मल्हार अध्याय 4 प्रकृति का सौंदर्य और संरक्षण

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है…” आपने पत्र में पढ़ा कि हरिद्वार का प्राकृतिक सौंदर्य अद्भुत है। इस सौंदर्य को बनाए रखने में प्रत्येक मानव की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस विषय में अपने समूह में चर्चा कीजिए। इसके बाद अपने समूह के साथ मिलकर “तीर्थ ही नहीं, पृथ्वी भी पावन हो!” विषय पर जन-जागरूकता पोस्टर बनाइए।
उत्तर

पहले चर्चा — किन बिंदुओं पर

  • तीर्थस्थानों पर सबसे बड़ी समस्याएँ क्या हैं — प्लास्टिक, पूजा-सामग्री और पॉलीथिन का नदी में बहाना, भीड़, वाहनों का धुआँ, पहाड़ों पर अनियोजित निर्माण।
  • क्या हम केवल तीर्थ को पवित्र मानते हैं और अपने मोहल्ले, नदी, तालाब को नहीं? यही तो नारे का प्रश्न है — पावन केवल तीर्थ क्यों, पूरी पृथ्वी क्यों नहीं?
  • एक विद्यार्थी क्या कर सकता है — अपना कचरा वापस लाना, कपड़े का थैला, नल बंद करना, पौधा लगाना, दूसरों को टोकना।

पोस्टर कैसे बनाइए — नियम

  1. एक ही मुख्य नारा, सबसे बड़े अक्षरों में और सबसे ऊपर।
  2. एक ही मुख्य चित्र — बहुत सारे छोटे चित्र पोस्टर को कमजोर कर देते हैं।
  3. तीन से चार छोटे संदेश, हर एक अधिक-से-अधिक पाँच-छह शब्दों का।
  4. नीचे एक कोने में समूह का नाम/कक्षा। खाली जगह छोड़िए — भरा हुआ पोस्टर पढ़ा नहीं जाता।

नमूना पोस्टर (सामग्री)

तीर्थ ही नहीं, पृथ्वी भी पावन हो!
(चित्र: बीच में एक नदी और उसके किनारे पर्वत; एक ओर कचरा-मुक्त स्वच्छ घाट, दूसरी ओर कूड़े से भरा घाट)
• जो साथ लाए हैं, वही वापस ले जाएँ
• नदी को भेंट फूल चढ़ाइए, पॉलीथिन नहीं
• एक यात्रा, एक पौधा
• पवित्रता जल में नहीं, व्यवहार में है
— कक्षा 8, पर्यावरण मंडल
नारा अच्छा क्यों है: “तीर्थ ही नहीं, पृथ्वी भी पावन हो!” में एक तुलना छिपी है — यह हमारी अपनी सोच पर प्रश्न उठाता है। जिस पोस्टर में केवल आदेश हो (“कचरा मत फैलाओ”) वह भूल जाता है; जो सोचने पर मजबूर करे, वह याद रह जाता है।
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