मल्हार अध्याय 4 आपकी बात

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
1. “मैंने गंगा जी के तट पर रसोई करके… भोजन किया।” क्या आपने कभी खुले वातावरण में या प्रकृति के पास भोजन किया है? वह अनुभव घर के खाने से कैसे भिन्न था?
उत्तर

यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। अच्छे उत्तर में तीन बातें होनी चाहिए — कहाँ और कब, वहाँ क्या-क्या महसूस हुआ, और वह अनुभव घर के खाने से किन बातों में अलग था।

तुलना का बिंदुघर का भोजनखुले में किया भोजन
वातावरणपंखा, दीवारें, तय जगहहवा, धूप-छाँव, पक्षियों की आवाज, मिट्टी की गंध
तैयारीबना-बनाया मिल जाता हैसब मिलकर करते हैं — लकड़ी बीनना, पत्तल लगाना, पानी लाना
साथप्रायः परिवार, जल्दी-जल्दीसब एक साथ बैठते हैं, कोई जल्दी नहीं होती
स्वादआदत कावही खाना अधिक स्वादिष्ट लगता है — भूख, थकान और साथ मिलकर स्वाद बढ़ा देते हैं

नमूना उत्तर: पिछले वर्ष हमारी कक्षा एक दिन के भ्रमण पर बाँध के किनारे गई थी। दोपहर में हम सब एक पीपल के नीचे बैठ गए। किसी ने पत्तल बिछाई, किसी ने पानी की बोतलें बाँटीं, और सबने अपने-अपने टिफिन खोलकर बीच में रख दिए। किसी की पूरी, किसी का पराँठा, किसी का अचार — सब मिलकर खाया गया। ऊपर से पत्तों में से छनकर धूप गिर रही थी और सामने पानी हिल रहा था। घर में खाते समय मैं अक्सर जल्दी में रहता हूँ; उस दिन पहली बार मुझे लगा कि खाना भी आराम से करने की चीज है। जो रोटी घर में साधारण लगती है, वही उस दिन बहुत स्वादिष्ट लगी — शायद इसीलिए भारतेंदु जी ने भी लिखा था कि पत्थर पर किया वह भोजन सोने की थाल से बढ़कर था।

प्र2.
2. “उस समय के पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल के भोजन से कहीं बढ़ के था।” आपके जीवन में ऐसा कोई क्षण आया, जब किसी सामान्य-सी वस्तु ने आपको गहरा सुख दिया हो? उसके बारे में बताइए।
उत्तर

उत्तर की बनावट: पहले वह क्षण बताइए, फिर वह वस्तु, और अंत में यह कि वह साधारण वस्तु उस दिन असाधारण क्यों बन गई। अंतिम बात ही उत्तर की जान है।

नमूना उत्तर: पिछली गर्मियों में एक दोपहर मैं साइकिल से लौट रहा था। लू चल रही थी और बोतल का पानी खत्म हो चुका था। रास्ते में एक बुजुर्ग ने अपनी दुकान के बाहर रखी मिट्टी की सुराही से मुझे एक गिलास पानी दिया। वह न कोई ठंडा पेय था, न किसी दुकान का। पर उस समय वह गिलास भर पानी मुझे किसी भी चीज से अधिक अच्छा लगा। घर लौटकर फ्रिज का पानी पीते समय मुझे वह स्वाद याद आया और मैंने सोचा — वस्तु तो वही थी, अंतर मेरी जरूरत का था।

यही बात पाठ भी कहता है: लेखक के लिए भी भोजन नया नहीं था, थाली नई थी — पत्थर। पर जगह, समय और मन की अवस्था ने उस साधारण भोजन को सबसे बड़ा सुख बना दिया। इसका अर्थ यह हुआ कि सुख वस्तु में नहीं, वस्तु और हमारे बीच के संबंध में होता है
Tip: ऐसा उत्तर लिखते समय बड़ी और महँगी घटनाएँ मत चुनिए। जितनी साधारण वस्तु होगी, उत्तर उतना ही प्रभावी बनेगा — यही प्रश्न का उद्देश्य भी है।
प्र3.
3. “हर तरफ पवित्रता और प्रसन्नता बिखरी हुई थी।” आपको किस स्थान पर पवित्रता और प्रसन्नता का अनुभव होता है? क्या कोई ऐसा स्थान है जहाँ जाते ही मन शांत हो गया हो? उस स्थान की कौन-सी बातें आपको अच्छी लगीं?
उत्तर

