यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। अच्छे उत्तर में तीन बातें होनी चाहिए — कहाँ और कब, वहाँ क्या-क्या महसूस हुआ, और वह अनुभव घर के खाने से किन बातों में अलग था।
| तुलना का बिंदु | घर का भोजन | खुले में किया भोजन |
|---|---|---|
| वातावरण | पंखा, दीवारें, तय जगह | हवा, धूप-छाँव, पक्षियों की आवाज, मिट्टी की गंध |
| तैयारी | बना-बनाया मिल जाता है | सब मिलकर करते हैं — लकड़ी बीनना, पत्तल लगाना, पानी लाना |
| साथ | प्रायः परिवार, जल्दी-जल्दी | सब एक साथ बैठते हैं, कोई जल्दी नहीं होती |
| स्वाद | आदत का | वही खाना अधिक स्वादिष्ट लगता है — भूख, थकान और साथ मिलकर स्वाद बढ़ा देते हैं |
नमूना उत्तर: पिछले वर्ष हमारी कक्षा एक दिन के भ्रमण पर बाँध के किनारे गई थी। दोपहर में हम सब एक पीपल के नीचे बैठ गए। किसी ने पत्तल बिछाई, किसी ने पानी की बोतलें बाँटीं, और सबने अपने-अपने टिफिन खोलकर बीच में रख दिए। किसी की पूरी, किसी का पराँठा, किसी का अचार — सब मिलकर खाया गया। ऊपर से पत्तों में से छनकर धूप गिर रही थी और सामने पानी हिल रहा था। घर में खाते समय मैं अक्सर जल्दी में रहता हूँ; उस दिन पहली बार मुझे लगा कि खाना भी आराम से करने की चीज है। जो रोटी घर में साधारण लगती है, वही उस दिन बहुत स्वादिष्ट लगी — शायद इसीलिए भारतेंदु जी ने भी लिखा था कि पत्थर पर किया वह भोजन सोने की थाल से बढ़कर था।