मल्हार अध्याय 1 साझी समझ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आपने ‘स्वदेश’ कविता और ‘खादी गीत’ का उपर्युक्त अंश पढ़ा। स्वतंत्रता आंदोलन के समय लिखी गई दोनों कविताओं में देश-प्रेम किस प्रकार अभिव्यक्त हुआ है? साथियों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए। साथ ही ‘खादी गीत’ पूरी कविता को पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए।
उत्तर

दोनों कविताएँ स्वतंत्रता आंदोलन के दिनों की हैं और दोनों का लक्ष्य एक है — देश-प्रेम जगाना। पर दोनों का रास्ता अलग है

आधारस्वदेश — गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’खादी गीत — सोहनलाल द्विवेदी
देश-प्रेम किस रूप मेंहृदय की एक भावना और एक कसौटी — जिसमें यह भाव नहीं, वह हृदय ही नहींएक ठोस वस्तु के रूप में — खादी का कपड़ा, जिसे पहनकर देश-प्रेम जिया जाता है
स्वरललकार और चुनौती का — कवि झकझोरता हैप्रेम और कोमलता का — कवि पुचकारता है
तरीक़ानिषेध से — “जिसमें… नहीं”, “वह… नहीं”विधान से — “भरा”, “भरा”, “भरा”
मुख्य बिंबपत्थर, काल-दीप, परवाना, तोप-तलवार — कठोर और वीर बिंबधागा, रेशा, चाँदनी, मुसकान — कोमल और घरेलू बिंब
पाठक से माँगसाहस दिखाओ, जोश जगाओ, समाज के साथ चलोस्वदेशी अपनाओ, विदेशी वस्त्र छोड़ो
रिश्ता किससे जोड़ादेश से — मिट्टी, दाना-पानी, माता-पिता, नव रत्नपरिवार से — माता, भाई, माँ-बहन, बच्चे
दोनों में जो एक-सा है: दोनों कवि देश को परिवार की तरह देखते हैं — ‘सनेही’ कहते हैं “हैं माता-पिता बंधु जिसमें”, द्विवेदी कहते हैं “अपने भाई का प्यार भरा, माँ-बहनों का सत्कार भरा”। दोनों में टेक जैसी आवृत्ति है (‘नहीं’ और ‘भरा’), दोनों की भाषा सरल है, और दोनों गाए जाने के लिए बने हैं। यही उस युग की कविता की पहचान थी — वह पढ़ी नहीं, गाई जाती थी, क्योंकि उसे पढ़े-लिखे लोगों तक ही नहीं, सब तक पहुँचना था।
Try This: ‘खादी गीत’ की पूरी कविता पुस्तकालय, कविता-कोश या NCERT के ई-पाठशाला जैसे स्रोत से ढूँढ़कर पढ़िए। पढ़ते समय गिनिए कि ‘भरा’ शब्द कितनी बार आया है — और सोचिए कि कवि ने एक ही शब्द इतनी बार क्यों दोहराया।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