मल्हार अध्याय 1 खोजबीन के लिए

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग कर आप देश-प्रेम और स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित रचनाएँ पढ़ सकते हैं— • सारे जहाँ से अच्छा • दीवानों की हस्ती • झाँसी की रानी
उत्तर

पुस्तक में तीनों रचनाओं के लिए क्यू-आर कोड / कड़ियाँ दी गई हैं। पढ़ने से पहले हर रचना के बारे में इतना जान लीजिए —

रचनारचयिताकिस बारे मेंप्रसिद्ध पंक्ति
सारे जहाँ से अच्छा
(तराना-ए-हिंदी)
मुहम्मद इक़बाल (सन् 1904)भारत की सुंदरता, उसकी नदियों-पर्वतों और उसकी मिली-जुली संस्कृति का गीत। इसमें कहा गया है कि यहाँ अनेक धर्म और भाषाएँ होते हुए भी हम सब एक हैं।“सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्ताँ हमारा, हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिसताँ हमारा”
दीवानों की हस्तीभगवतीचरण वर्मामस्तमौला, निर्भय और स्वच्छंद जीवन का गीत — जो कहीं टिकते नहीं, जो देकर जाते हैं, लेकर नहीं। स्वतंत्रता के दिनों में यही निर्भीकता और त्याग का भाव देश-प्रेम से जोड़कर पढ़ा गया।“हम दीवानों की क्या हस्ती, हैं आज यहाँ कल वहाँ चले”
झाँसी की रानीसुभद्राकुमारी चौहानसन् 1857 के संग्राम में लड़ने वाली रानी लक्ष्मीबाई की वीर-गाथा। यह वीर रस की सबसे लोकप्रिय हिंदी कविता मानी जाती है।“ख़ूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी”

खोजबीन कैसे कीजिए —

  • पुस्तक में दिए क्यू-आर कोड को स्कैन कीजिए, या विद्यालय के पुस्तकालय से इन कवियों के संग्रह माँगिए। ये तीनों रचनाएँ अधिकतर हिंदी काव्य-संग्रहों में मिल जाती हैं।
  • इंटरनेट पर खोजते समय ध्यान रखिए कि रचयिता का नाम भी मिलाकर देखें, क्योंकि एक ही नाम की और भी रचनाएँ हो सकती हैं।
  • पढ़ने के बाद अपनी कॉपी में हर रचना के लिए तीन बातें लिखिए — वह किस भाव की कविता है, उसमें सबसे अच्छी लगी पंक्ति, और ‘स्वदेश’ से उसका क्या मेल है
तुलना के लिए एक संकेत: ‘स्वदेश’ कहती है — “जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं।” अब ‘झाँसी की रानी’ पढ़िए और देखिए कि रानी लक्ष्मीबाई उसी साहस का जीता-जागता उदाहरण कैसे बन जाती हैं। दो अलग कविताएँ इस तरह एक-दूसरे को खोल देती हैं।
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