ध्यान रखिए — प्रश्न ‘पवित्र स्थान’ का नहीं, उस स्थान का है जहाँ आपका मन शांत होता है। वह मंदिर, गुरुद्वारा, मस्जिद या गिरजाघर हो सकता है; पर पुस्तकालय, नदी का किनारा, खेत, छत या दादी का कमरा भी हो सकता है।

अच्छे उत्तर में ये बातें आनी चाहिए

  • स्थान का नाम और वह कहाँ है
  • वहाँ की दो-तीन ठोस बातें — कोई आवाज, कोई गंध, कोई दृश्य
  • मन शांत क्यों होता है — इसका कारण

नमूना उत्तर: हमारे मोहल्ले के पीछे एक पुराना बगीचा है जिसमें एक बड़ा बरगद है। शाम को वहाँ बहुत कम लोग होते हैं। उस बरगद की जड़ों पर बैठते ही सबसे पहले शोर कम हो जाता है — सड़क की आवाज दूर से आती हुई लगती है। ऊपर हजारों पत्तों की सरसराहट होती है और लौटते पक्षियों का शोर। मिट्टी में पानी छिड़का हो तो एक गंध उठती है जो मुझे बहुत अच्छी लगती है। वहाँ मुझसे कोई कुछ नहीं पूछता, कोई काम याद नहीं दिलाता। शायद इसीलिए वहाँ बैठते ही मन शांत हो जाता है। मुझे लगता है कि किसी स्थान की पवित्रता उसकी इमारत से नहीं, वहाँ मिलने वाली शांति और सुरक्षा से बनती है — जैसे हरिद्वार में लेखक को “झगड़े-लड़ाई का कहीं नाम भी नहीं” मिला था।

प्र4.
4. पाठ में वर्णित है, यहाँ के वृक्ष “फल, फूल, गंध… जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोरथ पूर्ण करते हैं।” क्या आपके जीवन में कोई पेड़, फूल या प्राकृतिक वस्तु है जिससे आप विशेष जुड़ाव महसूस करते हैं? क्यों?
उत्तर

उत्तर में ‘क्यों’ सबसे जरूरी है। जुड़ाव किसी न किसी याद से बनता है — किसने लगाया, किसके साथ देखा, कब सहारा मिला। वही याद लिखिए।

नमूना उत्तर: हमारे आँगन में एक अमरूद का पेड़ है जिसे मेरे दादा जी ने मेरे जन्म के वर्ष लगाया था। घरवाले कहते हैं कि मैं और वह पेड़ साथ-साथ बड़े हुए। गर्मियों में उसकी छाया में चारपाई डाली जाती है, बरसात में उसके पत्तों से टपकती बूँदें गिनना मुझे अच्छा लगता है, और सर्दियों में उसके फल पूरे मोहल्ले में बँटते हैं। पिछले वर्ष तेज आँधी में उसकी एक बड़ी डाल टूट गई थी। उस रात मुझे ठीक से नींद नहीं आई — मानो घर का कोई सदस्य घायल हो गया हो। तभी मैंने समझा कि पाठ में जिन वृक्षों को ‘सज्जन’ कहा गया है, वे वस्तु नहीं होते; वे साथी होते हैं। मेरा उससे जुड़ाव इसलिए है कि उसने कभी कुछ माँगा नहीं और देना कभी बंद नहीं किया।

Try This: अपने चुने हुए पेड़ या पौधे का एक चित्र बनाइए और उसके चारों ओर वे सब चीजें लिखिए जो वह आपको देता है — ठीक वैसे ही जैसे लेखक ने फल, फूल, गंध, छाया… की सूची बनाई थी।
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