प्र1.
राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा झंडा) देश का सम्मान है। किसी एक दिन सोने से पहले अपने पूरे दिन के कार्यों को याद कीजिए और विचार कीजिए कि आपके किन कार्यों से तिरंगा झंडा उदास हुआ होगा और किन कार्यों से तिरंगे झंडे को प्रसन्नता हुई होगी।
उत्तर
यह आत्म-निरीक्षण की गतिविधि है, इसलिए उत्तर अपने ही दिन का लिखिए — किसी और का नहीं। तरीक़ा यह रखिए:
- सोने से पहले दिन को सुबह से रात तक क्रम से याद कीजिए — घर, रास्ता, विद्यालय, खेल का मैदान, फिर घर।
- हर काम पर एक ही प्रश्न पूछिए — “यह काम अगर सब भारतवासी करें तो देश बेहतर बनेगा या बिगड़ेगा?”
- दो स्तंभ बनाकर लिखिए। शाम को केवल गिनना नहीं है — कल के लिए एक सुधार भी तय कीजिए।
| दिन का काम | तिरंगा प्रसन्न / उदास | क्यों |
|---|---|---|
| ब्रश करते समय नल खुला छोड़ दिया | उदास | देश के जल की व्यर्थ बरबादी |
| बस में बुज़ुर्ग को अपनी सीट दे दी | प्रसन्न | देशवासी का आदर |
| टॉफ़ी का रैपर सड़क पर फेंक दिया | उदास | सार्वजनिक स्थान गंदा किया |
| कक्षा का काम समय पर और मन लगाकर किया | प्रसन्न | विद्यार्थी का अस्त्र उसकी पढ़ाई ही है |
| दूसरे प्रदेश से आए साथी की भाषा का मज़ाक उड़ाया | उदास | देश की भाषा-विविधता का अपमान |
| कमरे से निकलते समय पंखा और बत्ती बंद की | प्रसन्न | बिजली की बचत |
| घर के पौधों को पानी दिया और एक नया पौधा लगाया | प्रसन्न | देश की धरती को हरा किया |
| कतार तोड़कर पानी की टंकी से पहले पानी भर लिया | उदास | दूसरों का हक़ छीना, नियम तोड़ा |
नमूना उत्तर (एक वाक्य में): “आज तिरंगा दो बार उदास हुआ — जब मैंने नल खुला छोड़ा और जब रैपर सड़क पर फेंका; और चार बार प्रसन्न हुआ — बस में सीट देने पर, समय पर काम करने पर, बत्ती बंद करने पर और पौधा लगाने पर। कल से मैं नल हमेशा बंद करके ही जाऊँगा।”
इस गतिविधि का असली उद्देश्य: तिरंगे का सम्मान केवल 15 अगस्त और 26 जनवरी का काम नहीं है। कवि भी यही कह रहा है — देश-प्रेम कोई बड़ा अवसर नहीं माँगता, वह रोज़ के छोटे-छोटे कामों में दिखता है।