार है। इसीलिए यह कविता स्वतंत्रता आंदोलन के दिनों में उन लाखों लोगों तक पहुँच सकी जिनके पास कोई हथियार नहीं था।
Try This: इसी तालिका में दो पंक्तियाँ अपनी ओर से जोड़िए — जैसे कलाकार (उसका अस्त्र क्या होगा?) और सैनिक की माँ। सोचिए कि उनका हथियार क्या हो सकता है।
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