प्र1.
नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग कर आप देश-प्रेम और स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित रचनाएँ पढ़ सकते हैं— • सारे जहाँ से अच्छा • दीवानों की हस्ती • झाँसी की रानी
उत्तर
पुस्तक में तीनों रचनाओं के लिए क्यू-आर कोड / कड़ियाँ दी गई हैं। पढ़ने से पहले हर रचना के बारे में इतना जान लीजिए —
| रचना | रचयिता | किस बारे में | प्रसिद्ध पंक्ति |
|---|---|---|---|
| सारे जहाँ से अच्छा (तराना-ए-हिंदी) | मुहम्मद इक़बाल (सन् 1904) | भारत की सुंदरता, उसकी नदियों-पर्वतों और उसकी मिली-जुली संस्कृति का गीत। इसमें कहा गया है कि यहाँ अनेक धर्म और भाषाएँ होते हुए भी हम सब एक हैं। | “सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्ताँ हमारा, हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिसताँ हमारा” |
| दीवानों की हस्ती | भगवतीचरण वर्मा | मस्तमौला, निर्भय और स्वच्छंद जीवन का गीत — जो कहीं टिकते नहीं, जो देकर जाते हैं, लेकर नहीं। स्वतंत्रता के दिनों में यही निर्भीकता और त्याग का भाव देश-प्रेम से जोड़कर पढ़ा गया। | “हम दीवानों की क्या हस्ती, हैं आज यहाँ कल वहाँ चले” |
| झाँसी की रानी | सुभद्राकुमारी चौहान | सन् 1857 के संग्राम में लड़ने वाली रानी लक्ष्मीबाई की वीर-गाथा। यह वीर रस की सबसे लोकप्रिय हिंदी कविता मानी जाती है। | “ख़ूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी” |
खोजबीन कैसे कीजिए —
- पुस्तक में दिए क्यू-आर कोड को स्कैन कीजिए, या विद्यालय के पुस्तकालय से इन कवियों के संग्रह माँगिए। ये तीनों रचनाएँ अधिकतर हिंदी काव्य-संग्रहों में मिल जाती हैं।
- इंटरनेट पर खोजते समय ध्यान रखिए कि रचयिता का नाम भी मिलाकर देखें, क्योंकि एक ही नाम की और भी रचनाएँ हो सकती हैं।
- पढ़ने के बाद अपनी कॉपी में हर रचना के लिए तीन बातें लिखिए — वह किस भाव की कविता है, उसमें सबसे अच्छी लगी पंक्ति, और ‘स्वदेश’ से उसका क्या मेल है।
तुलना के लिए एक संकेत: ‘स्वदेश’ कहती है — “जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं।” अब ‘झाँसी की रानी’ पढ़िए और देखिए कि रानी लक्ष्मीबाई उसी साहस का जीता-जागता उदाहरण कैसे बन जाती हैं। दो अलग कविताएँ इस तरह एक-दूसरे को खोल देती हैं।